रीवा में डॉक्टरों की ड्यूटी पर होगी सख्ती, अस्पताल समय में निजी प्रैक्टिस मिली तो कार्रवाई

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रीवा में डॉक्टरों की ड्यूटी पर होगी सख्ती, अस्पताल समय में निजी प्रैक्टिस मिली तो कार्रवाई


रीवा, 16 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के रीवा स्थित श्याम शाह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में चिकित्सकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अब सख्ती की जाएगी। संजय गांधी अस्पताल और गांधी स्मारक अस्पताल में डॉक्टरों की उपस्थिति, ओपीडी संचालन और भर्ती मरीजों के राउंड को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच संभागीय कमिश्नर शैलेंद्र सिंह ने मेडिकल कॉलेज के डीन को आवश्यक निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि सभी चिकित्सक और चिकित्सकीय स्टॉफ निर्धारित समय पर अस्पताल में ड्यूटी दें। यदि कोई चिकित्सक ड्यूटी के समय निजी प्रैक्टिस करते पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।

हाल के दिनों में गांधी स्मारक अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर विवाद की स्थिति बनी थी। इसके बाद डीन और अधीक्षक को हटाने की कार्रवाई भी हुई। इस घटनाक्रम के बाद अस्पतालों में चिकित्सकों की उपलब्धता और मरीजों की बेहतर देखभाल का मुद्दा एक बार फिर प्रमुखता से सामने आया है।

सुबह 8 बजे से शुरू होगी ओपीडी

चिकित्सा शिक्षा विभाग ने वर्ष 2020 में चिकित्सा महाविद्यालयों से संबद्ध अस्पतालों के चिकित्सकों के लिए ड्यूटी और कार्यालयीन समय निर्धारित किया था। इसके अनुसार चिकित्सा महाविद्यालय का कार्यालयीन समय सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक है। दोपहर 1 से 2 बजे तक भोजनावकाश निर्धारित किया गया है।

अस्पताल में चिकित्सकों की उपस्थिति सुबह 8 बजे से अपराह्न 3 बजे तक निर्धारित है। इसके अलावा शाम 6 से 7 बजे तक कंसल्टेंट द्वारा मरीजों का राउंड किए जाने का प्रावधान है। ओपीडी सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक संचालित की जानी है। यदि मरीजों की संख्या अधिक रहती है तो अंतिम मरीज को देखने तक ओपीडी जारी रखने का प्रावधान है। रविवार और अन्य शासकीय अवकाश के दिनों में भी ओपीडी का संचालन सुबह 9 से 11 बजे तक निर्धारित किया गया है।

केवल ओपीडी तक सीमित नहीं डॉक्टरों की जिम्मेदारी

चिकित्सकों की जिम्मेदारी सिर्फ ओपीडी में मरीजों को देखने तक सीमित नहीं है। मेडिकल कॉलेज से जुड़े डॉक्टरों को भर्ती मरीजों की देखभाल, ऑपरेशन, नियमित राउंड, पीजी विद्यार्थियों को पढ़ाने और अस्पताल की व्यवस्थाओं की निगरानी जैसी जिम्मेदारियां भी निभानी होती हैं।

भोपाल में चिकित्सकों के साथ हुई बैठक में स्वास्थ्य मंत्री की ओर से भी निर्धारित ड्यूटी समय में अस्पताल में उपलब्ध रहने और अपनी सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बाद रीवा में भी चिकित्सकों की ड्यूटी व्यवस्था को लेकर निगरानी बढ़ाने की तैयारी है।

निजी प्रैक्टिस का मुद्दा फिर चर्चा में

अस्पताल की ड्यूटी के दौरान निजी प्रैक्टिस का मुद्दा प्रदेश में नया नहीं है। वर्ष 1996-97 में तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार ने शासकीय चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने का निर्णय लिया था। उस समय प्रदेश के कई चिकित्सकों ने इस्तीफा भी दिया था। करीब तीन दशक बाद अस्पताल में चिकित्सकों की उपलब्धता और ड्यूटी समय में निजी प्रैक्टिस का मुद्दा फिर चर्चा में है।

संभागीय कमिश्नर शैलेंद्र सिंह ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि ड्यूटी के समय सभी चिकित्सकों की अस्पताल में मौजूदगी सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी देखा जाए कि निर्धारित समय में कोई डॉक्टर निजी क्लीनिक पर प्रैक्टिस तो नहीं कर रहा है।

डीन बोले- निर्देशों का पालन करना होगा

मेडिकल कॉलेज रीवा के डीन डॉ. एसडी गर्ग ने कहा कि चिकित्सकों के ओपीडी और राउंड का समय पहले से निर्धारित है। सभी चिकित्सकों को निर्धारित समय-सारिणी का पालन करना होगा। यदि कोई चिकित्सक अस्पताल के निर्धारित ड्यूटी समय में निजी क्लीनिक में प्रैक्टिस करते पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है। इस संबंध में निर्देश जारी किए जा चुके हैं।

कमिश्नर शैलेंद्र सिंह ने भी स्पष्ट किया है कि ड्यूटी के समय निजी प्रैक्टिस करने वाले मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अब अस्पताल प्रशासन के सामने चिकित्सकों की समय पर उपस्थिति, ओपीडी संचालन और भर्ती मरीजों की नियमित देखभाल सुनिश्चित करने की चुनौती है।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी

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