नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता घटती है, किसान फसल अवशेषों का करें उपयोग: डॉ. अखिलेश

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नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता घटती है, किसान फसल अवशेषों का करें उपयोग: डॉ. अखिलेश


रीवा, 12 अक्टूबर (हि.स.)। खेतों में फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों यानी नरवाई को जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। इससे बचने के लिए किसानों को नरवाई जलाने के बजाय उसका उपयोग खाद, पशुचारे और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करने में करना चाहिए। कृषि विज्ञान महाविद्यालय रीवा में प्रोफेसर कृषि विज्ञान के वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश कुमार ने सोमवार को किसानों को नरवाई नहीं जलाने की सलाह देते हुए इसके पर्यावरण और खेती पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी।

डॉ. अखिलेश के अनुसार, नरवाई जलने से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाता है, जिसका लोगों के स्वास्थ्य, विशेषकर फेफड़ों और हृदय पर बुरा असर पड़ सकता है। इसके अलावा आग में मिट्टी के लिए उपयोगी पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे अगली फसल के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से एक टन नरवाई जलाने पर करीब 400 किलोग्राम कार्बन, 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलोग्राम फास्फोरस और 25 किलोग्राम पोटाश जैसे महत्वपूर्ण तत्व नष्ट हो जाते हैं। नरवाई जलाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी जीव और सूक्ष्मजीव भी प्रभावित होते हैं। इससे भूमि की गुणवत्ता घटने के साथ उसकी जलधारण क्षमता कम हो सकती है। खेतों में आग लगाने से वातावरण का तापमान बढ़ने और पर्यावरण दूषित होने की समस्या भी पैदा होती है।

उन्होंने बताया कि फसल कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों को सड़ने देने से वे प्राकृतिक रूप से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करते हैं। इसलिए किसानों को नरवाई जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन करना चाहिए।

नरवाई का इस्तेमाल कई उपयोगी कार्यों में किया जा सकता है। इसे पशुओं के चारे के रूप में उपयोग करने के साथ मशरूम उत्पादन के लिए माध्यम के तौर पर भी अपनाया जा सकता है। इसके अलावा किसान फसल अवशेषों को संबंधित उद्योगों को बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं। इन अवशेषों का उपयोग बायोगैस, जैव ईंधन, कागज और पैकेजिंग सामग्री बनाने में किया जाता है।

किसान नरवाई जलाने से बचने के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों की मदद भी ले सकते हैं। हैप्पी सीडर और सुपर सीडर ऐसी मशीनें हैं, जिनकी सहायता से खेत में मौजूद फसल अवशेषों को जलाए बिना अगली फसल की बुवाई की जा सकती है। इससे नरवाई का बेहतर प्रबंधन होने के साथ मिट्टी की सेहत और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में भी मदद मिलती है।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी

Livevns.news Desk
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