अनूपपुर: श्रमवीर पिता के बेटे प्रकाश ने मेहनत से रचा मुकाम पढ़ाई में लगन और शिक्षक बनने का जुनून

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अनूपपुर: श्रमवीर पिता के बेटे प्रकाश ने मेहनत से रचा मुकाम पढ़ाई में लगन और शिक्षक बनने का जुनून


अनूपपुर, 19 सितंबर (हि.स.)। मेहनत और लगन के साथ आगे बढ़ने का जज्बा हो तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के ग्राम डोंगराटोला निवासी छात्र प्रकाश सिंह ने भी अपनी पढ़ाई के प्रति निरंतर लगन और मेहनत से यह साबित किया है। दैनिक मजदूरी करने वाले पिता के बेटे प्रकाश ने 12वीं कक्षा में 85.4 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उनके उत्कृष्ट परिणाम के आधार पर मुख्यमंत्री स्कूटी योजना के तहत स्कूटी मिलने से उसकी उच्च शिक्षा की राह और आसान हुई है।

छात्र प्रकाश सिंह के पिता उमेंद्र सिंह दैनिक मजदूरी करते हैं, जबकि माता उमा देवी गृहणी हैं। परिवार की सीमित आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद माता-पिता ने छात्र प्रकाश की पढ़ाई जारी रखने में पूरा सहयोग दिया। प्रकाश ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सकरा से कक्षा 12वीं की पढ़ाई पूरी की और 85.4 प्रतिशत अंक हासिल किए। वर्तमान में वह तुलसी महाविद्यालय, अनूपपुर में बी.ए. प्रथम वर्ष के विद्यार्थी है।

छात्र प्रकाश बताते हैं कि गांव से महाविद्यालय आने-जाने में काफी समय लगता था। नियमित रूप से कॉलेज पहुंचने और पढ़ाई के लिए समय निकालने में भी परेशानी होती थी। अब मुख्यमंत्री स्कूटी योजना के माध्यम से स्कूटी मिलने से उसका आवागमन पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हो गया है।

प्रकाश कहते हैं, “स्कूटी मिलने से अब कॉलेज आने-जाने में काफी सुविधा होगी। पहले आने-जाने में ज्यादा समय लगता था, अब उस समय का उपयोग पढ़ाई में कर सकूंगा। मेरे माता-पिता ने मेहनत करके मुझे पढ़ाया है। स्कूटी मिलने से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है और आगे पढ़ने के लिए और प्रेरणा मिली है। मैं मध्यप्रदेश शासन का आभारी हूं।”

प्रकाश का सपना आगे चलकर शिक्षक बनने का है। वह बी.ए. की पढ़ाई पूरी करने के बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा की तैयारी करना चाहता है। उसका कहना है कि वह स्वयं ग्रामीण क्षेत्र से है और गांव के बच्चों की शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों को समझता है। शिक्षक बनकर वह ग्रामीण अंचल के बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए प्रेरित करना चाहता है।

मुख्यमंत्री स्कूटी योजना के माध्यम से मिली यह सुविधा प्रकाश के लिए केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि उसकी पढ़ाई को आगे बढ़ाने और अपने शिक्षक बनने के सपने की ओर बढ़ने का एक महत्वपूर्ण संबल बनी है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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