सतना-मैहर में डेंगू का बढ़ा खतरा, सात माह में 32 मरीज मिले; तीन ब्लॉक हॉटस्पॉट

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सतना-मैहर में डेंगू का बढ़ा खतरा, सात माह में 32 मरीज मिले; तीन ब्लॉक हॉटस्पॉट


सतना, 08 अगस्त (हि.स.)। बारिश के मौसम के साथ मध्य प्रदेश के सतना और मैहर जिले में डेंगू के मामले सामने आने लगे हैं। वर्ष 2026 में जनवरी से जुलाई के बीच दोनों जिलों में डेंगू के 32 मरीज सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू के बढ़ते खतरे को देखते हुए रामपुर बघेलान, देवराजनगर और अमरपाटन को संवेदनशील क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया है।

जिला अस्पताल में भी डेंगू की आशंका वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्पताल में रोजाना करीब 10 से 15 मरीज डेंगू की जांच के लिए एलाइजा परीक्षण करा रहे हैं। हालांकि अभी जांच में संक्रमित मरीजों की संख्या कम है, लेकिन बारिश के साथ आने वाले महीनों में मामलों में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है।

रामपुर बघेलान में सबसे ज्यादा मामले

मलेरिया विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक सामने आए 32 मामलों में अकेले रामपुर बघेलान क्षेत्र में 12 मरीज मिले हैं। अमरपाटन में पांच और देवराजनगर में चार मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। विभागीय जानकारी के मुताबिक सामने आए संक्रमित मामलों में करीब 70 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं, जो दूसरे शहरों से डेंगू की चपेट में आने के बाद यहां पहुंचे हैं।

प्लेटलेट्स की मांग भी बढ़ी

डेंगू के मामलों के बीच सतना और मैहर के जिला अस्पतालों में प्लेटलेट्स की मांग में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है। सूत्रों के अनुसार प्रतिदिन करीब 10 से 15 लोग प्लेटलेट्स के लिए पहुंच रहे हैं। डेंगू के मरीज बढ़ने पर यह मांग एक दिन में 30 यूनिट या उससे अधिक तक पहुंच सकती है।

डेंगू के दौरान कई मरीजों में प्लेटलेट्स तेजी से कम हो जाते हैं। गंभीर स्थिति में एक मरीज को चार से छह यूनिट तक प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि हर डेंगू मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता नहीं होती।

सितंबर से नवंबर तक ज्यादा सतर्कता जरूरी

चिकित्सकों के अनुसार डेंगू के लिहाज से सितंबर, अक्टूबर और नवंबर को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है। जुलाई और अगस्त से इसके मामले सामने आने लगते हैं। डेंगू एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर साफ और जमा पानी में पनपता है।

घर की छत पर रखे पुराने टायर, कूलर की टंकी, गमले, कंटेनर या ऐसी अन्य वस्तुएं जिनमें बारिश का पानी जमा हो जाता है, एडीज मच्छर के प्रजनन का कारण बन सकती हैं। कुछ दिनों तक पानी जमा रहने पर इनमें मच्छरों के लार्वा पनपने लगते हैं।

अस्पताल में जांच और उपचार की व्यवस्था

जिला अस्पताल में डेंगू की आशंका वाले मरीजों की नियमित एलाइजा जांच की जा रही है। संक्रमित मरीजों को जरूरत के अनुसार पुरुष और महिला चिकित्सा वार्ड में भर्ती किया जाता है। बच्चों के लिए पीआईसीयू और गंभीर मरीजों के उपचार के लिए आईसीयू की सुविधा भी उपलब्ध है।

सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह ने बताया कि अस्पताल में डेंगू मरीजों के उपचार की पर्याप्त व्यवस्था है। आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को चिकित्सा वार्ड से आईसीयू में स्थानांतरित किया जाता है। डेंगू की आशंका वाले मरीजों की रोजाना एलाइजा जांच भी की जा रही है।

डेंगू के प्रमुख लक्षण

तेज बुखार

मांसपेशियों में दर्द

सिर में तेज दर्द

हड्डियों और जोड़ों में दर्द

प्लेटलेट्स का कम होना

रक्तचाप कम होना

गंभीर स्थिति में मसूड़ों या पेशाब से खून आना

बचाव के लिए सावधानी जरूरी

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने की अपील की है। सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करने, पूरी बांह के कपड़े पहनने और घर के आसपास मच्छररोधी दवा का छिड़काव कराने की सलाह दी गई है। डेंगू जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करने और इलाज में लापरवाही नहीं बरतने को कहा गया है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार डेंगू से बचाव के लिए मच्छरों के प्रजनन स्थल खत्म करना सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। बारिश के मौसम में घर और आसपास नियमित रूप से पानी की जांच कर उसे खाली रखने से संक्रमण का खतरा कम किया जा सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी

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