नीट काउंसलिंग की एग्जिट पेनल्टी पर जीतू पटवारी ने उठाए सवाल, मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर नियम स्थगित करने की मांग
भोपाल, 14 सितंबर (हि.स.)। यूजी नीट-2026 की एमबीबीएस काउंसलिंग में आवंटित सीट छोड़ने पर प्रस्तावित 2 लाख रूपये की एग्जिट पेनल्टी को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने साेमवार काे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर इस प्रावधान को वापस लेने या स्थगित करने की मांग की है। पटवारी का कहना है कि काउंसलिंग प्रक्रिया के बीच इस तरह का आर्थिक दायित्व विद्यार्थियों पर डालना उचित नहीं है।
जीतू पटवारी के अनुसार, 3 सितंबर को जारी राउंड-2 के नोटिस में 2 लाख रूपये की एग्जिट पेनल्टी का प्रावधान किया गया, जबकि 3 अगस्त को जारी नियम पुस्तिका के पेज-8 के क्रमांक 15 में राउंड-2 तक आवंटित सीट छोड़ने पर केवल प्रवेश शुल्क देय होने की जानकारी दी गई थी। उनका दावा है कि विद्यार्थियों ने इसी नियम पुस्तिका के आधार पर काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लिया था।
एमसीसी काउंसलिंग के समय को लेकर भी सवाल
पीसीसी चीफ पटवारी ने पत्र में कहा कि ऑल इंडिया एमसीसी की काउंसलिंग प्रक्रिया भी इसी अवधि में चल रही थी। उनके मुताबिक एमसीस के राउंड-2 का अलॉटमेंट 11 सितंबर को होना था, जबकि मध्यप्रदेश की काउंसलिंग में सीट छोड़ने के लिए 3-4 सितंबर की समय-सीमा निर्धारित की गई। ऐसे में विद्यार्थियों के सामने अपग्रेडेशन की संभावना स्पष्ट होने से पहले ही सीट को लेकर निर्णय लेने की स्थिति बनी। उन्होंने दावा किया कि एमसीस की व्यवस्था की तुलना में मध्यप्रदेश में 2 लाख रूपये की एग्जिट पेनल्टी विद्यार्थियों पर अधिक आर्थिक बोझ डालती है। पटवारी ने इस प्रावधान की समीक्षा कर विद्यार्थियों को पर्याप्त विकल्प और समय देने की मांग की है।
नियमों में बदलाव पर जताई आपत्ति
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि काउंसलिंग शुरू होने से पहले नियम स्पष्ट होना चाहिए और प्रक्रिया के बीच ऐसे बदलाव नहीं किए जाने चाहिए, जिनका सीधा आर्थिक असर विद्यार्थियों पर पड़े। उन्होंने कहा कि नीट-यूजी की परीक्षा और काउंसलिंग प्रक्रिया में देरी से पहले ही विद्यार्थी प्रभावित हुए हैं और अतिरिक्त आर्थिक दायित्व उनकी परेशानी बढ़ा सकता है। पटवारी ने अपने पत्र में सुप्रीम कोर्ट के 2024 के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि विरोधाभासी काउंसलिंग प्रावधानों की स्थिति में उम्मीदवारों को नुकसान नहीं होना चाहिए। उन्होंने राज्य और ऑल इंडिया काउंसलिंग के संबंधित चरण पूरे होने तक विद्यार्थियों को सीट छोड़ने या अपग्रेडेशन का विकल्प उपलब्ध कराने की मांग की। जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री से 15 सितंबर से पहले इस मामले में निर्णय लेने का आग्रह किया है।
पांच मांगें रखीं
2 लाख रूपये की एग्जिट पेनल्टी को वापस या स्थगित किया जाए।
3 अगस्त की नियम पुस्तिका के अनुसार देयता केवल प्रवेश शुल्क तक सीमित रखी जाए।
अतिरिक्त राशि वसूल की गई है तो उसे विद्यार्थियों को वापस किया जाए।
राउंड-2 पूरा होने से पहले सीट छोड़ने के लिए उचित समय दिया जाए।
भविष्य में काउंसलिंग प्रक्रिया के बीच विद्यार्थियों को प्रभावित करने वाले नियमों में बदलाव से बचा जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

