समाज आगे बढ़ेगा तभी राष्ट्र आगे बढ़ेगा- दीपक विस्पुते

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समाज आगे बढ़ेगा तभी राष्ट्र आगे बढ़ेगा- दीपक विस्पुते


समाज आगे बढ़ेगा तभी राष्ट्र आगे बढ़ेगा- दीपक विस्पुते


समाज आगे बढ़ेगा तभी राष्ट्र आगे बढ़ेगा- दीपक विस्पुते


- जागते रहो हिंदुओं, फिर कोई मुगल आपके ऊपर आक्रमण ना कर दें - पंडित प्रदीप मिश्रा

भोपाल, 12 जनवरी (हि.स.)। मध्‍य प्रदेश के भोपाल में ओल्ड कैंपियन खेल मैदान, अरेरा कॉलोनी स्थित समिधा बस्ती में आयोजित भव्य हिंदू सम्मेलन समाज जागरण, राष्ट्रचिंतन और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त मंच बनकर सोमवार को उभरा। सम्मेलन का मूल स्वर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख दीपक विस्पुते के विचारों में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जिन्होंने समाज को राष्ट्रनिर्माण की मूल इकाई बताते हुए कहा कि कोई भी देश तभी आगे बढ़ता है जब वहां का समाज आगे बढ़ता है।

दीपक विस्पुते ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह आयोजन केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि समाज को आत्मचिंतन और आत्मनिर्माण की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि भारत भूमि त्याग, तपस्या और बलिदान की परंपरा से सिंचित रही है। इसी धरती पर गुरु तेग बहादुर के 350वें बलिदान वर्ष को स्मरण किया जा रहा है, जिन्होंने धर्म और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इसी वर्ष भगवान बिरसा मुंडा के जीवन के 150 वर्ष भी पूर्ण हो रहे हैं, जिन्होंने विदेशी षड्यंत्रों और शोषण के विरुद्ध जनजागरण का कार्य किया।

उन्होंने वंदे मातरम् के 150 वर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक गीत नहीं, राष्ट्र चेतना का मंत्र है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान असंख्य क्रांतिकारियों को बलिदान के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की लगभग सौ वर्षों की यात्रा निरंतर समाज के बीच चल रही है और यह यात्रा किसी संगठन विस्तार की नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन की यात्रा है। इस यात्रा का आधार संघ की शाखा है, जो प्रतिदिन संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का अभ्यास कराती है।

दीपक विस्पुते ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का स्मरण कराते हुए कहा कि संघ का प्रयास है कि उनके संदेश समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि संकट आने पर संगठित होना पर्याप्त नहीं है, संगठन को जीवन का स्वभाव बनाना होगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोई सामान्य संस्था नहीं, समाज परिवर्तन का महाआंदोलन है, जोकि व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की ओर ले जाता है।

उन्होंने समाज निर्माण के पांच सूत्रों को विस्तार से रखा। पहला सूत्र यह कि समाज में यह भाव स्थापित हो कि हिंदू, हिंदू का भाई है। दूसरा, परिवार को संस्कारों और मूल्यों की प्रथम पाठशाला बनाया जाए। तीसरा, पर्यावरण संरक्षण को केवल नारा नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाए। चौथा, संविधान का अक्षरशः पालन करते हुए अपने नागरिक कर्तव्यों का निर्वहन किया जाए। पांचवां, स्वदेशी, स्वधर्म और स्वराज के भाव को दैनिक जीवन में उतारा जाए। उन्होंने कहा कि यदि समाज इन सूत्रों को आत्मसात कर ले, तो भारत पुनः विश्वगुरु के मार्ग पर अग्रसर होगा, जैसा स्वामी विवेकानंद ने स्वप्न देखा था।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने हिंदू समाज को स्वयं की और समाज की रक्षा का बोध कराया है। आज सनातन धर्म के अनुयायियों को जगाने के लिए ऐसे सम्मेलन करने पड़ रहे हैं, यह आत्ममंथन का विषय है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास के चार महीनों तक हिंदू समाज जागता है, लेकिन यह जागरण स्थायी होना चाहिए। चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा, “जागते रहो हिंदुओं, फिर कोई मुगल आपके ऊपर आक्रमण ना कर दें।” यदि समाज केवल सुविधा और मोबाइल तक सीमित रह गया, तो इतिहास स्वयं को दोहरा सकता है।

उन्होंने माता पार्वती और भगवान शिव की कथा के माध्यम से मातृशक्ति की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि एक स्त्री पूरे परिवार को राष्ट्र और धर्म से जोड़ सकती है। हिंदू सम्मेलन का उद्देश्य यही है कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर हिंदुत्व का भाव जाग्रत हो और वह अपने दायित्वों के प्रति सजग बने।

सम्मेलन में नाट्य मंचन, देशभक्ति गीत, कवि सम्मेलन और प्रेरक उद्बोधनों के माध्यम से हजारों की संख्या में उपस्थित नागरिकों ने राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक गौरव का जीवंत अनुभव किया। कार्यक्रम स्थल भारत माता के जयघोष, वंदे मातरम् और राष्ट्रभक्ति के नारों से गूंजता रहा, जिससे वातावरण पूर्णतः ओजस्वी और प्रेरणादायी बन गया।मंच पर विख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा, दीपक विस्पुते तथा प्रांत सह संघचालक डॉ. राजेश सेठी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के समापन पर भारत माता की संगीतमय आरती की गई, जिसमें हजारों लोगों ने सामूहिक रूप से सहभागिता की। इसके पश्चात सभी उपस्थित नागरिकों को भोजन प्रसादी वितरित की गई। यह भव्य हिंदू सम्मेलन समाज में जागरण, एकता और राष्ट्रनिर्माण के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ करता हुआ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

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