सतना में मूसलधार बारिश से हाहाकार, चित्रकूट जलमग्न; 400 दुकानें डूबीं, सड़कों पर चलीं नावें

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सतना में मूसलधार बारिश से हाहाकार, चित्रकूट जलमग्न; 400 दुकानें डूबीं, सड़कों पर चलीं नावें


सतना, 29 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सतना जिले में लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। धार्मिक नगरी चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद बाढ़ की स्थिति विकराल हो गई है। रामघाट सहित कई इलाके जलमग्न हैं। घाट किनारे की करीब 400 दुकानें पानी में डूब गई हैं, जबकि कई प्रमुख धार्मिक स्थल भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। सड़कों पर पानी भरने के कारण कई स्थानों पर नावों से आवागमन की स्थिति बन गई है।

चित्रकूट में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए दो हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं। वहीं, एसडीआरएफ की टीमें नावों के जरिए प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटी हैं।

रामघाट में हालात बिगड़े, पुल को भी नुकसान

मंदाकिनी नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण रामघाट क्षेत्र में हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं। इसी बीच उफनती नदी के तेज बहाव से रामघाट का बड़ा पुल टूटने की खबर सामने आई है। पुल और नदी के रौद्र रूप को देखकर स्थानीय लोगों तथा श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई। कई लोग अपने घरों और प्रतिष्ठानों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हुए।

चित्रकूट में पिछले करीब 14 घंटे से जारी बारिश के कारण सतना से चित्रकूट जाने वाला मार्ग तीन स्थानों पर बंद हो गया है। इससे प्रशासनिक वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। रामघाट, भारत घाट, आरोग्यधाम, गुप्त गोदावरी और सती अनुसूइया क्षेत्र में भी पानी भर गया है। नयागांव स्थित राजमहल के अंदर तक पानी पहुंचने की जानकारी है।

रामघाट क्षेत्र में बाढ़ का असर सबसे अधिक दिखाई दे रहा है। घाट किनारे की करीब 400 दुकानें पानी में डूब चुकी हैं। करीब 25 फीट ऊंचा बड़ा पुल भी डूबने की कगार पर पहुंच गया है और उसकी रेलिंग टूट गई है।

रेलवे ट्रैक पर पानी, ट्रेन रोकी गई

मझगवां के समीप रेलवे ट्रैक पर पानी आ जाने के कारण आनंद विहार-रीवा एक्सप्रेस को बीच रास्ते रोकना पड़ा। वहीं घरों और होटलों में फंसे श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों को बाहर निकालने के लिए एसडीआरएफ की टीमें नावों की सहायता से लगातार अभियान चला रही हैं।

झरी गांव में एसडीआरएफ ने ग्रामीणों को निकाला

लगातार बारिश से नदी-नालों के उफान पर आने के बीच जैतवारा तहसील के झरी गांव में भी बाढ़ का पानी बढ़ गया। यहां ग्रामीणों के फंसे होने की सूचना मिलने पर एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और अभियान चलाकर लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। जवानों ने बाढ़ के तेज बहाव के बीच ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।

रेस्क्यू अभियान की निगरानी बिरसिंहपुर तहसीलदार डॉ. शैलेंद्र बिहारी शर्मा और जैतवारा तहसीलदार ज्योति पटेल सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने की। प्रशासन ने लोगों से उफनती नदियों और नालों के समीप नहीं जाने तथा सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।

सेमरावल नदी भी उफनी, कई रास्तों पर आवागमन प्रभावित

कोठी थाना क्षेत्र के पुरवा गांव के समीप सेमरावल नदी ने भी रौद्र रूप धारण कर लिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई दशकों बाद नदी का जलस्तर इस तरह बढ़ा है। तेज बहाव के कारण कई जगह पानी सड़कों और पुल-पुलियों के ऊपर से बह रहा है। इसे देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों पर बल तैनात किया है।

इटमा में 50 घरों में घुसा पानी

कोठी थाना क्षेत्र के इटमा गांव में लगातार बारिश और जलभराव के कारण करीब 50 घरों में पानी घुस गया है। अचानक बढ़े जलस्तर से ग्रामीणों की गृहस्थी का सामान भी प्रभावित हुआ है। कई परिवार जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हुए हैं।

प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत उपलब्ध कराने, परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने तथा राशन सहित आवश्यक सहायता मुहैया कराने की मांग की है।

नागौद थाना परिसर बना तालाब

जिले में लगातार हो रही बारिश से नागौद शहर भी जलभराव की चपेट में है। करीब नौ घंटे से जारी बारिश के कारण कई सड़कें जलमग्न हो गई हैं। जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होने से बारिश का पानी घरों में भी पहुंच गया है।

नागौद थाना परिसर में भी इतना पानी भर गया कि पूरा परिसर तालाब जैसा दिखाई देने लगा। इससे पुलिसकर्मियों और फरियादियों की आवाजाही प्रभावित हुई। स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने जल निकासी व्यवस्था को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।

वन्य क्षेत्रों और नदी-नालों के आसपास सतर्कता

लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन तथा पुलिस ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट रखा गया है। प्रशासन ने नागरिकों और श्रद्धालुओं से नदी, नाले और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के समीप नहीं जाने तथा स्थानीय प्रशासन की अपील और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने को कहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी

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