अनूपपुर: दंडात्मक कार्रवाई के विरोध में पटवारियों का ऑनलाइन राजस्व कार्यों से विरत रहने का निर्णय

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अनूपपुर: दंडात्मक कार्रवाई के विरोध में पटवारियों का ऑनलाइन राजस्व कार्यों से विरत रहने का निर्णय


अनूपपुर, 08 अक्टूबर (हि.स.)। प्रदेश के पटवारियों के विरुद्ध सेवा समाप्ति, निलंबन एवं अन्य दंडात्मक कार्रवाई के विरोध में मध्य प्रदेश पटवारी संघ की जिला इकाई अनूपपुर ने ऑनलाइन राजस्व कार्यों से विरत रहने का निर्णय लिया है। संघ ने इस संबंध में गुरूवार को राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव और कलेक्टर अनूपपुर को पत्र सौंपा दिया है।

बताया गया कि प्रदेश के कई जिलों में ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026’ सहित अन्य कार्यों के आधार पर पटवारियों के विरुद्ध सेवा समाप्ति तथा प्रदेश के विभिन्न जिलों में निलंबन व अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है। संघ का कहना है कि योजना से संबंधित विधिक एवं व्यवहारिक समस्याओं से शासन को पूर्व में अवगत कराया जा चुका है।

संघ के निर्णय के अनुसार 7 अक्टूबर 2026 से प्रदेश के पटवारी सभी ऑनलाइन राजस्व कार्यों से विरत हैं तथा सभी शासकीय व्हाट्सऐप समूहों से भी बाहर रहेंगे। यह निर्णय तब तक जारी रहेगा, जब तक दंडात्मक कार्रवाई वापस नहीं ली जाती।

संघ ने चेतावनी दी है कि भविष्य में प्रदेश के किसी भी जिले में पटवारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई होने पर बिना पूर्व सूचना के सभी पटवारी राजस्व कार्यों से विरत रहेंगे। ज्ञापन में देवास में की गई सेवा समाप्ति और अन्य जिलों में निलंबन व दंडात्मक कार्रवाई को तत्काल वापस लेने की मांग की गई है।

असली विवाद क्या है?

पटवारियों का सवाल- अधिकार नहीं तो हस्ताक्षर की जवाबदेही क्यों?

स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी भूमि पर बने मकान-प्लॉट के लोगों को मालिकाना हक देने के लिए डॉक्यूमेंट तैयार कर उनकी रजिस्ट्री की जा रही है। विवाद इस बात पर है कि इस दस्तावेज में पटवारी को निष्पादक की भूमिका दी गई है। पटवारी संघ का तर्क है कि वह जमीन का मालिक या पंजीयन अधिकारी नहीं है, फिर भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के बाद भविष्य में स्वामित्व विवाद होने पर उसे भी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। संघ इसी भूमिका को स्पष्ट करने और कानूनी सुरक्षा की मांग कर रहा है।

टकराव का असर कितना बड़ा? 50 लाख रजिस्ट्रियां अटकीं, 20 दिन में एक भी नहीं

सरकार ने स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश में 50 लाख से ज्यादा ग्रामीण संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री का अभियान शुरू किया है। पटवारियों के निष्पादक की भूमिका से मना करने के कारण इस प्रक्रिया पर असर पड़ा है।

जानकारी मुताबिक करीब 20 दिन से योजना की रजिस्ट्रियां अटकी हैं और इस दौरान एक भी रजिस्ट्री नहीं हो सकी। पटवारी संघ का कहना है कि वह सर्वे, स्थल सत्यापन, सीमांकन और रिकॉर्ड जांच जैसे कामों से पीछे नहीं हट रहा, आपत्ति सिर्फ दस्तावेज निष्पादन की जिम्मेदारी को लेकर है।

कलेक्टर रत्नाकर झा ने कहा कि शासन का काम है सभी को करना होगा अगर कोई कार्य नहीं करेगा उसकी सेवा से समाप्त कर दी जाएगी। उन्होंने जिले के सभी एसडीएम को निर्देशित किया है कि पटवारी अगर काम नहीं करते हैं तो उनकी सेवा समाप्त कर दी जाए।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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