ग्रामीण विकास पर सवाल, बजट का 41% ही खर्च, सरकार सिर्फ सुर्खियों में व्यस्त- जीतू पटवारी
भाेपाल, 07 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य की भाजपा सरकार पर ग्रामीण विकास योजनाओं की अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े विभागों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है, जबकि सरकार केवल सुर्खियाँ बटोरने में व्यस्त है।
जीतू पटवारी शनिवार काे अपने बयान में कहा कि सरकार बजट प्रबंधन और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर बेहद लापरवाह साबित हो रही है। केंद्र और राज्य के सहयोग से संचालित कई योजनाओं के लिए पर्याप्त बजट आवंटित होने के बावजूद उसका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। इससे ग्रामीण विकास की योजनाएँ जमीनी स्तर पर प्रभावित हो रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2025–26 के लिए ग्रामीण विकास विभाग को 27,745.18 करोड़ रूपये का बजट दिया गया था, लेकिन 7 मार्च 2026 तक इसमें से केवल 11,457.66 करोड़ रूपये ही खर्च किए गए हैं, जो कुल बजट का करीब 41.30 प्रतिशत है। पटवारी के मुताबिक यह आंकड़े बताते हैं कि सरकार की प्राथमिकता विकास नहीं, बल्कि घोषणाएँ और प्रचार है।
प्रमुख योजनाओं में कम खर्च का आरोप
पटवारी ने कहा कि ग्रामीण विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं में भी बजट का बहुत कम उपयोग हुआ है। उनके अनुसार —
दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना: ₹210 करोड़ में से ₹7.23 करोड़ (3.44%) खर्च
निर्मल भारत अभियान: ₹916 करोड़ में से ₹55 करोड़ (6.01%) खर्च
प्रधानमंत्री आवास योजना: ₹8,835.22 करोड़ में से ₹4,465.56 करोड़ (50.54%) खर्च
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना: ₹2,218.87 करोड़ में से ₹805.73 करोड़ (36.31%) खर्च
प्रधानमंत्री जनमन योजना (सड़क): ₹1,478.40 करोड़ में से ₹111.20 करोड़ (7.52%) खर्च
प्रधानमंत्री जनमन योजना (आवास): ₹1,304.46 करोड़ में से ₹682.69 करोड़ (52.34%) खर्च
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन: ₹1,066.44 करोड़ में से ₹219.77 करोड़ (20.61%) खर्च
मनरेगा: ₹6,446.69 करोड़ में से ₹1,170.78 करोड़ (18.16%) खर्च
रूरल सेल्फ एम्प्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट: ₹63 करोड़ में से कोई खर्च नहीं
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (वाटरशेड विकास): ₹384.74 करोड़ में से ₹114.51 करोड़ (29.76%) खर्च
गांवों के विकास पर असर का दावा
पटवारी ने कहा कि यदि ग्रामीण विकास की योजनाओं पर ही पर्याप्त खर्च नहीं होगा तो गांवों में रोजगार, सड़क, आवास और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार कैसे होगा। उनका आरोप है कि सरकार की लापरवाही, आर्थिक कुप्रबंधन और बढ़ते भ्रष्टाचार के कारण कई योजनाएँ धरातल तक पहुंचने से पहले ही प्रभावित हो जाती हैं।
उन्होंने भाजपा सरकार से मांग की कि ग्रामीण विकास विभाग के बजट का समयबद्ध और पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि गांवों, किसानों, मजदूरों और गरीब परिवारों को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

