इंदौर फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश की कार्यशैली पर वकीलों का विरोध, अधिवक्ता संघों ने प्रशासनिक न्यायाधीश के सामने रखीं शिकायतें

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इंदौर फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश की कार्यशैली पर वकीलों का विरोध, अधिवक्ता संघों ने प्रशासनिक न्यायाधीश के सामने रखीं शिकायतें


इंदौर फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश की कार्यशैली पर वकीलों का विरोध, अधिवक्ता संघों ने प्रशासनिक न्यायाधीश के सामने रखीं शिकायतें


इंदौर, 12 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदाैर में कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश की कार्यशैली और व्यवहार को लेकर इंदौर में वकीलों ने विरोध जताया। सोमवार को जिला न्यायालय और हाईकोर्ट के अधिवक्ता संघों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर प्रशासनिक न्यायाधीश से मुलाकात की और अपनी शिकायतें रखीं। वकीलों ने न्यायालय में अधिवक्ताओं और पक्षकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किए जाने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि व्यवहार में सुधार नहीं हुआ तो कार्य बहिष्कार सहित आंदोलन के अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा।

जिला अभिभाषक संघ के अध्यक्ष राकेश पाल के अनुसार, नई कार्यकारिणी के चुनाव के बाद से कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के व्यवहार को लेकर वकीलों और पक्षकारों की शिकायतें मिल रही थीं। अधिवक्ताओं का आरोप है कि न्यायालय में बातचीत के तरीके और आचरण को लेकर आपत्तियां हैं। इस संबंध में पहले भी हाईकोर्ट में दो बार लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं।

प्रशासनिक न्यायाधीश के सामने रखीं आपत्तियां

जिला न्यायालय और हाईकोर्ट के अधिवक्ता संघों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक न्यायाधीश से मुलाकात कर अपनी शिकायतों से अवगत कराया। वकीलों का कहना है कि न्याय व्यवस्था में बार और बेंच की अहम भूमिका है। इसलिए अधिवक्ताओं के साथ-साथ न्यायालय में आने वाले पक्षकारों के प्रति भी सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बना रहे।

जिला अभिभाषक संघ के अध्यक्ष राकेश पाल और सचिव धर्मेंद्र गुर्जर ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश को व्यवहार में सुधार का अवसर दिया गया है। यदि शिकायतों के बावजूद स्थिति में बदलाव नहीं आया तो पहले कार्य बहिष्कार किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल या न्यायिक कार्य से विरत रहने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा।

आश्वासन के बाद आगे की रणनीति तय होगी

वकीलों के मुताबिक, प्रधान न्यायाधीश ने भविष्य में अपने व्यवहार पर ध्यान देने का आश्वासन दिया है। इसके बाद फिलहाल आंदोलन को लेकर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। जिला न्यायालय और हाईकोर्ट के दोनों अधिवक्ता संघों के सदस्यों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

संस्था ‘पौरुष’ ने भी किया प्रदर्शन

वकीलों के विरोध के बीच संस्था ‘पौरुष’ इंदौर ने भी उनका समर्थन किया। संस्था के अध्यक्ष अशोक दशोरा के नेतृत्व में सदस्यों ने कुटुंब न्यायालय के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन कर नारेबाजी की। दशोरा ने कहा कि अधिवक्ताओं के साथ कथित अभद्र व्यवहार और अपमान की शिकायतों के विरोध में संस्था उनके साथ खड़ी है।

उन्होंने कहा कि संस्था के सामने पहले भी पुरुष पक्षकारों के साथ न्यायालय में कथित दुर्व्यवहार और अपमान की शिकायतें आती रही हैं। अब वकीलों के साथ भी इस तरह के व्यवहार के आरोप सामने आए हैं। संस्था का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया में सभी पक्षों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान सदस्यों ने ‘न्याय करो, अन्याय नहीं’, ‘अधिवक्ताओं का सम्मान करो’ और ‘विक्टिम्स का सम्मान करो’ जैसे नारे लिखे पोस्टर प्रदर्शित किए। संस्था की ओर से ‘नो मी लॉर्ड, नो योर लॉर्डशिप, ओनली श्रीमान, ओनली महोदय’ का नारा भी दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि न्यायालय में आने वाले अधिवक्ताओं और पक्षकारों के सम्मान का ध्यान रखा जाना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

Livevns.news Desk
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