अनूपपुर: कार्तिक मास की प्रतिपदा पर श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में लगाई आस्था की डुबकी

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अनूपपुर: कार्तिक मास की प्रतिपदा पर श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में लगाई आस्था की डुबकी


अनूपपुर, 26 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले की प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक नगरी अमरकंटक में सोमवार को कार्तिक मास की प्रतिपदा के पावन अवसर पर भक्त श्रद्धालुओं ने पतित पावनी पुण्यसलिला मां नर्मदा के पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगाई। प्रातःकाल से ही नर्मदा नदी के विभिन्न स्नान घाटों पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ पवित्र स्नान कर मां नर्मदा का स्मरण किया तथा नर्मदा उद्गम स्थल मंदिर पहुंचकर दर्शन, पूजन एवं अर्चन किया।

कार्तिक मास के आरंभ के साथ ही पवित्र नगरी में धार्मिक आस्था और भक्ति का वातावरण दिखाई दिया। सुबह से दोपहर तक श्रद्धालु नर्मदा नदी में स्नान करते रहे। स्नान के पश्चात श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा को प्रणाम कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की। अनेक भक्तों ने अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार गरीबों, असहायों एवं जरूरतमंदों को दान देकर पुण्य अर्जित किया।

सनातन परंपरा में कार्तिक स्नान का विशेष महत्व

सनातन धर्म में कार्तिक मास को अत्यंत पवित्र एवं पुण्यदायी मास माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में प्रातःकाल स्नान, भगवान विष्णु एवं भगवान शिव की आराधना, दीपदान, जप-तप, व्रत और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। कार्तिक मास में श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई धार्मिक साधना को आत्मशुद्धि, संयम तथा आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम माना जाता है।

कार्तिक स्नान की परंपरा केवल शरीर की शुद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन की पवित्रता, विचारों की निर्मलता और जीवन में सदाचार अपनाने का भी संदेश देती है। इस अवधि में श्रद्धालु सूर्योदय से पूर्व स्नान कर ईश्वर का स्मरण करते हैं तथा पूजा-पाठ और दान-पुण्य के माध्यम से अपनी धार्मिक आस्था प्रकट करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में जरूरतमंदों की सहायता, अन्नदान और सामर्थ्य के अनुसार सेवा को भी विशेष पुण्यकारी माना गया है।

मां नर्मदा के तट पर आस्था और आध्यात्मिक साधना

मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक का सनातन धर्म में विशिष्ट स्थान है। यहां नर्मदा नदी को जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी मानकर श्रद्धालु श्रद्धा भाव से उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। कार्तिक मास में नर्मदा स्नान का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दौरान श्रद्धालु मां नर्मदा के पवित्र जल में स्नान कर आध्यात्मिक शांति की अनुभूति करते हैं तथा मंदिरों में दर्शन-पूजन कर धर्म एवं भक्ति के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।

कार्तिक मास का यह पावन अवसर मनुष्य को धर्म, सेवा, परोपकार और आत्मसंयम की प्रेरणा देता है। मां नर्मदा के तट पर स्नान, पूजन और दान-पुण्य के साथ श्रद्धालुओं ने कार्तिक मास का शुभारंभ किया। आस्था और विश्वास से परिपूर्ण इस धार्मिक परंपरा के माध्यम से श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा के प्रति अपनी श्रद्धा निवेदित की।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

Livevns.news Desk
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