महाकुंभ वायरल गर्ल मामले में एनएचआरसी सदस्य को नहीं मिला नोटिस का जवाब

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महाकुंभ वायरल गर्ल मामले में एनएचआरसी सदस्य को नहीं मिला नोटिस का जवाब


खरगोन, 19 मई (हि.स.)। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने मंगलवार को महाकुंभ वायरल गर्ल' के केरल में हुए निकाह मामले में खरगोन पुलिस की कार्यवाही पर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा कि पुलिस को भेजे गए नोटिस पर फिलहाल जवाब की प्रतीक्षा है।

कानूनगो मंगलवार शाम बड़वानी पहुंचे थे। उन्होंने यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए महाकुंभ वायरल गर्ल मामले में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि चाइल्ड मैरिज भारत में अपराध है, हमने खरगोन पुलिस को नोटिस भेज कर कहा था कि इसमें समस्त दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए और एक्शन टेकन रिपोर्ट भेजी जाए। उन्होंने कहा कि यदि शादी में राजनीतिक व्यक्ति या अधिकारी शामिल हुए हों तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो। फिलहाल नोटिस का जवाब नहीं मिल पाया है। फिलहाल खरगोन पुलिस को कार्रवाई के लिए दिए गए नोटिस के जवाब की प्रतीक्षा है।

उन्होंने कहा कि एक शिकायत मिली थी, जिसमें नाबालिग वायरल गर्ल के साथ केरल में निकाह और बड़े-बड़े राजनेता और अधिकारी शामिल होने का उल्लेख था। आयोग को मिली शिकायत के अनुसार, महाकुंभ के दौरान रुद्राक्ष बेचते हुए वायरल हुई 16 वर्षीय किशोरी का विवाह केरल में कर दिया गया। शिकायत में किशोरी के नाबालिग होने, दस्तावेजों में हेराफेरी और विवाह में दबाव या धोखाधड़ी की आशंका जताई गई है।

16 साल की किशोरी के केरल में विवाह पर आयोग ने लिया संज्ञान

खरगोन जिले से जुड़ा ‘वायरल गर्ल’ मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। नाबालिग वायरल गर्ल के साथ फरमान के विवाह विवाद को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने गंभीरता दिखाते हुए संज्ञान लिया और पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए थे। आयोग को 27 मार्च 2026 को एक शिकायत मिली थी, जिसमें बताया गया कि महेश्वर की एक किशोरी, जो महाकुंभ मेले के दौरान रुद्राक्ष बेचते हुए वायरल वीडियो से चर्चा में आई थी, उसने अपनी उम्र करीब 16 साल बताई थी। इसके बावजूद उसका विवाह केरल में कर दिया गया, जो कानून के खिलाफ हो सकता है।

खरगोन एसपी से मांगी थी 7 दिन में रिपोर्ट

शिकायत में यह भी आशंका जताई गई थी कि लड़की की उम्र से जुड़े दस्तावेजों में गड़बड़ी या गलत जानकारी दी गई हो सकती है। साथ ही यह भी जांच की मांग की गई है कि कहीं विवाह में दबाव, धोखाधड़ी या पहचान छिपाने जैसी बातें तो नहीं हुईं। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सच्चाई सामने लाने की अपील की थी। आयोग ने पहली नजर में इस मामले को मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा माना था और अप्रैल के पहले सप्ताह में खरगोन के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया था कि वे पूरे मामले की विस्तृत जांच कर 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश करें।

दोषी पाए जाने पर पॉक्सो एक्ट के तहत होगी कार्रवाई

इसके अलावा आयोग ने मध्य प्रदेश और केरल के अधिकारियों को मिलकर जांच करने के निर्देश दिए थे, ताकि सभी पहलुओं की सही और निष्पक्ष जांच हो सके। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि जांच में लड़की के नाबालिग होने की पुष्टि होती है, तो पॉक्सो एक्ट और बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पीड़िता की सुरक्षा, काउंसलिंग और पुनर्वास के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा गया था।

अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी माना नाबालिग

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के चेयरमैन अंतर सिंह आर्य के निर्देश पर एक पृथक से कराई गई जांच में महाकुंभ वायरल गर्ल को नाबालिग पाया गया था। अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी खरगोन पुलिस प्रशासन को पत्र लिख आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश देकर उन्हें निर्धारित समय अवधि में अवगत करवाने को कहा था। इस आधार पर खरगोन जिले की महेश्वर पुलिस ने नाबालिग से विवाह करने वाले फरमान खान के विरुद्ध अपहरण का केस दर्ज किया था। हालांकि फरमान खान और नाबालिग ने केरल हाई कोर्ट की शरण ली थी और हाईकोर्ट ने फरमान खान की गिरफ्तारी पर 20 मई तक रोक लगा दी थी।

खरगोन एसपी रवींद्र वर्मा का पक्ष

खरगोन पुलिस अधीक्षक रवींद्र वर्मा ने कहा कि एनएचआरसी के जिस सेक्शन से नोटिस आया था, वहां एक्शन टेकन रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि फरमान की गिरफ्तारी व अन्य जुड़े मामलों की जांच के लिए खरगोन से दो बार टीम भेजी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि केरल के हाईकोर्ट में 20 मई को अगली तारीख लगी है, इसमें फरमान की गिरफ्तारी को लेकर स्थिति सामने आएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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