जबलपुर :-पितृमोक्ष अमावस्या पर नर्मदा घाटों पर उमड़ा आस्था का सैलाब
जबलपुर, 10 अक्टूबर (हि.स.)। पितृपक्ष के समापन पर पितृमोक्ष अमावस्या के अवसर पर शनिवार को नर्मदा तटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। ग्वारीघाट और तिलवारा घाट सहित शहर के प्रमुख तटों पर हजारों लोगों ने अपने पूर्वजों की आत्मशांति के लिए तर्पण, पिंडदान और धार्मिक अनुष्ठान किए। सुबह से ही घाटों पर पुरोहितों के मंत्रोच्चार के बीच पूजन का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर शाम तक चलता रहा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृमोक्ष अमावस्या पर पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान करने का विशेष महत्व है। घाटों पर पहुंचे परिवारों ने परंपरागत विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने ज्ञात और अज्ञात पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस बार कोरोना महामारी के दौरान प्रशासनिक प्रतिबंधों के चलते अंतिम संस्कार और पारंपरिक कर्मकांड नहीं कर पाने वाले परिवारों ने अपने दिवंगत परिजनों के निमित्त विशेष अनुष्ठान कराए। श्मशान पिंड, एकादशी पिंड और दशगात्र पिंड सहित विभिन्न धार्मिक विधियां संपन्न कराई गईं। पुरोहितों के मार्गदर्शन में बेसन से बने पुतले का प्रतीकात्मक हवन भी किया गया। काशी, प्रयाग, पुष्कर, हरिद्वार और गया जैसे तीर्थस्थलों तक नहीं पहुंच पाने वाले श्रद्धालुओं ने नर्मदा तट पर ही तर्पण कर पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
कई परिवारों ने पितरमिलौनी पूजा सहित विभिन्न पारंपरिक अनुष्ठान संपन्न कराए। जिन परिवारों ने अनंत चतुर्दशी या पूर्णिमा पर पितरों का आह्वान किया था, उन्होंने अमावस्या पर अगरासन की रस्म पूरी की। इसके बाद ब्राह्मण भोज कराया गया और नर्मदा जल में अंजलि अर्पित कर पितरों की विदाई की गई।
ग्वारीघाट और तिलवारा में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। कोई अपने दिवंगत माता-पिता के निमित्त कर्मकांड कर रहा था, तो कोई परिवार के अन्य पूर्वजों की आत्मशांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान में जुटा रहा।
पितृमोक्ष अमावस्या पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ का असर यातायात व्यवस्था पर भी दिखाई दिया। सुबह नौ बजे के बाद ग्वारीघाट और तिलवारा की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर चार पहिया वाहनों की संख्या बढ़ने से जाम की स्थिति बनने लगी। संकरे रास्तों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा।
पितृमोक्ष अमावस्या पर नर्मदा तटों पर धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। पितृपक्ष के अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों के प्रति आस्था और श्रद्धा व्यक्त करते हुए विधि-विधान से तर्पण कर पितृपक्ष का समापन किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

