अनूपपुर: 2 जून से स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के बादल: एनएचएम संविदा कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

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अनूपपुर: 2 जून से स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के बादल: एनएचएम संविदा कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल


अनूपपुर: 2 जून से स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के बादल: एनएचएम संविदा कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल


अनूपपुर, 01 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत कार्यरत संविदा कर्मचारियों ने अपनी वर्षों पुरानी मांगों को लेकर अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले इन कर्मचारियों ने सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।

राष्ट्रीय मजदूर संघ से संबद्ध राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संगठन ने सोमवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अलका तिवारी को ज्ञापन सौंपते हुए आंदोलन की रूपरेखा घोषित की गई। संगठन के अनुसार कल 2 जून से जिले के समस्त संविदा कर्मचारी ऑनलाइन एवं ऑफलाइन सभी कार्यों का पूर्ण बहिष्कार करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इसके साथ ही आगामी 8 जून को जिले के सभी कर्मचारी भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे।

वर्षों से सेवा, फिर भी नहीं मिला अधिकार

एनएचएम स्वास्थ्य कर्मचारी संघ अनूपपुर के जिलाध्यक्ष डॉ. शिवेन्द्र द्विवेदी ने बताया कि कोविड महामारी के कठिन दौर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं तक संविदा कर्मचारियों ने दिन-रात मेहनत कर स्वास्थ्य व्यवस्था को संभाला। टीकाकरण अभियान, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम, आपातकालीन सेवाएं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं में इन कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन आज तक उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल सकीं।

उन्होंने बताया कि जिले में 400 से अधिक संविदा कर्मचारी वर्षों से बेहद कम वेतन में कार्य कर रहे हैं। कई कर्मचारी 10 से 15 वर्षों से लगातार सेवा दे रहे हैं, लेकिन न तो उन्हें नियमित किया गया और न ही सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं का लाभ मिला।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

संविदा कर्मचारियों ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं, जिनमें संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण, सामान्य प्रशासन विभाग की नीति के अनुसार एनपीएस एवं स्वास्थ्य बीमा सुविधा, प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि, नियमित कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ता, समान कार्य के लिए समान वेतन, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के वेतन में पीवीआई समायोजन, वेतन विसंगतियों का निराकरण जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं।

चरणबद्ध आंदोलन से अब आर-पार की लड़ाई

संगठन पदाधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से शासन स्तर पर पत्राचार, ज्ञापन और चर्चा के माध्यम से समस्याओं के समाधान का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है और मजबूर होकर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। पहले चरण में कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया, इसके बाद अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे गए। अब आंदोलन निर्णायक चरण में पहुंच चुका है और कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर उतर आए हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है व्यापक असर

एनएचएम के तहत कार्यरत कर्मचारी ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं, टीकाकरण, प्रसूति सेवाओं, जननी सुरक्षा योजनाओं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियानों और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में हड़ताल लंबी चली तो जिले सहित पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने में कठिनाई हो सकती है। अस्पतालों में ऑनलाइन रिपोर्टिंग, टीकाकरण, सर्वे कार्य, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं तथा अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

संविदा कर्मचारियों ने राष्ट्रीसय स्वा स्य्री मिशन की उक्तश मांगो को को समयसीमा में निराकरण करवाये जाने की मांग की गई है। जिससे कर्मचारियों में उत्प्न्नव आक्रोश आंदोलन में परिवर्तित ना हो सके एवं जन सामान्य को मिलने वाली स्वा स्य्ार सुविधाओं में होने वाली असुविधा का सामना ना करना पड़े। यदि स्वा स्य्िल सुविधाओं में असुविधा होती है तो उसकी समस्तच जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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