सागरः गौरझामर के दो सगे भाइयों ने पांच माह में पूर्ण की 3000 किमी की नर्मदा परिक्रमा

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सागरः गौरझामर के दो सगे भाइयों ने पांच माह में पूर्ण की 3000 किमी की नर्मदा परिक्रमा


सागर, 30 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर जिले के गौरझामर की गलियों में सोमवार को भक्ति, शक्ति और दृढ़ संकल्प का एक अनूठा संगम देखने को मिला। नगर के प्रतिष्ठित परिवार, मेहरबान सिंह (मडिया वाले) के सुपुत्र और स्वर्गीय डॉ. डी सिंह के पौत्र आयुष एवं तनिष्क अपनी 3000 किलोमीटर की कठिन पैदल नर्मदा परिक्रमा सफलतापूर्वक पूर्ण कर लगभग 5 माह के लंबे अंतराल के बाद अपने गृह नगर लौटे, तो पूरा क्षेत्र उनके स्वागत में उमड़ पड़ा।

आयुष और तनिष्क की घर वापसी पर गौरझामर के नागरिकों ने पलक-पावड़े बिछा दिए। ढोल-नगाड़ों और 'नर्मदे हर' के जयघोष के बीच ग्रामीणों ने दोनों युवाओं को फूल-मालाएं पहनाईं और श्रीफल भेंट कर उनका अभिनंदन किया। परिजनों के लिए यह क्षण भावुक कर देने वाला था, क्योंकि युवावस्था की चकाचौंध को छोड़ इन दोनों भाइयों ने अध्यात्म और तपस्या का मार्ग चुना।

इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक बृज बिहारी पटेरिया ने अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि आज के आधुनिक युग में युवावस्था के भीतर धर्म और अध्यात्म के प्रति ऐसी अटूट श्रद्धा देखना अत्यंत प्रेरणादायी है। आयुष और तनिष्क ने न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे गौरझामर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। माँ रेवा का आशीर्वाद इन पर सदैव बना रहे।

मां नर्मदा की परिक्रमा को हिंदू धर्म में सबसे कठिन और पुण्यदायी माना जाता है। आयुष और तनिष्क ने पिछले 150 दिनों (5 माह) से अधिक समय तक पैदल चलकर इस पावन यात्रा को संपन्न किया। कड़कड़ाती ठंड, दुर्गम रास्ते और लंबी दूरी की चुनौतियों को पार करते हुए उनकी यह सकुशल वापसी क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए भी धर्म पथ पर चलने की प्रेरणा बनी है।

नगरवासियों का कहना है कि यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि गौरव की बात है कि गौरझामर की नई पीढ़ी अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ी हुई है। समस्त क्षेत्रवासियों ने मेहरबान सिंह के परिवार को बधाई देते हुए दोनों युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे

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