राजगढ़ः मनरेगा योजना में संशोधन से ग्रामीण मजदूरों के रोजगार अधिकार खतरे में :प्रियव्रत सिंह
राजगढ़, 6 जनवरी (हि.स.)। मनरेगा योजना में हाल ही में किए संसोधन ग्रामीण मजदूरों के रोजगार अधिकार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रहे है, यह बदलाव ग्रामीण मजदूरों के अधिकार छीनने का काम कर रहे है। यह बात कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रियव्रत सिंह खींची ने मंगलवार को कांग्रेस कार्यालय राजगढ़ में आयोजित प्रेसवार्ता में कही।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष खींची ने कहा कि महात्मा गांधी मनरेगा योजना के नाम और व्यवस्था में जो बदलाव किए गए है, वह ग्रामीण मजदूरों के अधिकार छीनने का काम है। कांग्रेस द्वारा दी गई मजदूरी गारंटी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव डाला था, इससे ग्रामीण संरचना और आधारभूत अधोसंरचना का निर्माण हुआ है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का यह संसोधन मनरेगा की मूल भावना को समाप्त करता है, इससे मजदूरी गारंटी कमजोर हुई है, पंचायतों की भूमिका घट गई है और केंद्र का अंशदान 90 प्रतिशत से घटकर 60 प्रतिशत तक कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि बजट सीमित, मौसम आधारित कार्य प्रतिबंध और मजदूरी सुरक्षा कमजोर होने से ग्रामीण बेरोजगारी पर संकट बढ़ने की संभावना है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने बताया कि कांग्रेस ने संसोधन के विरोध में 11 जनवरी से 25 फरवरी तक क्रमबद्व आंदोलन की रुपरेखा तैयार की है, जिसमें 11 जनवरी से 29 जनवरी तक ग्राम पंचायत स्तर पर विरोध कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियान करेंगे इसके बाद ब्लाॅक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित होंगे। 1 से 6 फरवरी तक जिला स्तर पर कलेक्टर कार्यालयों पर धरना और घेराव करेंगे। इसके बाद प्रत्येक राज्य की विधानसभा का घेराव किया जाएगा और अंत में देश के चार प्रमुख झोन में बड़ी रैलियां आयोजित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने देश के निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाई है, मजदूरों को हक दिलाने में योगदान दिया और छूआछूत जैसे सामाजिक कुरुतियों को मिटाने में अहम भूमिका निभाई है। हम उनके आदर्शों और ग्रामीण मजदूरों के अधिकार की रक्षा के लिए हर स्तर पर आंदोलन करेंगे। कांग्रेस मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत ग्रामपंचायत, ब्लाॅक, जिला और विधानसभा स्तर पर धरना, उपवास, जनसंपर्क व रैलियों के माध्यम से देश में भाजपा सरकार के इस संसोधन का विरोध करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / मनोज पाठक

