अनूपपुर: नर्मदा परिक्रमा : 111 नर्मदा भक्तों संग संत गोपाल चैतन्य जी महाराज पहुंचे अमरकंटक
अनूपपुर, 08 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित मॉ नर्मदा उद्गम अमरकंटक में मां नर्मदा के अनन्य उपासक परम तपस्वी संत गोपाल चैतन्य जी महाराज 111 नर्मदा भक्तों के साथ मां नर्मदा की पैदल परिक्रमा करते हुए गुरूवार को पहुंचे, जहां शाम को रामघाट में पूजा अर्चन किया। शुक्रवार की सुबह माई कि बगिया में तट परिवर्तन कर पूजन कर आगे की यात्रा के लिए प्रस्थान करेंगे। ज्ञात हो कि संत गोपाल चैतन्य जी महाराज 25 अक्टूबर 2025 को मध्य प्रदेश के सिद्ध तीर्थ ओंकारेश्वर से 111 नर्मदा भक्तों के साथ मां नर्मदा पैदल परिक्रमा पर निकले हैं। जो 15 फरवरी 2026, महाशिवरात्रि के महासंयोग पर ओंकारेश्वर–छनेरा में विधिवत पूर्ण होगी।
भक्ति, वैराग्य और साधना से ओत-प्रोत यह नर्मदा परिक्रमा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति का चलायमान यज्ञ है। परिक्रमा के दौरान 111 श्रद्धालु अखंड हरि नाम संकीर्तन करते हुए, मां नर्मदा के तट-तट पर उनके पावन चरणों में श्रद्धा के पुष्प अर्पित कर रहे हैं। इस दिव्य यात्रा में महिलाएं, पुरुष, युवा एवं बालिकाएं समान भाव से सहभागी हैं, जो भीषण शीत लहर के बीच भी भक्ति रस में सराबोर होकर ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते-गाते आगे बढ़ रहे हैं। आज यह पावन यात्रा नर्मदा उद्गम की पवित्र धरती अमरकंटक पहुंची। यहां यात्रा दल का पड़ाव मृत्युंजय आश्रम में है। संध्या काल में रामघाट नर्मदा तट पर मां नर्मदा का विधिविधान से पूजन-अर्चन, दीप आरती एवं भावपूर्ण वंदन संपन्न हुआ। तत्पश्चात नर्मदा महिमा कथा एवं श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालु भाव-विभोर होकर मां नर्मदा की महिमा का श्रवण करते रहें।
इस अवसर पर संत गोपाल चैतन्य जी महाराज ने परिक्रमा के आध्यात्मिक संकल्पों को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह यात्रा मां नर्मदा के पावन जल की शुद्धता एवं अक्षुण्यता, धर्म की पुनः प्रतिष्ठा, सनातन संस्कृति के संरक्षण, राष्ट्रहित एवं देशप्रेम की भावना, युवाओं को सदाचार और साधना के मार्ग पर प्रेरित करने, धर्मांतरण जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध जन-जागरण, तथा नर्मदा तटों पर वृक्षारोपण जैसे पुण्य उद्देश्यों के साथ की जा रही है। उन्होंने कहा कि जब तक जन-जन के हृदय में भगवत नाम का दीप प्रज्वलित नहीं होगा, तब तक धर्म की रक्षा संभव नहीं।
महाशिवरात्रि के पावन दिवस 15 फरवरी 2026 को नर्मदा परिक्रमा का दिव्य समापन ओंकारेश्वर एवं छनेरा धाम आश्रम में विशेष वैदिक अनुष्ठानों के साथ होगा। इस अवसर पर माई की बगिया से जल परिवर्तन, उत्तर-दक्षिण जल पूजन, अभिषेक एवं विशेष साधनात्मक क्रियाएं संपन्न की जाएंगी। इसके पश्चात मां नर्मदा की कृपा से आगे की यात्रा पुनः आरंभ होगी। उल्लेखनीय है कि संत गोपाल चैतन्य जी महाराज का प्रमुख आश्रम ओंकारेश्वर के छनेरा में स्थित है, वहीं महाराष्ट्र के जलगांव जिले के पाल में भी उनका आध्यात्मिक आश्रम धाम स्थापित है, जहां से निरंतर सनातन चेतना का प्रवाह जन-जन तक पहुंच रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

