नागदा : मालवा में बनेगा भगवान विश्वकर्मा का भव्य मंदिर, 150 वर्ष पुरानी धरोहर का होगा जीर्णोद्धार

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नागदा : मालवा में बनेगा भगवान विश्वकर्मा का भव्य मंदिर, 150 वर्ष पुरानी धरोहर का होगा जीर्णोद्धार


नागदा, 16 जून (हि.स.)। मध्‍य प्रदेश के मालवा अंचल के जूना गुजराती सुतार विश्वकर्मा समाज ने अपनी ऐतिहासिक धार्मिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। उज्जैन जिले के ग्राम पलवा स्थित लगभग 150 वर्ष पुराने भगवान विश्वकर्मा मंदिर के जीर्णोद्धार एवं पुनर्निर्माण का निर्णय लिया गया है। इस उद्देश्य से गांव पलवा में समाज की केंद्रीय समिति के मार्गदर्शन में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें मंदिर निर्माण और संरक्षण की रूपरेखा तय की गई।

बैठक की अध्यक्षता कांतिलाल विश्वकर्मा (कनासिया, शाजापुर) ने की, जबकि केंद्रीय समिति के अध्यक्ष अशोक शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। समाज के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों ने मंदिर के संरक्षण को लेकर व्यापक चर्चा की और निर्माण कार्य को गति देने के लिए नई समिति का गठन किया।

समिति के सचिव डॉ. श्रीराम शर्मा ने बताया कि यह मंदिर अपनी अद्वितीय लकड़ी की नक्काशी और पारंपरिक स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध रहा है। समय के साथ मंदिर जर्जर स्थिति में पहुंच गया है, जिसके कारण इसके संरक्षण और पुनर्निर्माण की आवश्यकता महसूस की गई।

प्रस्तावित मंदिर का निर्माण लगभग 1600 वर्गफीट क्षेत्र में किया जाएगा। निर्माण कार्य पर करीब 35 लाख रुपये की लागत आने का अनुमान है। इसके लिए आवश्यक राशि समाजजनों के सहयोग और जनभागीदारी से जुटाई जाएगी।

बैठक में इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, झाबुआ, शाजापुर और आगर जिलों से लगभग 150 समाजजन शामिल हुए। सभी ने मंदिर निर्माण अभियान को सफल बनाने के लिए सहयोग का संकल्प लिया।

समिति का गठन

मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष पद पर कैलाश सनोलिया को नियुक्त किया गया है। उपाध्यक्ष के रूप में राकेश पटेल जलोदिया (धार), संजय शर्मा मौलाना (बड़नगर), सुरेश शर्मा (बड़नगर), डॉ. श्रीराम शर्मा दसाई (धार) एवं प्रशांत शर्मा (उज्जैन) को जिम्मेदारी सौंपी गई है। किशोर शर्मा (बड़नगर) को कोषाध्यक्ष बनाया गया है।

वहीं संरक्षक मंडल में अशोक शर्मा (उज्जैन), रामचंद्र सुनेरिया (उज्जैन), रमेश कश्यप (देवास) तथा दिनेश विश्वकर्मा (लोहाना, बड़नगर) को शामिल किया गया है।

समाजजनों का मानना है कि मंदिर का पुनर्निर्माण न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि मालवा क्षेत्र की पारंपरिक शिल्पकला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / कैलाश सनोलिया

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