अनूपपुर: अर्नब चक्रवात से बारिश जारी: अमरकंटक में धुंध, रात से बिजली की आंख मिचौली जारी, कटी फसलों को नुकसान की आशंका
अनूपपुर, 29 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में आंध्र प्रदेश तट से अर्नब चक्रवात के टकराने के बाद बुधवार शाम से अनूपपुर में लगातार गुरुवार को भी जिला मुख्यालय अनूपपुर सहित जैतहरी, कोतमा, बिजुरी, भालूमाड़ा, राजेंद्रग्राम और अमरकंटक में बारिश जारी हैं।
अमरकंटक में रात से सुबह तक बारिश के बाद धुंध छा गई। वहां दृश्यता बहुत कम रही। तापमान गिरने से ठंड का माहौल रहा। जिले में दिन का अधिकतम तापमान 23 डिग्री और न्यूनतम 20 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बुधवार शाम के मुकाबले गुरुवार को हवाएं शांत रहीं। आसमान में काले बादल छाए हैं। अभी दो दिन बारिश जारी रहने की संभावना जताई गई। बेमौसम बारिश ने जहां आम जनजीवन को प्रभावित किया है, वहीं धान की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल और कटाई के बाद खेतों में रखी उपज को बारिश से नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। रात से बिजली की आंख मिचौली जारी हैं।
बुधवार रात बारिश के दौरान अनूपपुर मुख्यालय में रात 10 बजे से देर रात तक करीब 6 घंटे बिजली गुल रही। बिजली विभाग के अनुसार, चचाई स्थित पावर ग्रिड की 220 केवी लाइन में खराबी आई थी। इसके चलते मुख्यालय और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बिजली बंद रही। गुरूवार को भी बिजली की आंख मिचौनी जारी हैं।
30 अक्टूबर तक ऐसा ही रहेगा मौसम
अधीक्षक भू-अभिलेख विभाग के अधिकारी प्रदीप कुमार मोगरे ने बताया कि चक्रवात का असर 30 अक्टूबर तक रहने की आशंका है। इसका असर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में ज्यादा रहेगा। उन्होंने कहा कि तेज बारिश नहीं होगी और हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है।
धान की तैयार फसल पर संकट, किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें
अनूपपुर जिले में कई स्थानों पर धान की फसल पककर तैयार होने की स्थिति में है। ऐसे समय में हो रही बेमौसम बारिश किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। कृषि जानकारों के अनुसार लगातार बारिश होने से धान की पकी हुई फसल खेतों में गिर सकती है। इससे दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ उत्पादन में नुकसान की आशंका रहती है। वहीं जिन किसानों ने धान की कटाई शुरू कर दी है, उनके सामने कटी हुई फसल को सुरक्षित रखने की चुनौती खड़ी हो सकती है। खेतों में अधिक नमी होने से कटाई और मड़ाई का काम भी प्रभावित हो सकता है। बारिश लंबी खिंचने की स्थिति में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कटाई और मड़ाई के कार्य पर पड़ सकता है असर
जिले के ग्रामीण अंचलों में धान की कटाई का समय नजदीक आने के कारण किसान मौसम को लेकर चिंतित हैं। लगातार बारिश से खेतों में पानी भरने और मिट्टी गीली होने की स्थिति में कृषि मशीनों का संचालन भी मुश्किल हो सकता है।इसके अलावा कटाई के बाद खुले में रखी धान की फसल भीगने से उसकी गुणवत्ता खराब होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में किसानों के लिए फसल को सुरक्षित स्थान पर रखना जरूरी हो गया है।
बुआई के लिए फायदा
अनूपपुर के कृषि उपसंचालक अनुराग पटेल ने बताया कि बुधवार से जिले में बारिश हो रही है। चक्रवात के असर की आशंका के मुकाबले हवाएं शांत हैं और हल्की बारिश हो रही है। उन्होंने कहा कि इससे मौजूदा फसलों को नुकसान नहीं है। धान के साथ अलसी, मटर, चना और मसूर की बुआई को फायदा होगा और खेतों में नमी बनी रहेगी। पटेल के मुताबिक, जिले में फसलें पकने की कगार पर हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर कटाई शुरू नहीं हुई है।
अगले दो दिनों तक बारिश की संभावना, मौसम पर टिकी किसानों की निगाहें
जिले में अगले दो दिनों तक बारिश का दौर बने रहने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि बारिश की अवधि और तीव्रता को लेकर आधिकारिक मौसम पूर्वानुमान की पुष्टि आवश्यक है। यदि आने वाले दिनों में भी बारिश जारी रहती है तो धान उत्पादक किसानों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। विशेष रूप से पुष्पराजगढ़, जैतहरी, कोतमा और अनूपपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में खेती पर निर्भर परिवारों के सामने फसल की सुरक्षा बड़ी चुनौती बन सकती है।
बारिश से नुकसान हुआ तो सर्वे और मुआवजे की उठ सकती है मांग
बेमौसम बारिश के कारण धान की फसल प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए किसानों की निगाहें अब मौसम और प्रशासन पर टिकी हुई हैं। यदि बारिश के कारण फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचता है तो प्रभावित किसानों द्वारा कृषि एवं राजस्व विभाग से नुकसान का सर्वे कराकर राहत और मुआवजे की मांग उठाई जा सकती है।फिलहाल जिले में जारी बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले 48 घंटे धान की फसल के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। किसानों को मौसम का पूर्वानुमान देखते रहने और तेज हवा या बारिश के दौरान कटी फसल को खुले खेत में न छोड़ने की सलाह दी जाती है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

