अनूपपुर:प्राकृतिक खेती केवल खेती की एक पद्धति नहीं, बल्कि हमारी परंपरा, किसान पारंपरिक कृषि की ओर हो अग्रसर- कलेक्टर
अनूपपुर, 19 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर कलेक्टर हर्षल पंचोली ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की एक पद्धति नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध परंपरा और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने किसानों से पारंपरिक कृषि पद्धतियों को अपनाने तथा शासन द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने का आह्वान किया।
कलेक्टर पंचोली शुक्रवार को विकासखंड अनूपपुर की ग्राम पंचायत जमुड़ी में कृषक कल्याण वर्ष-2026 के अंतर्गत मिलेट मिशन योजना के तहत आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ते हुए कही। जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न क्षेत्रों में 50 क्लस्टर विकसित किए गए हैं। प्रत्येक क्लस्टर में रिसोर्स सेंटर स्थापित किए गए हैं, जहां किसानों को प्राकृतिक खेती से संबंधित तकनीकी जानकारी, प्रशिक्षण एवं आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।
कलेक्टर ने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से लागत में कमी के साथ-साथ भूमि की उर्वरता एवं पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे प्राकृतिक एवं पारंपरिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर जिले को प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में प्रदेश में अग्रणी स्थान दिलाने में अपनी सहभागिता करें। जिले के किसानों से आह्वान करते हुए कहा कि कृषि, पशुपालन एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों द्वारा प्रदान की जा रही जानकारी को गंभीरता एवं ध्यानपूर्वक सुनें तथा उनके द्वारा बताए गए वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों के अनुरूप कृषि कार्य संपादित करें।
जिला पंचायत अध्यक्ष प्रीति रमेश सिंह ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की पद्धति नहीं, बल्कि किसानों के स्वास्थ्य, मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर गोबर, गौमूत्र एवं जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने ने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत घटती है, भूमि की गुणवत्ता में सुधार होता है तथा किसानों की आय में वृद्धि के साथ सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध होता है। उन्होंने किसानों से इस अभियान से जुड़कर आत्मनिर्भर कृषि को बढ़ावा देने की अपील की।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अर्चना कुमारी ने किसानों से प्राकृतिक एवं पारंपरिक कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि जिले के सभी किसान प्राकृतिक खेती के साथ-साथ परंपरागत फसलों के उत्पादन पर विशेष ध्यान दें। कोदो, कुटकी, रागी, मक्का एवं ज्वार जैसी पारंपरिक एवं मोटे अनाज वाली फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के उद्देश्य से शासन द्वारा विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है, जिनका लाभ लेकर किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत ने किसानों से अपने बच्चों को भी कृषि कार्य के प्रति प्रेरित करने का आह्वान करते हुए कहा कि नई पीढ़ी की कृषि क्षेत्र में सहभागिता से परिवार, समाज एवं देश की खाद्य सुरक्षा को और अधिक मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम को रामदास पुरी तथा चंद्रिका द्विवेदी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया तथा प्राकृतिक एवं पारंपरिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर उप संचालक कृषि अवनीश चतुर्वेदी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक अनिल सिंह सहित अन्य वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न आयामों, जैविक संसाधनों के उपयोग, फसल प्रबंधन एवं उन्नत कृषि तकनीकों के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने किसानों को कम लागत, अधिक उत्पादन एवं पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

