मूंग-उड़द उपार्जन में करोड़ों का भुगतान अटका, किसानों को फर्जी बताने का आरोप; पत्रकारवार्ता में प्रशासन पर गंभीर सवाल

WhatsApp Channel Join Now
मूंग-उड़द उपार्जन में करोड़ों का भुगतान अटका, किसानों को फर्जी बताने का आरोप; पत्रकारवार्ता में प्रशासन पर गंभीर सवाल


जबलपुर, 12 जनवरी (हि.स.)। मध्‍य प्रदेश के कजबलपुर/बसेड़ी में सोमवार को किसानों के एक प्रतिनिधि मंडल ने पत्रकारवार्ता के माध्यम से मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कराए गए ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द उपार्जन में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया। किसानों ने बताया कि सहकारी समिति बसेड़ी के माध्यम से एमएलटी वेयरहाउस मजीठा में की गई खरीदी के बाद करोड़ों रुपये का भुगतान प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा रोक दिया गया है। किसानों का आरोप है कि भुगतान रोकने के लिए उन्हें संदिग्ध और फर्जी किसान बताने की साजिश रची गई।

किसान प्रतिनिधियों ने बताया कि मूंग-उड़द की खरीदी बंद होने के बाद जब वेयरहाउस की जांच की गई, तो वहां कथित रूप से अनियमितता और कम माल पाए जाने की बात सामने आई। इसके बाद सैकड़ों किसानों का भुगतान रोक दिया गया। हालांकि जांच के उपरांत कुछ किसानों को भुगतान कर दिया गया, लेकिन बड़ी संख्या में किसानों का पैसा अब भी अटका हुआ है। किसानों के अनुसार तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना ने समिति प्रभारी, वेयरहाउस संचालक और उपार्जन में शामिल अन्य कर्मचारियों पर किसानों के साथ धोखाधड़ी और खरीदी में घोटाले के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद जिन अधिकारियों को जांच सौंपी गई, उन्हीं पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। किसानों का कहना है कि जांच अधिकारियों ने उन्हीं लोगों से सांठगांठ कर ली, जिन पर एफआईआर दर्ज थी, और मिलकर तथाकथित “संदिग्ध किसानों” की सूची तैयार कर दी।

किसानों ने सवाल उठाया कि वे संदिग्ध कैसे हो सकते हैं, जबकि उनके पास भुगतान पत्रक की ऑनलाइन फीडिंग की पावती मौजूद है। प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि संदिग्ध सूची में शामिल किसानों को कलेक्टर कार्यालय में बुलाया गया, जहां उन्होंने स्वयं उपस्थित होकर अपने बयान दर्ज कराए और मांगे गए सभी दस्तावेज प्रस्तुत किए। इनमें रजिस्ट्रेशन, भूमि का ब्यौरा, फसल लाने की तारीख, वाहन का विवरण और भुगतान पर्ची शामिल थी। किसानों का कहना है कि दस्तावेज जमा किए हुए चार महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया। किसान लगातार कलेक्टर कार्यालय और तहसील के चक्कर काटने को मजबूर हैं। वहीं अधिकारियों द्वारा यह कहकर भुगतान रोका जा रहा है कि पहले घोटाले में शामिल लोगों से वसूली होगी, उसके बाद ही किसानों को भुगतान किया जाएगा।

किसान संगठनों ने इस तर्क पर कड़ा विरोध जताते हुए सवाल उठाया कि शासन के कर्मचारियों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार का खामियाजा किसान क्यों भुगतें। किसानों ने कहा कि उन्होंने अपनी उपज नियमानुसार उपार्जन केंद्र पर दी, ऐसे में भुगतान उनका अधिकार है, न कि कृपा। पत्रकारवार्ता में बताया गया कि लंबित भुगतान को लेकर किसान संघ, भारत कृषक समाज सहित विभिन्न किसान संगठनों और राजनीतिक दलों ने ज्ञापन, धरना और प्रदर्शन कर लगातार आवाज उठाई है। क्षेत्रीय विधायक बरगी नीरज सिंह ने भी कलेक्टर और अधिकारियों से कई बार किसानों के पक्ष में प्रयास किए। वहीं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कृषि उत्पादन आयुक्त, मध्य प्रदेश शासन को पत्र लिखकर लंबित भुगतान तत्काल कराने की मांग की है।

किसानों ने आरोप लगाया कि भुगतान रोकने वाली जांच प्रक्रिया में शामिल अधिकारी एस.के. निगम (डीडीए), रवि आम्रवंशी (एडीए), हितेन्द्र रघुवंशी (बीएमओ), मदन रघुवंशी (एसडीएम शहपुरा), इंदिरा त्रिपाठी (एसडीओ पाटन) द्वारा भी अनियमितता की गई। किसानों का आरोप है कि एक ही संदिग्ध सूची का हवाला देकर कुछ किसानों का भुगतान रोक दिया गया, जबकि उसी सूची में शामिल कुछ अन्य किसानों को लेन-देन कर भुगतान कर दिया गया।

सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया कि जिन समिति प्रभारियों, वेयरहाउस संचालकों और कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज है, उनके और उनके परिजनों का भुगतान कैसे और क्यों किया गया। किसान संगठनों ने इसे सीधे-सीधे भ्रष्टाचार और पक्षपात का मामला बताया। किसानों की स्पष्ट मांग है कि लंबित भुगतान सात दिनों के भीतर किया जाए। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ, तो वे उसी प्रकार अपनी उपज वापस उठाने आएंगे, जैसे उपार्जन केंद्र तक फसल लेकर पहुंचे थे। ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली अव्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

उल्‍लेखनीय है कि उक्‍त पत्रकारवार्ता में किसानों की ओर से अभय प्रताप सिंह, चंदन पटैल, मोनू सिंह, देवेंद्र ठाकुर, राम सिंह, बबलू ठाकुर, भगवान सिंह सहित अन्य किसान प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

Share this story