अनूपपुर: मकर संक्रांति पर विषेश मुहूर्त में श्रद्धालुओं ने नर्मदा उद्गम कुंड में लगाई आस्था की डुबकी
अनूपपुर, 15 जनवरी (हि.स.)। नई फसल की कटाई तथा सूर्यदेव के उत्तरायण पर पौराणिक मान्यताओं में 14 एवं 15 जनवरी को मनाए जाने वाले मकर संक्रांति का पावन पर्व दूसरे दिन गुरुवार को भी पूरे श्रद्धा व हर्षोउल्लास से मनाया गया। शुभ मुहूर्त में जिले में स्थित पवित्र नगरी अमरकंटक के नर्मदा सहित जिला मुख्यालय के सोन-तिपान नदी संगम पर श्रद्धालुओं ने नदियों में आस्था की डुबकी लगाई। राजेन्द्रग्राम, कोतमा, जैतहरी, राजनगर, बिजुरी सहित अन्य क्षेत्रों गुजरती नर्मदा, सोन, जुहिला, तिपान, केवई सहित अन्य नदियों के नदीघाटों पर लोगों ने स्नान कर इष्टदेवों की विशेष पूजा अर्चना की। मकर संक्राति के अवसर पर जिले के अनेक स्थानों पर मेले का भी आयोजन किया गया है। पंचांग अनुसार, 15 जनवरी को माघ कृष्ण द्वादशी तिथि, ज्येष्ठा नक्षत्र, तैतिल करण, वृद्धि योग, दक्षिण का दिशाशूल और वृश्चिक राशि का चंद्रमा है, वृद्धि योग में मकर संक्रांति का स्नान और दान है।
मान्यताओं के अनुसार गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भागीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इसी दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में मिली थी। इसलिए मकर संक्राति पर गंगा-सागर में मेला लगता है। मकर संक्राति पर्व के मौके पर रविवार की सुबह से ही पावन नगरी अमरकंटक में हजारो श्रदलुओं की भीड़ जुटी रही। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा उद्गम कुंड में डुबकी लगाकर माता नर्मदा का पूजन अर्चन किया। साथ ही तिल-चावल, गुड़ सहित अन्य सामग्रियों का दान दिया। दरअसल अमरकंटक में पर्व की महत्ता को देखते हुए यहां पहुंचने वाली भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं का जत्था एक सप्ताह पूर्व से आने आरम्भ हो गया था। प्रदेश की जीवनदायिनी नदी मां नर्मदा का उद्गम स्थल होने के कारण इस दिन यहां देश- प्रदेश से हजारों की तादाद में श्रद्धालु एवं पर्यटक पूजा अर्चना कार मंदिरों में दर्शन को आते हैं। जबकि अमरकंटक में इन दिनो अत्याधिक ठंड पड़ती है, जिसके कारण दूधधारा, कपिलधारा से निकलने वाली दूधिया भाप पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बना रहता है।
जिले के सीतापुर एवं
जिले में बरगवां और सोन नदी के किनारे मेला सजा हुआ हैं। दोनों मेला में पुलिस सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। लोग सुबह से ही दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर बरगवां में पहुंचकर पूजा अर्चना कर रहे हैं। 14 जनवरी की सुबह से ही पावन नगरी अमरकंटक में हजारो श्रदलुओं की भीड़ जुटी रही। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा उद्गम कुंड में डुबकी लगाकर माता नर्मदा का पूजन अर्चन किया। साथ ही तिल-चावल, गुड़ सहित अन्य सामग्रियों का दान दिया। दरअसल अमरकंटक में पर्व की महत्ता एवं मेले में पहुंचने वाली भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं का जत्था एक सप्ताह पूर्व से आने आरम्भ हो गए थे। प्रदेश की जीवनदायिनी नदी मां नर्मदा का उद्गम स्थल होने के कारण इस दिन यहां देश- प्रदेश से हजारों की तादाद में श्रद्धालु एवं पर्यटक पूजा अर्चना के साथ मेला देखने आते हैं।
मकर संक्रांति पर अमरकंटक में मृत्युंजय आश्रम में श्रद्धालुओं, तीर्थ यात्रियों एवं दर्शनार्थियों को खिचड़ी प्रसाद वितरित कर सेवा की गई। आश्रम के प्रमुख व्यवस्थापक योगेश दुबे एवं संत योगानंद जी महाराज के मार्गदर्शन में आश्रम सेवकों ने श्रद्धालुओं को आमंत्रित कर प्रसाद ग्रहण कराया। इस अवसर पर खिचड़ी के साथ-साथ तिल के लड्डू एवं तिल की रेवड़ी का भी वितरण किया गया। श्रद्धालुओं ने इस पुण्य कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए आश्रम परिवार को आशीर्वाद प्रदान किया।
अमरकंटक के गुरु नानक गुरुद्वारा द्वारा भी सेवा भावना प्रस्तुत करते हुए मुख्य द्वार पर आवागमन कर रहे भक्त श्रद्धालुओं, तीर्थ यात्रियों एवं स्थानीय नागरिकों को नाश्ता एवं चाय वितरित की गई। कड़ाके की ठंड के बीच इस सेवा से श्रद्धालु अत्यंत प्रसन्न नजर आए।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

