उज्जैनः बौद्ध महिलाओं पर केंद्रित मार्गदर्शिका पुस्तक का हुआ विमोचन

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उज्जैन , 28 जून (हि.स.)। श्रीलंका फाउंडेशन प्रोजेक्ट, विशाखा संघ दिल्ली और उज्जैन बुद्धिस्ट सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में बौद्ध महिलाओं के लिए तैयार की गई एक विशेष मार्गदर्शिका पुस्तक का रविवार को विमोचन हुआ। पस्थित धम्म अनुयायियों ने समयसुत्त का सामूहिक पाठ किया। बिलासपुर में प्रकाशित पुस्तक का विमोचन कंबोडिया के भिक्षु वथ विरक और अन्य अतिथियों ने किया।

इस मार्गदर्शिका में धम्मशास्त्र, इतिहास, पुरातत्व, मानवशास्त्र और नारीवाद में बौद्ध महिलाओं के योगदान पर प्रकाश डाला गया है। पुस्तक में भिक्षु डा.सुमेध थेरो के लेख के साथ ही बौद्ध धर्म में जेंडर इक्वेलिटी पर नागपुर के डॉ.एसएम वासनिक, मिगारमाता विशाखा पर हैदराबाद के आनंद दुर्गे, भिक्खुनी सामावती के जीवन पर रायबरेली के भिक्षु जितेंद्र वर्धन थेरो के लेख शामिल हैं। वहीं राजसी जीवन से ज्ञानोदय तक खेमा की धम्म यात्रा पर दिल्ली की ममता सवाईमुल,सुधा खनखने, मीरा धोटे, संगीता वाईकर और अर्चना मेश्राम के लेख संकलित हैं। श्रीलंका में धम्म प्रसार में महिंद के मिशन पर डॉ.प्रेमराज खनखने, प्राचीन व डिजिटल दुनिया में लालसा और भ्रांति विषय व सोशल मीडिया संस्कृति पर दिल्ली की चारुशीला खनखने, शुभांगी लोखंडे, कल्पना खैरकर और ममता डोंगरे के विचार पुस्तक का हिस्सा हैं।

ऐतिहासिक और मनोवैज्ञानिक विषयों का तुलनात्मक अध्ययनबोधगया से अनुराधापुर तक धम्म प्रसार में संघमित्रा की भूमिका पर दिल्ली की वनमाला पानतावणे, विशाखा और संघमित्रा की विरासत के ऐतिहासिक तुलनात्मक अध्ययन पर दिल्ली की शुभांगी लोखंडे व सुरेश लोखंडे, थेरवाद बौद्ध धर्म में एक आदर्श उपासिका के रूप में विशाखा पर दिल्ली की सुधा खनखने व अदिति खनखने ने लेख लिखे हैं। आध्यात्मिक बराबरी के लिए महिलाओं के प्रयासों पर लखनऊ के डॉ.वसंत कुमार, आधुनिक मनोविज्ञान व धैर्य खंती द्वारा क्रोध प्रबंधन पर दिल्ली की चारुशीला खनखने, अदिति खनखने और ज्ञानेश्वरी के लेख भी संकलित हैं।

मध्य भारत में बुद्ध, बौद्ध नारियां और उज्जैन के विशेष संदर्भ पर डॉ.हरिबाबू कटारिया, धम्म चर्चा में अग्रणी धम्मदिन्ना पर दतिया मध्यप्रदेश की मंजू बौद्ध,डॉ.सुरेंद्र बौद्ध, इशिता बौद्ध और शेखर बौद्ध के शोध शामिल हैं। इसके अलावा श्रीलंका के जयवर्धनेपुरा से डब्ल्यू देहेमी मिहारा परेरा, डॉ.वितरंदेनीये चंदासिरी थेरो के ऐतिहासिक अध्ययन, मेरठ के डॉ.आलोक कुमार वर्मा, गोकाराजू रंगाराजू का समय प्रबंधन और स्व.सत्यनारायण गोयनका की मंगलमयी गृही आचार संहिता पर भी लेख शामिल हैं। पुस्तक में अनागामीफल दिवस, विदिशा देवी और अशोक की दूसरी पत्नी कौरवकी पर भी विशेष सामग्री है।

आयोजन की अध्यक्षता डॉ.हरिबाबू कटारिया ने की। कंबोडिया और अन्य स्थानों से आए भिक्षुओं व अतिथियों में वन्नैत चाट, चुन अनोत, मोर्म सेकोन, फोन दानेथ और भंते सूर्या बौद्ध मुख्य रूप से उपस्थित थे। आयोजन में कल्पना आनंद, शुभांगी सरोदे, ललिता, ममता डोंगरे, मीरा मुकुंद धोटे, वनमाला आर पानतावणे, कल्पना खैरकर, वंदना मड़के, रामभाऊ पानतावणे, राजेंद्र मड़के, डॉ.जय आनंद दुर्गे, अल्का वि_लराव गाडगे, सुदर्शना संजय सोंडावले, अर्चना, गोकर्णा भेले, सुधा पी.खनखने, रेशमा सी.ढवने, चारुशीला पी.खनखने, चंद्रशील, अदिति खनखने, रोहिणी दिल्ली से रामभक्त बौद्ध, अनिल बौद्ध, गढ़चिरौली से सुरेश जी.बारसागड़े, जोगपाल सिंह, शिव कुमार बौद्ध, सोमपाल सिंह, वेद प्रकाश गौतम, बालेश गौतम, प्रवीण बौद्ध, जगपाल सिंह और पुष्पा रानी गौतम उपस्थित रहे। संचालन डॉ.प्रेमराज खनखने ने किया। परियोजना प्रभारी भिक्षु डॉ.सुमेध थेरो ने आभार माना।

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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्‍वेल

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