अनूपपुर: राष्ट्रीय लोक अदालत में 1538 प्रकरणों का निराकरण, 3.75 करोड़ से अधिक की राशि अवॉडिड
अनूपपुर, 14 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले शनिवार को जिला एवं सत्र न्यायालय अनूपपुर सहित तहसील सिविल न्यायालय कोतमा/ राजेन्द्रग्राम में राष्ट्रीय लोक अदालत सहित 15 खण्डपीठों का गठन किया गया था। जिसमें कुल 1538 प्रकरणों का निराकरण किया गया। वहीं 3,75,02,806/- (तीन करोड़ पचहत्तर लाख दो हजार आठ सौ छः रूपये मात्र) की राशि अवॉडिड की गई। राष्ट्रीय लोक अदालत में तलाक के लिए चल रहा प्रकरण में 3 परिवारों के बीच सुलह कराई गई जिसके बाद पति-पत्नी ने परिवार संग घर लौटे गयें।
जिला न्यायालय अनूपपुर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश माया विश्वलाल ने मॉ सरस्वती के चित्र में पुष्पमाला अर्पित एवं दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर में प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय मनोज कुमार लढ़िया, प्रथम जिला न्यायाधीश/संयोजक नेशनल लोक अदालत नरेन्द्र पटेल, तृतीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्रीकृष्ण डागलिया, मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी चैनवती ताराम, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण विनोद कुमार वर्मा, सुधा पाण्डेय न्यायिक मजिस्ट्रेट, बॉबी सोनकर न्यायिक मजिस्ट्रेट, सृष्टि साहू न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिला विधिक सहायता अधिकारी बृजेश पटेल, जिला अधिवक्ता बार संघ अध्यक्ष संतोष सिंह परिहार, सचिव राम कुमार राठौर, शासकीय अभिभाषक पुष्पेन्द्र कुमार मिश्रा, लीगल एड डिफेंस काउंसेल संतदास नापित, जिला अधिवक्ता संघ के समस्त अधिवक्तागण खण्डपीठ के सुलहकर्ता सदस्यगण, पैरालीगल वालेंटियर्स, संबधित विभाग के अधिकारी कर्मचारी, सहित जिला न्यायालय एवं जिला प्राधिकरण अनूपपर के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहें।
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अनूपपुर माया विश्वलाल के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक प्रकरणों के निराकरण हेतु 15 खण्डपीठों का गठन किया गया था। जिला स्तर पर 08 खण्डपीठ, तहसील सिविल न्यायालय कोतमा में 04 खण्डपीठ एवं राजेन्द्रग्राम में 03 खण्डपीठ का गठन किया गया। जहां आपराधिक 67, चैक बाउंस 63, क्लेम प्रकरण 09, वैवाहिक प्रकरण 28, विद्युत प्रकरण 151, अन्य सिविल प्रकरण 40 एवं प्रीलिटिगेशन प्रकरण 551, इस प्रकार कुल 1538 प्रकरणों का निराकरण किया गया। जिसमें कुल अवार्ड राशि 3,75,02,806/- (तीन करोड़ पचहत्तर लाख दो हजार आठ सौ छः रूपये मात्र) अवार्ड राशि पारित की गई। साथ ही न्याय वृक्ष के रूप में निराकृत प्रकरण के पक्षकारों को फलदार पौधे भेंट किए गए।
05 वर्षो का विवाद समाप्त किया पति-पत्नी ने
प्राप्ती पटेल वगैराह बनाम बृजेष पटेल अवेदिका एवं अनावेदक का विवाह मई 2022 हिन्दु रीति रिवाज से हुआ एक पुत्री का जन्म भी हुआ, इस दोनो के बीच घरेलू एंव दहेज प्राताड़ना से संबंधित विवाद होने से दोनो अलग-अलग रहने लगे। उभयपक्ष न्यायालय में आज उपस्थित हुये दोनो के अधिवक्ता एवं न्यायालय की समझाईस से दोनो के मध्य सुलह होने से 05 वर्षो से चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया और दोनो आपस मे रहने के लिये सहमत हुये।
न्यायालय की समझाईस से दोनो के मध्य सुलह
