आरपीएफ ने उज्जैन रेलवे स्टेशन पर 50 संदिग्ध वेंडर पकड़े

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आरपीएफ ने उज्जैन रेलवे स्टेशन पर 50 संदिग्ध वेंडर पकड़े


उज्जैन , 04 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में ट्रेनों में यात्रियों को खानपान सामग्री बेचने के लिए रेलवे ने वेंडरों की संख्या और उनकी पात्रता तय कर रखी है, लेकिन उज्जैन स्टेशन पर इस व्यवस्था की आड़ में बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आई है। बुधवार को रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ की कार्रवाई के दौरान 50 संदिग्ध वेंडरों को पकड़ा गया है। इनके आईकार्ड भी जब्त किए गए हैं। अब रेलवे का कमर्शियल विभाग कार्ड और वेंडरों के नामों का अधिकृत सूची से मिलान कर रहा है। जांच के बाद ही पता चलेगा कि कितने लोग फर्जी आईकार्ड लगाकर काम कर रहे थे।

आरपीएफ थाना पुलिस ने बताया कि रतलाम मंडल में ट्रेन साइड वेंडिंग (टीएसवी) योजना के तहत कौशल इंटरप्राइजेज को तीन साल के लिए करीब 90 लाख रुपए में ठेका दिया गया है। इसकी अवधि 29 दिसंबर,25 से 28 दिसंबर,28 तक है। योजना के तहत प्रीमियम ट्रेनों को छोडक़र अन्य ट्रेनों में निर्धारित संख्या में वेंडर यात्रियों को खानपान और जरूरत का सामान बेच सकते हैं। टेंडर की शर्तों के अनुसार एक ट्रेन में अधिकतम चार वेंडर ही काम कर सकते हैं। प्रत्येक वेंडर के पास रेलवे का अधिकृत आईकार्ड, निर्धारित ड्रेस और मेडिकल संबंधी दस्तावेज होना अनिवार्य है। इसके बावजूद कुछ ट्रेनों में निर्धारित संख्या से 4 गुना तक अधिक वेंडर मिलने से पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

बुधवार को आरपीएफ के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त अमित प्रकाश मिश्र अचानक जांच की तो अनियमितताएं सामने आई। संदिग्ध वेंडरों की पहचान के लिए अब आरपीएफ और कमर्शियल विभाग संयुक्त रूप से जांच कर रहे हैं। सहायक सुरक्षा आयुक्त, उज्जैन राजीव उपाध्याय के अनुसार, पहले अधिकृत वेंडरों की अपडेट सूची उपलब्ध नहीं होने से जांच में परेशानी आती थी। अब कमर्शियल विभाग ने वर्तमान में काम कर रहे वेंडरों की सूची उपलब्ध कराई है। आईकार्ड पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करने पर संबंधित व्यक्ति का नाम, पिता का नाम और कार्ड नंबर जैसी जानकारी मिलती है।

ठेकेदार पर हो सकती है कार्रवाईकार्यवाही के बाद अधिकृत सूची से मिलान आरपीएफ और रेलवे के कमर्शियल विभाग द्वारा किया जा रहा है। यदि किसी व्यक्ति के पास आईकार्ड है, लेकिन सूची में उसका नाम नहीं है तो उसे अनधिकृत मानकर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। जांच में स्पष्ट हो जाएगा कि गड़बड़ी के पीछे फर्जी कार्ड का इस्तेमाल है या अनुमति से अधिक लोगों को काम पर लगाया गया था। यदि ठेकेदार की ओर से निर्धारित संख्या से अधिक लोगों को काम पर लगाया गया या ठेके की शर्तों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित ठेकेदार पर भी अनुबंध की शर्तों के अनुसार पेनल्टी या अन्य कार्रवाई हो सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / क्षितिज

Livevns.news Desk
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