'प्रणाम उदन्त मार्त्तण्ड' : सबके साझा प्रयासों से होगा भारत का निर्माण : उपसभापति हरिवंश

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'प्रणाम उदन्त मार्त्तण्ड' : सबके साझा प्रयासों से होगा भारत का निर्माण : उपसभापति हरिवंश


भोपाल, 09 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के राजधानी भोपाल के भारत भवन में चल रहे राष्ट्रीय संविमर्श 'प्रणाम उदन्त मार्त्तण्ड' में शनिवार को राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि हमने 2014 के बाद यह सपना तय किया है कि 2047 में हम कहाँ पहुंचेंगे? जबकि हमारे पड़ोसी देशों ने इस तरह के लक्ष्य और योजनाएं पहले ही बनाई हुई हैं। अपने देश के विकास का रोडमैप बनाने में हम 66 साल पिछड़ गए। हम सब लोगों के साझा प्रयासों से नए भारत का निर्माण होगा, इसमें मीडिया भी शामिल है।

बदलते दौर में, नई तकनीक के साथ हम सबको अपने आपको प्रासंगिक बनाना होगा। इस समय भारत में बहुत अच्छा काम हो रहा है। पिछले 10-12 वर्षों में भारत में तेजी से आधारभूत संरचनाएं विकसित हुई हैं। उल्लेखनीय है कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय और वीर भारत न्यास की संयुक्त पहल पर भारत भवन, भोपाल में आयोजित 'प्रणाम उदन्त मार्त्तण्ड' में बतौर मुख्य वक्ता शामिल हुए। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार उदय सिन्हा, विकास मिश्र, प्रत्यूष रंजन और सईद अंसारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार गिरीश उपाध्याय ने किया।

'नए भारत का निर्माण और हम भारत के लोग' विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए हरिवंश ने कहा कि देश बनाना कठिन होता है, यह कार्य रातों-रात नहीं होता है। एक समय ऐसा था जब देश का सोना गिरवी रख दिया गया था। आज भारत के पास स्वर्ण भंडार है। एक समय में भारत का धन बाहर जाता रहा लेकिन किसी ने इस पर कोई हस्तक्षेप नहीं किया। अब यह दृश्य बदल गया है, लाखों शेल कंपनियां बंद कर दी गई हैं। देश के निर्माण में मजबूत अर्थव्यवस्था की भूमिका को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि चाणक्य के अनुसार, अर्थ व्यवस्था सुदृढ़ नहीं है तो आपको कोई नहीं पूछेगा। इसी प्रकार स्वामी विवेकानंद ने भी कहा कि भारत को युवा संन्यासियों से अधिक युवा उद्यमियों की आवश्यकता है। महात्मा गांधी भी भारत को आत्मनिर्भर बनाने की बात करते थे।

उन्होंने कहा कि 2014 से पहले भारत में स्टार्टअप की बात नहीं होती थी लेकिन आज स्टार्टअप की एक संस्कृति विकसित हो गई है। उन्होंने बताया कि जब प्रधानमंत्री ने डिजिटल इंडिया की बात की तो कुछ बड़े नेताओं ने उपहास उड़ाया कि गांव में यह कैसे साकार होगा। आज देश के कोने-कोने में यूपीआई से भुगतान किया जा रहा है। 57 करोड़ से अधिक सक्रिय बैंक खाते हैं। 10 में से 6 इंटरनेट उपयोगकर्ता ग्रामवासी हैं। उन्होंने कहा कि जो देश तकनीक में पिछड़ जाता है, उसके सामने गुलाम होने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाता। हमें नई तकनीक को सीखना होगा और उसका विकास भी करना होगा। उन्होंने हाल के वर्षों में 5जी से लेकर रेल निर्माण तक में हो रहे अच्छे कार्यों का तथ्यात्मक विवरण प्रस्तुत किया।

वर्षों पहले पहचान ली गई थी सूचना की ताकत :

उपसभापति हरिवंश ने कहा कि उदन्त मार्त्तण्ड के शीर्षक के नीचे एक श्लोक प्रकाशित होता था, उसका आशय था- सूर्य के प्रकाश के बिना जैसे अंधकार नहीं मिटता, उसी प्रकार जो लोग नहीं जानते, उनको समाचारपत्र के बिना जानकारी नहीं मिल सकती। यह श्लोक समाचार पत्र की भूमिका को स्पष्ट करता है। हम कह सकते हैं कि सूचना की ताकत को वर्षों पहले पहचान लिया गया था। उन्होंने कवि वचन सुधा, प्रताप और आज जैसे समाचार पत्रों की पत्रकारिता का उल्लेख कर पत्रकारिता के उद्देश्य एवं समाज में उसकी भूमिका को स्पष्ट किया।

पश्चिम बंगाल से आईं साहित्यकार प्रो. सोमा बंद्योपाध्याय ने कहा कि बंगाली होने के बाद भी मैंने भारत को भारत के रूप में जाना है। बंगाली अस्मिता या अन्य भाषायी अस्मिता की बात जो उठाते हैं, उससे झूठी बात कुछ नहीं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने योजनापूर्वक हमारे बच्चों को अपने मूल से काटने के प्रयास किए।

आज होगा संगोष्ठी का समापन :

संगोष्ठी के तीसरे दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में सायं 6 बजे समापन कार्यक्रम होगा!

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

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