उज्जैनः माकड़ोन के गांवों में बाघ या तेंदुआ देने जाने की खबर अफवाह
उज्जैन, 12 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन ज़िले के माकड़ोन के जंगलों में बाघ/तेंदुआ देखने की खबर वन विभाग के उज्जैन क्षेत्र के रेस्क्यू प्रभारी मदनसिंह सूर्यवंशी के अनुसार पूरी तरह से बकवास और अफवाह है। उन्होंने दावा किया कि न तो बाघ/तेंदुआ का पग मार्ग मिला, न ही उसकी कोई ऐसी गतिविधि रेस्क्यू टीम को मिली,जिससे यह स्पष्ट हो कि संबंधित जानवर का मूवमेंट हो रहा है। फिर जो वीडियो चला रहा है,वह भी संबंधित जगह बताने और वहां ले जाने को तैयार नहीं है। यह सिर्फ अफवाह है और गांववासी इस पर ध्यान न दें। इसके लिए मुनादी भी करवा दी है।
सोमवार को उज्जैन क्षेत्र के रीजनल रेस्क्यू प्रभारी सह वन परिक्षेत्र अधिकारी मदनसिंह सूर्यवंशी ने बताया कि गत एक सप्ताह से अधिक समय से माकड़ोन के दो गांवों झुमकी ओर रावणखेड़ी के जंगलों में ग्रामीणों द्वारा बाघ देखने की बात कही गई। कुछ ग्रामीणों का कहना रहा कि उन्होने तेंदुआ देखा। एक ग्रामीण ने वीडियो भी जारी किया और दावा किया कि वह रात्रि के समय जब जा रहा था,तब वीडियो बनाया। इसके चलते दोनों गांव के ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है। शाम ढलते ही लोग अपने घरों में दुबक जाते हैं। माकड़ोन थाने से भी सूचना मिली कि गांववालों में भय का वातारण है। ऐसे में रेस्क्यू किया जाए।
जिसने देखने का दावा किया, वह जाने को तैयार नहींसूर्यवंशी के अनुसार उन्होंने पूर्व में भी थाने से मिली सूचना के आधार पर संबंधित क्षेत्रों में पुलिस टीम के साथ जाकर मौका मुआयना किया। सबसे बड़ी बात यह है कि जिस ग्रामीण द्वारा बाघ/तेंदुआ देखने का दावा किया गया है,वह उस जगह ले जाने को तैयार नहीं है,जहां उसने बाघ देखने की बात कही। हमारे साथ भी जाने को तैयार नहीं। वीडियो देखने पर रात्रि का होने से स्थान का अंदाज लगाना मुश्किल है। ऐसे में हमने लगातार सर्च की।
पग मार्ग नहीं मिले,न ही अन्य कोई स्त्रोतउन्होंने बताया कि रविवार रात को एक बार फिर बाघ दिखने का दावा ग्रामीणों ने किया तो थाने से सूचना आई। वरिष्ठ अधिकारियों को बताने के बाद वन विभाग की रीजनल रेस्क्यू टीम लेकर वे सोमवार को माकड़ोन थाना पहुंचे। यहां से डायल 100 के अलावा पुलिस दल साथ में लिया ओर पूरे क्षेत्र में सर्चिंग चलाई। तराना वन विभाग का स्टॉफ भी था। सभी अनुभवियों का कहना था कि पूरे क्षेत्र में एक भी पग मार्ग नहीं मिला,ऐसा कैसे हो सकता है? बावजूद इसके सर्चिंग में अन्य जांचें की गई,जो साधारणतया बाघ/तेंदुआ/सिंह के मूवमेंट को देखने के लिए वन विभाग करता है। तब भी कुछ ऐसा पता नहीं लगा। अत: हमारे विभाग की जांच से स्पष्ट है कि उक्त क्षेत्र में न तो बाघ/तेंदुए का मूवमेंट हुआ और न ही वीडियो में इस क्षेत्र को लेकर सच्चाई है। हमने वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी सूचित कर दिया है। पुलिस बल भी इस बात से संतुष्ट है।
मुनादी करवाई गांवों मेंसूर्यवंशी के अनुसार उन्होने पुलिस थाने के सहयोग से संबंधित क्षेत्र के सभी गांवों में मुनादी करवाई है कि गांववासी भयभीत न हों। बाघ/तेंदुआ जैसा कुछ नहीं है। अपना रूटिन का काम करें,आवाजाही करें। वन विभाग की टीम पूरी तरह से सर्च कर चुकी है।
इनका कहना हैइस संबंध में माकड़ोन थाना प्रभारी प्रदीपसिंह राजपूत ने कहा कि रविवार को फिर तेंदुआ दिखने की बात ग्रामीणों के बीच से आई। उन्होने वन विभाग के मदनसिंह सूर्यवंशी को सूचित किया। वे सोमवार सुबह ही अपनी पूरी रेस्क्यू टीम के साथ पूरी तैयारी से आए। हमारी टीम भी उनके साथ जंगल गई। दिनभर तलाशी के बाद कोई बात सामने नहीं आई। अब उस युवक से चर्चा कर रहे हैं,जिसने वीडियो बनाने का दावा किया है। जंगल में वन विभाग ने सायरन भी बजाया, न तो कोई दहाड़ सुनाई दी और न ही पक्षियों/अन्य जानवरों की कोई हलचल देखने को मिली,जो तब होती है जब ऐसे जानवरों का मूवमेंट संबंधित क्षेत्र से होता है। ग्रामीणों को समझाईश दे रहे हैं। सतर्कता के लिए रात्रि गश्त बढ़ा दी है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल

