झाबुआ: आर्यिका 105 श्रीविनम्रज्योति माताजी का सल्लेखना पूर्वक उत्कृष्ट समाधि मरण

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झाबुआ: आर्यिका 105 श्रीविनम्रज्योति माताजी का सल्लेखना पूर्वक उत्कृष्ट समाधि मरण


झाबुआ: आर्यिका 105 श्रीविनम्रज्योति माताजी का सल्लेखना पूर्वक उत्कृष्ट समाधि मरण


झाबुआ, 06 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के थांदला मे जिनशासन को समर्पित संघस्थ आर्यिका 105 श्री विनम्रज्योति माताजी का बुधवार रात सल्लेखना पूर्वक उत्कृष्ट समाधि मरण सम्पन्न हुआ। गुरूवार को आचार्य श्री 108 कुशाग्रनंदीजी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में संघस्थ आर्यिका 105 श्री विनम्रज्योति माताजी का समाधि पूर्वक अंतिम संस्कार किया गया।

इस अवसर पर श्वेतांबर स्थानकवासी जैन संघ में तत्त्वज्ञ पूज्य श्री धर्मेन्द्रमुनिजी महाराज एवं पूज्या श्री निखिलशीलाजी महासतीजी भी मौजूद रहे। समाधि के उपरांत संतों के पावन सानिध्य में धर्मसभा आयोजित की गई जिसमें चार लोगस्स के साथ शुभमंगल कामना की गई कि उन्हें मोक्षमार्गगामी आत्मा को निरंतर आराधना एवं जिनशासन का सानिध्य प्राप्त होता रहे।

पूज्य माताजी की अंतिम यात्रा थांदला नगर स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर से खजूरी में गोमटगिरी तीर्थ तक अत्यंत श्रद्धा एवं भक्ति के साथ निकाली गई। डोल यात्रा में दिगंबर एवं श्वेतांबर जैन समाज सहित बड़ी संख्या में जैन-जैनेत्तर नागरिकों ने साध्वीजी को अंतिम विदाई दी।

पूज्य माताजी विषय-कषायों का त्याग कर पूर्ण आत्मसाधना में लीन थीं। चातुर्मास के लिए वे मुंबई से थांदला पधारी थीं तथा पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं।सल्लेखना व्रत के साथ उनका शांत एवं आध्यात्मिक समाधि मरण जैन परंपरा में साधना की पूर्णता का प्रतीक माना गया। पूज्य माताजी के अंतिम मनोरथ की सिद्धि पर श्रद्धालुओं ने एक तरफ़ जहां आध्यात्मिक संतोष व्यक्त किया,वहीं एक महान आत्मा के देवलोकगमन से संघ एवं समाज में गहरा शोक भी व्याप्त रहा।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. उमेश चंद्र शर्मा

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