चंदेरी में धरातल पर स्कूल नहीं, फिर भी पोर्टल पर संचालन का दावा, आरटीई व्यवस्था पर उठे सवाल

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चंदेरी में धरातल पर स्कूल नहीं, फिर भी पोर्टल पर संचालन का दावा, आरटीई व्यवस्था पर उठे सवाल


चंदेरी में धरातल पर स्कूल नहीं, फिर भी पोर्टल पर संचालन का दावा, आरटीई व्यवस्था पर उठे सवाल


चंदेरी में धरातल पर स्कूल नहीं, फिर भी पोर्टल पर संचालन का दावा, आरटीई व्यवस्था पर उठे सवाल


चंदेरी, 25 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के चंदेरी में शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में बच्चों के प्रवेश की व्यवस्था को लेकर एक शिकायत ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनसुनवाई में आवेदक राघवेंद्र चौबे ने शिकायत दर्ज कराई कि क्षेत्र में ऐसे विद्यालय भी शिक्षा विभाग के पोर्टल पर संचालित बताए जा रहे हैं, जो वास्तविक रूप से मौके पर मौजूद नहीं हैं। आवेदक ने अपनी बच्ची के आरटीई के तहत प्रवेश के लिए आवेदन किया था, लेकिन प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए चंदेरी एसडीएम मनीष धनगर ने संबंधित विद्यालय संचालक को जनसुनवाई में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया। हालांकि, नोटिस के बावजूद संबंधित संचालक जनसुनवाई में उपस्थित नहीं हुए। इस पर एसडीएम ने मौके पर मौजूद बीआरसी प्रतिनिधि को फटकार लगाते हुए विद्यालय के वास्तविक संचालन और पोर्टल पर दर्ज जानकारी की जांच कर जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।

एसडीएम ने मामले में संबंधित विद्यालय संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई किए जाने की बात भी कही है। इसके बाद मामला केवल एक बच्ची के आरटीई प्रवेश तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि विद्यालयों के पंजीयन, भौतिक सत्यापन, विभागीय रिकॉर्ड और पोर्टल पर दर्ज सूचनाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

पोर्टल पर विद्यालय दर्ज करने से पहले सत्यापन किसने किया?

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि कोई विद्यालय वास्तव में संचालित नहीं है तो वह शिक्षा विभाग के पोर्टल पर विद्यालय के रूप में दर्ज कैसे हुआ। विद्यालय को मान्यता, पंजीयन अथवा आरटीई प्रक्रिया में शामिल करने से पहले उसका भौतिक सत्यापन किस अधिकारी या कर्मचारी ने किया, यह भी जांच का विषय बन गया है।

यदि विद्यालय का भौतिक सत्यापन किया गया था तो मौके पर विद्यालय उपलब्ध नहीं होने के बावजूद उसे पोर्टल पर संचालित दर्शाए जाने की स्थिति कैसे बनी, इस पर भी जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है। खंड स्तर से लेकर जिला स्तर तक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी विद्यालयों की स्थिति, अभिलेखों और शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी से जुड़ी होती है। ऐसे में शिकायत सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आना स्वाभाविक है।

क्या चंदेरी में और भी ऐसे विद्यालय हैं?

राघवेंद्र चौबे की शिकायत ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या चंदेरी में केवल एक ही ऐसा विद्यालय है, जो पोर्टल पर संचालित है लेकिन धरातल पर उसका अस्तित्व नहीं है? अथवा क्षेत्र में ऐसे अन्य विद्यालय भी हैं, जिनकी वास्तविक स्थिति और पोर्टल पर दर्ज जानकारी में अंतर है?

मामले की व्यापक जांच होने पर यह स्पष्ट हो सकता है कि आरटीई पोर्टल पर दर्ज कितने विद्यालय वास्तव में संचालित हैं, कितने विद्यालयों में निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध हैं और कितने विद्यालयों का हाल के समय में वास्तविक भौतिक सत्यापन किया गया है।

बीआरसीसी की अनुपस्थिति पर कलेक्टर को भेजा प्रतिवेदन

इसी जनसुनवाई के दौरान चंदेरी के बीआरसीसी की अनुपस्थिति का मामला भी सामने आया। चंदेरी एसडीएम द्वारा 25 अगस्त 2026 को अशोकनगर कलेक्टर को भेजे गए पत्र में बताया गया कि शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक मंगलवार को खंड स्तर पर जनसुनवाई आयोजित की जाती है। इसके बाद विभिन्न शासकीय योजनाओं की खंड स्तरीय समीक्षा भी की जाती है।

पत्र के अनुसार 25 अगस्त को आयोजित जनसुनवाई में बीआरसीसी चंदेरी वेद प्रकाश गोयल बिना सूचना अनुपस्थित रहे। उनके अनुपस्थित रहने के कारण शिक्षा विभाग से संबंधित प्राप्त शिकायतों का निराकरण नहीं हो सका और विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की समीक्षा भी नहीं की जा सकी।

एसडीएम ने कलेक्टर को भेजे प्रतिवेदन में बीआरसीसी की अनुपस्थिति का उल्लेख करते हुए उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की अनुशंसा की है।

अब व्यापक जांच से सामने आ सकता है सच

पूरे घटनाक्रम के बाद चंदेरी में शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। जांच में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि आरटीई पोर्टल पर विद्यालयों का विवरण कौन दर्ज करता है, विद्यालयों का भौतिक सत्यापन कब और किसके द्वारा किया गया तथा यदि कोई विद्यालय धरातल पर संचालित नहीं था तो उसे पोर्टल पर स्थान कैसे मिला। इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि ऐसे विद्यालयों में आरटीई के तहत कितने बच्चों ने प्रवेश के लिए आवेदन किया और कितने बच्चों को प्रवेश दिया गया।

आवेदक की शिकायत अब केवल उनकी बच्ची के प्रवेश तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ा मामला बन गई है। ऐसे में चंदेरी क्षेत्र के आरटीई पोर्टल पर दर्ज सभी विद्यालयों का मौके पर जाकर स्वतंत्र भौतिक सत्यापन कराने की जरूरत सामने आई है। जांच में यदि गलत जानकारी दर्ज करने, विद्यालय के फर्जी संचालन या नियमों की अनदेखी की पुष्टि होती है तो संबंधित विद्यालय संचालक के साथ जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका भी तय की जानी चाहिए।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि विद्यालय धरातल पर मौजूद नहीं है, तो वह शिक्षा विभाग के पोर्टल पर संचालित कैसे दर्ज हुआ और निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?

हिन्दुस्थान समाचार / Nirmal Kumar Vishwkarma

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