झाबुआ में आठ वर्षीय नाबालिग से अश्लील हरकत, पुलिस आरक्षक जेल भेजा गया
झाबुआ, 12 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के जनजातीय बाहुल्य झाबुआ जिले से एक बेहद निंदनीय और समाज को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां कानून और सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले एक पुलिस आरक्षक पर आठ वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ अश्लील हरकत करने का गंभीर आरोप लगा है।
मामले के सामने आते ही झाबुआ कोतवाली पुलिस ने त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए आरोपी पुलिस आरक्षक के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट और छेड़खानी की गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया। रविवार को आरोपी को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। जिला पुलिस द्वारा सोमवार को दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार आरोपी का नाम मंगलेश पाटीदार (30 वर्ष) है, जो झाबुआ की डीआरपी लाइन स्थित सरकारी क्वार्टर में निवासरत है।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह घिनौनी घटना उस समय हुई, जब आरोपी आरक्षक ने अपने ही विभाग में कार्यरत एक सहकर्मी की आठ वर्षीय मासूम बेटी को चॉकलेट देने के बहाने अपने सरकारी क्वार्टर में बुलाया। आरोप है कि बच्ची के कमरे में पहुंचते ही आरोपी ने अपने कपड़े उतार दिए और उसके साथ गलत हरकत करने लगा। बच्ची भयभीत हो गई और किसी तरह स्वयं को बचाने का प्रयास करती रही। इधर, बच्ची के काफी देर तक दिखाई नहीं देने पर परिजन चिंतित हो गए और उसकी तलाश शुरू की। खोजबीन करते हुए जब वे आरोपी आरक्षक के क्वार्टर तक पहुंचे, तभी बच्ची मौके का फायदा उठाकर वहां से बाहर की ओर भागी और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। मासूम बच्ची की आपबीती सुनकर परिजन और आसपास के लोग आक्रोशित हो उठे।
घटना के तुरंत बाद पीड़ित परिवार अन्य लोगों के साथ झाबुआ कोतवाली थाने पहुंचा और आरोपी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली पुलिस ने बिना किसी देरी के एफआईआर दर्ज की और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया। प्रारंभिक जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर आरोपी आरक्षक को तत्काल निलंबित कर दिया गया। रविवार को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेजने के आदेश दिए गए।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ की जा रही है, ताकि पीड़िता को शीघ्र न्याय मिल सके और दोषी को कानून के अनुसार कड़ी सजा दिलाई जा सके। साथ ही पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि झाबुआ पुलिस की छवि अब तक अनुशासन, तत्परता और जनसेवा के लिए जानी जाती रही है। इस मामले में भी पुलिस द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई ने यह स्पष्ट किया कि विभाग कानून के सामने किसी को भी बख्शने के पक्ष में नहीं है। इसके बावजूद यह घटना पुलिस विभाग के लिए गहरी चिंता और आत्ममंथन का विषय बन गई है। घटना के बाद जिले में रोष का माहौल है। स
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. उमेश चंद्र शर्मा

