रीवा में एनएसयूआई में बढ़ी कलह, जिलाध्यक्ष के आंदोलन पर उपाध्यक्ष ने लगाए अवैध वसूली के आरोप

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रीवा में एनएसयूआई में बढ़ी कलह, जिलाध्यक्ष के आंदोलन पर उपाध्यक्ष ने लगाए अवैध वसूली के आरोप


रीवा, 06 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के रीवा में कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी के बीच अब भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) में भी विवाद सामने आया है। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष पंकज उपाध्याय के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के बीच संगठन के जिला उपाध्यक्ष मानवेन्द्र सिंह गहरवार ने नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के खिलाफ प्रदर्शन को अवैध वसूली से जोड़ते हुए कहा कि उनके पास आरोपों से संबंधित सबूत भी हैं। विवाद के बीच उपाध्यक्ष समेत कई पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा देने की बात कही है।

एनएसयूआई ने अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में कथित अनियमितताओं को लेकर कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। संगठन की ओर से कुलपति के इस्तीफे और विश्वविद्यालय में हुई नियुक्तियों समेत विभिन्न मामलों की जांच की मांग की जा रही है। इसी आंदोलन के दौरान संगठन के भीतर ही आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं।

एनएसयूआई के जिला उपाध्यक्ष मानवेन्द्र सिंह गहरवार ने जिला अध्यक्ष पंकज उपाध्याय के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय को लगातार निशाना बनाने के पीछे अवैध वसूली का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि उनके पास इस संबंध में सबूत हैं और इन्हें यूथ कांग्रेस तथा भोपाल स्थित प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचाया जाएगा।

गहरवार ने कहा कि जब तक इस मामले में कार्रवाई पूरी नहीं होती, वह संगठन में काम नहीं करेंगे। उनके साथ अभिराज बौद्ध, जिला महासचिव राजवीर कुशवाहा और कोषाध्यक्ष पुष्पेन्द्र पटेल सहित कई पदाधिकारियों द्वारा इस्तीफा दिए जाने की बात भी सामने आई है।

गहरवार ने विश्वविद्यालय के कुलपति और शारीरिक शिक्षा विभाग के संचालक के खिलाफ किए जा रहे प्रदर्शन के अलावा टीआरएस कॉलेज में हुए प्रदर्शन को लेकर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि एनएसयूआई का उद्देश्य छात्रों की समस्याओं के लिए आवाज उठाना है, न कि कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों की छवि खराब करना। उन्होंने नेक टीम के निरीक्षण के दौरान भी संस्थान की छवि प्रभावित करने का आरोप लगाया। इन आरोपों के बाद एनएसयूआई के जिला नेतृत्व के सामने संगठनात्मक स्तर पर नया विवाद खड़ा हो गया है।

विश्वविद्यालय में कथित अनियमितताओं के खिलाफ एनएसयूआई का आंदोलन पिछले कुछ समय से लगातार चल रहा था। जिला अध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने कुलपति के खिलाफ प्रदर्शन और अनशन शुरू किया था। संगठन की ओर से विश्वविद्यालय में नियुक्तियों और अन्य मामलों की जांच की मांग प्रमुखता से उठाई जा रही थी। इसी बीच उपाध्यक्ष की ओर से आंदोलन के उद्देश्य पर सवाल उठाए जाने से संगठन के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। हालांकि, अवैध वसूली के आरोपों को लेकर संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना अभी बाकी है।

एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष पंकज उपाध्याय इससे पहले भी विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं। मेडिकल कॉलेज का घेराव, कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में उपमुख्यमंत्री के खिलाफ प्रदर्शन और उनके आवास का घेराव भी संगठन की ओर से किए गए प्रदर्शनों में शामिल रहा है।

कल्पना मिश्रा की मौत के बाद एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने अस्पताल पहुंचकर भी प्रदर्शन किया था। ऐसे में संगठन के भीतर अब यह सवाल भी उठ रहा है कि विश्वविद्यालय के खिलाफ चल रहे मौजूदा आंदोलन को ही अवैध वसूली से क्यों जोड़ा गया है।

एनएसयूआई की ओर से विश्वविद्यालय में नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया जा रहा है। संगठन का कहना है कि यदि अयोग्य शिक्षकों की नियुक्ति हुई है तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है। वहीं, संगठन के ही उपाध्यक्ष द्वारा आंदोलन की मंशा पर सवाल उठाए जाने के बाद अब विवाद के राजनीतिक और संगठनात्मक पहलुओं पर भी चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल एनएसयूआई के भीतर सामने आए आरोपों पर प्रदेश नेतृत्व की ओर से किसी कार्रवाई या जांच को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी

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