रीवा : संघ शताब्दी वर्ष में युवाशक्ति का संगम, रीवा में युवा सम्मेलन संपन्न

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रीवा : संघ शताब्दी वर्ष में युवाशक्ति का संगम, रीवा में युवा सम्मेलन संपन्न


रीवा : संघ शताब्दी वर्ष में युवाशक्ति का संगम, रीवा में युवा सम्मेलन संपन्न


रीवा, 12 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर रीवा जिले में आयोजित युवा सम्मेलन अत्यंत अनुशासित, गरिमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह आयोजन युवाशक्ति के जागरण और राष्ट्रनिर्माण के संकल्प को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करता दिखाई दिया। सम्मेलन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि युवा यदि सही दिशा, संस्कार और संकल्प के साथ आगे बढ़ें, तो राष्ट्र के सर्वांगीण विकास को नई गति मिल सकती है।

सम्मेलन में रीवा जिले के विभिन्न मंडलों और ग्रामों से आए सैकड़ों युवा स्वयंसेवकों ने पूरे समर्पण, अनुशासन और उत्साह के साथ सहभागिता की। प्रातःकाल से ही सम्मेलन स्थल पर स्वयंसेवकों की अनुशासित उपस्थिति, एकरूप वेशभूषा और समयपालन ने वातावरण को प्रेरणादायी बना दिया। प्रार्थना, घोष और संघ गीतों के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, जिसने उपस्थित युवाओं में राष्ट्रभक्ति, एकात्मता और संगठन के प्रति आत्मीय भाव को और अधिक प्रखर कर दिया।

इस ऐतिहासिक आयोजन में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख रमेश पप्पा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संतोष मिश्रा रहे। इसके अतिरिक्त महाकौशल प्रांत एवं रीवा विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी, कार्यकर्ता और अनुभवी स्वयंसेवक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने अपने अनुभवों और विचारों के माध्यम से युवाओं का मार्गदर्शन किया तथा उन्हें संघ के मूल उद्देश्यों से जोड़ने का प्रयास किया।

मुख्य वक्ता रमेश पप्पा ने युवाओं से संघ द्वारा प्रतिपादित पंच परिवर्तनों को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज का युवा केवल व्यक्तिगत उन्नति और सुविधाओं तक सीमित न रहे, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को गहराई से समझे। स्वदेशी, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और नागरिक कर्तव्य ये पंच परिवर्तन यदि युवाओं के जीवन का अभिन्न अंग बन जाएं, तो राष्ट्र के सर्वांगीण विकास को एक नई दिशा और सुदृढ़ आधार मिल सकता है।

उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि विवेकानंद ने युवाओं को राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति बताया था। विवेक, अनुशासन, सेवा भाव और प्रखर राष्ट्रभाव के माध्यम से ही समाज में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन संभव है। रमेश पप्पा ने युवाओं से आग्रह किया कि वे संघ के संस्कारों को केवल विचारों तक सीमित न रखें, उन्हें अपने दैनिक व्यवहार और आचरण में उतारें। सेवा कार्यों के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना ही सच्चे राष्ट्रसेवक की पहचान है।

मुख्य अतिथि संतोष मिश्रा ने अपने उद्बोधन में संघ के शताब्दी वर्ष के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सौ वर्षों की निरंतर साधना, सेवा और संगठनात्मक कार्यों के परिणामस्वरूप आज संघ एक सशक्त, व्यापक और प्रभावी संगठन के रूप में स्थापित हुआ है। यह यात्रा त्याग, समर्पण और राष्ट्रहित के संकल्प से संभव हो सकी है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें और सामाजिक एकता व समरसता को और अधिक मजबूत करें।

सम्मेलन के दौरान विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें युवाओं को संघ की कार्यपद्धति, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रसेवा के विविध आयामों से परिचित कराया गया। संवाद, विचार-विमर्श और सामूहिक गतिविधियों के माध्यम से युवाओं में संगठनात्मक एकता, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का विकास करने पर विशेष बल दिया गया। प्रत्येक स्वयंसेवक के आचरण में राष्ट्रभक्ति, सेवा भाव और एकात्मता का भाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ। वहीं कार्यक्रम के समापन अवसर पर वरिष्ठ पदाधिकारियों ने युवाओं से शताब्दी वर्ष के संकल्पों को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह युवा सम्मेलन आने वाले समय में समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव सिद्ध होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

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