मीरा पनिका बनाम रामरतन पनिका जिनका मामला प्रधान न्यायाधीष कुटुम्ब न्यायालय में चल रहा था, जिनका विवाह तीन वर्ष पूर्व हिन्दु रीति रिवाज से सम्पन्न हुआ था, कुछ दिन विवाहित जीवन ठीक चला फिर दोनो के मध्य विवाद होने लगा जिस से आवेदिका ने अनावेदक के उपर आरोप लगाया कि मुझे मानसिक एवं शारिरिक प्रातणना दी जा रही है और महिला का यह भी आरोप था कि तीन वर्षो से अनावेदन मुझे घर से धक्के मार कर निकाल दिया और कहा कि वापस आई तो जान से मार दूंगा। फिर आवेदिका ने न्यायालय का सहारा लिया, राष्ट्रीय लोक अदालत में उभयपक्ष का प्रकरण रखा गया उभयपक्षों के अधिवक्ताओं के एवं न्यायालय के समझाईस से दोनो के मध्य सुलह हो गया एवं दोनो अपना दामपत्य जीवन सुचारूरूप से चलाने के लिये सहमत हुये और एक दूसरे को माला पहना कर दोनो घर को चले गये।
तलाक लेने पहुंचे पति-पत्नी में हुआ समझौता, परिवार संग लौटे घर
कोतमा में प्रथम जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गंगाचरण दुबे की खंडपीठ में तलाक लेने पहुंचे पति-पत्नी के बीच न्यायालय के प्रयास से समझौता हुआ और दोनों परिवार सहित पुनः दांपत्य जीवन की नई शुरुआत करने के लिए घर लौट गए।
प्रकरण में पत्नी सुनीता चौधरी (परिवर्तित नाम) और पति विक्रम लाल चौधरी का विवाह 24 अप्रैल 2012 को कोतमा में संपन्न हुआ था। दोनों का दांपत्य जीवन चल रहा था और उनके चार बच्चे तीन पुत्रियां और एक पुत्र हैं। समय के साथ पति के संदेहपूर्ण व्यवहार, शराब पीकर घरेलू विवाद करने और पत्नी द्वारा पति के अनादर के आरोप-प्रत्यारोप के कारण दोनों के बीच मनमुटाव बढ़ गया। लगभग दो वर्ष पहले पत्नी बच्चों और पति से अलग रहने लगी और दांपत्य संबंध समाप्त हो गए। और पत्नी ने न्यायालय में विवाह विच्छेद की याचिका प्रस्तुत कर दी, जिस पर पति ने भी सहमति जताई। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अंतिम बयान दर्ज करने से पहले एक बार फिर समझौते का प्रयास किया। न्यायाधीश के प्रयास, दोनों पक्षों के परिजनों सहित पत्नी और पति की माताओं की समझाइश से अंततः पति-पत्नी के बीच पुनः समझौता हो गया। दोनों ने खुशी-खुशी अपने दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना करते हुए साथ रहने का निर्णय लिया और नए जीवन की शुरुआत का संकल्प लिया। इस अवसर पर पक्षकारों ने न्यायालय का आभार व्यक्त किया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एम.डी. पटेल, खंडपीठ सदस्य राखी चर्मकार सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद रहें।
मालिकाना हक का विवाद, पड़ोसियों के बीच हिंसक झड़प का अंत
कोतमा तहसील के जमुना क्षेत्र में दो पड़ोसी परिवारों के बीच घर के मालिकाना हक को लेकर सात वर्षों से चले आ रहे एक लंबे कानूनी विवाद का पटाक्षेप आज लोक अदालत में हो गया। जो हिंसक झड़पों तक पहुंच गया था। विवाद की शुरुआत 2019 में हुई जब पड़ोसी राठौर परिवारों ने एक ही संपत्ति पर दावा ठोका। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर घर पर कब्जा करने का आरोप लगाया, जिससे कई बार लाठी-डंडों से मारपीट और पुलिस हस्तक्षेप की नौबत आई। सात सालों में दर्जनों सुनवाईयों के बावजूद मामला सुलझा नहीं था, जिससे दोनों परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से त्रस्त हो चुके थे।
लोक अदालत में न्यायाधीश अमनदीप सिंह छाबड़ा के प्रयासों से दोनों पक्षों को आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने के लिए प्रेरित किया गया और विस्तृत चर्चा तथा समझाइश के बाद दोनों पक्षों ने समझौते पर सहमति व्यक्त की।समझौते के बाद दोनों पक्षों ने कहा, “7 साल की लड़ाई ने हमारी जिंदगी बर्बाद कर दी थी। लोक अदालत ने हमें शांति दी। अब हम पड़ोसी की तरह रहेंगे।”यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि लोक अदालत छोटे-बड़े विवादों का सबसे तेज और सस्ता समाधान है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

