अम्बेडकर जयंती पर सागर केंद्रीय जेल से 9 बंदी रिहा, अब साल में 5 बार मिलेगा रिहाई का अवसर

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अम्बेडकर जयंती पर सागर केंद्रीय जेल से 9 बंदी रिहा, अब साल में 5 बार मिलेगा रिहाई का अवसर


सागर, 14 अप्रैल (हि.स.)। डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर मध्यप्रदेश शासन ने सुधारवादी पहल करते हुए केंद्रीय जेल सागर से आजीवन कारावास की सजा काट रहे 9 बंदियों को रिहा किया है। इन बंदियों को उनके शेष कारावास से विशेष माफी प्रदान की गई।

जेल विभाग द्वारा 27 मई 2025 को जारी नीति के तहत पात्र बंदियों की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया। रिहा होने वालों में 8 पुरुष और 1 महिला बंदी शामिल हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बलात्कार और पॉक्सो जैसे जघन्य अपराधों में शामिल बंदियों को इस छूट का लाभ नहीं दिया गया है।

जेल प्रशासन के अनुसार रिहा किए गए बंदियों ने कारावास के दौरान अच्छा आचरण प्रदर्शित किया और निर्धारित मापदंडों को पूरा किया। साथ ही उन्हें विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षित भी किया गया, ताकि वे समाज में पुनः स्थापित होकर आत्मनिर्भर बन सकें। इनमें टेलरिंग, हथकरघा, कारपेंटरी, लौहारी, भवन निर्माण और प्रिंटिंग जैसे कार्य शामिल हैं।

जेल उप अधीक्षक मनोज मिश्रा ने रिहा हुए बंदियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे जेल में सीखे गए कौशल का उपयोग कर अपने परिवार का भरण-पोषण करें और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाएं।

इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जेल विभाग ने रिहाई नीति में अहम बदलाव किया है। अब प्रदेश में आजीवन कारावास भुगत रहे बंदियों की रिहाई वर्ष में चार के बजाय पांच विशेष अवसरों पर की जाएगी। इनमें गणतंत्र दिवस (26 जनवरी), अंबेडकर जयंती (14 अप्रैल), स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त), गांधी जयंती (2 अक्टूबर) और राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस (15 नवंबर) शामिल हैं।

रिहा किए गए बंदियों के नाम:

विमलाबाई पति शीलचंद जैन, महेश पिता खिलान पटैल, रघुनाथ पुत्र देवी प्रसाद आदिवासी, लक्ष्मण पिता चिरौजी सौर, बाबू पिता दयाराम आदिवासी, श्रीराम उर्फ मुन्ना पिता प्रहलाद सिंह राजपूत, विज्जू उर्फ विजय पिता श्यामलाल आदिवासी, विनोद पुत्र लीलाधर अहिरवार, हल्ला उर्फ शाहरूख पिता सलीम।

हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे

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