उज्जैन: बड़े पर्दे पर अब दिखेगी महाकाल नगरी की धरोहर

उज्जैन: बड़े पर्दे पर अब दिखेगी महाकाल नगरी की धरोहर
उज्जैन: बड़े पर्दे पर अब दिखेगी महाकाल नगरी की धरोहर


उज्जैन/नागदा, 4 अप्रैल (हि.स.)। उज्जैन जिले के औद्योगिक नगर बिड़लाग्राम नागदा की एक श्रमिक बस्ती की तंग गलियों में जिस युवक की परवरिश हुई उसकी प्रतिमा ने गुदड़ी का लाल की कहावत को चरितार्थ किया। अब कामेडी फिल्म गुडलक के बड़े पर्दे पर इस युवक की कला 5 अप्रैल को देशभर में शोहरत हासिल करेगी। यह फिल्म देशभर में रिलीज हो रही है। इस फिल्म में नागदा के विजय श्री वास्तव ने आर्ट डायरेक्टर का किरदार निभाया है। इस कामेडी फिल्म की खासियत हैकि विश्व विख्यात महाकाल की नगरी उज्जैन की कई एतिहासिक धरोहर भी दिखाई देगी। पूरी फिल्म उज्जैन एवं इंदौर में बनी है। इस पारिवारिक फिल्म की थीम में हंसी- मजाक के साथ-साथ उज्जैन के एतिाहासिक स्थल क्षिप्रा नदी,, महाकाल मंदिर, रामघाट, आदि भी दिखाई देंगे।

इस फिल्म के प्रत्येक ऐपिसोड में नागदा के विजय श्री वास्तव की कला परवान चढी है। फिल्म जगत में इस फिल्म की दस्तक तो अपनी जगह पर है, उसके साथ आर्ट डायरेक्टर विजय श्री वास्तव के अदृश्य संधर्ष की दास्तान देशवासियों के लिए प्रेरणादायी है, हालांकि फिल्म में आर्ट डायरेक्टर के अतीत का कोई हिस्सा नहीं हैं लेकिन यहां प्रासंगिक है।

आर्ट डायरेक्टर का अतीत

नागदा शहर की एक पिछडी बस्ती आजाद पूरा में एक गंदे नाले के समीप धूल एवं कीचड से सनी तंग गलियों में विजय का बचपना गुजरा। आशियाने की टिमटिमाती रोशनी उसकी पढाई की साक्षी बनी। पिता स्व नारायण प्रसाद की बीमा चिकित्सालय में ड्रायवरी की नौकरी एवं माता श्रीमती लक्ष्मीदेवी नर्स की सेवा काल में विजय के बचपन की परवरिश हुई। इन दिनों मां अब सेवानिवुत हो चुकी है। पिता अब नहीं रहे हैं। विजय को बचपन से ही से ही आर्ट से ऐसी मोहब्ब्त हुई कि पढाई में विशेष रूचि नहीं ली। ग्रेसिम विद्यालय एवं निजी शिक्षण संस्था शारदा स्कुूल से हाईसेंकडरी तक शिक्षा के बाद जीविकोपार्जन की विवशता ने इस प्रतिभा को ग्रेसिम मिल नागदा में पेटिंग का कार्य के लिए मजबूर किया। इस प्रतिभा ने 1995 से 2015 तक मिल में पेटिंग कार्य को आजीविका का साधन बनाया।

जिदंगी के शुरूआती कैरियर में एक मिल मजदूर के रूप में पहचान मिली। ग्रेसिम मिल में पेंटिग मजदूर का यह सफर 45 वर्ष तक की उम्र तक रहा। वर्ष 2016 में अपनी कला के शौक ने उसके कदम और कहीं बढाने के लिए प्रेरित किया। मिल की पेटिंग की मजदूरी को तिलांजलि देकर तकदीर ने महानगरी मुबई को तलाश लिया। संघर्ष के बाद पहली बार एक हर्रर शो ( डरावनी फिल्म) सांसे में बतौर सहायक आर्ट डायरेक्टर का काम मिला। इस फिल्म की शुटिंग सात समुंदर पार अप्रैल 2016 में मोरीशस में हुई। एक डरावनी गुफा के मकड़ी के जाले आदि के सीन की्रएट करने में विजय का योगदान रहा। इस दौरान सहायक कला डायरेक्टर के रूप में मराठी फिल्म युद्ध में भी कार्य किया। विजय को पहली बार फिल्म सांसे में गुफा में थर्राने की जिम्मेदारी मिली थी, लेकिन तकदीर ने उसे बाद में बडे पर्दे के मुकाम पर ला दिया।

भोजपूरी फिल्म में अवॉर्ड

इतना ही नहीं अभी- अभी दो माह पहले विजय को भोजपूरी फिल्म में आर्ट डायरेक्टर का किरदार निभाने पर सरिका अवॉर्ड का हकदार भी बना दिया। इस अवॉर्ड के बाद विजय की शोहरत को एक नई पहचान दी। यह अवार्ड फिल्म डार्लिग में बेस्ट डायरेक्टर का सरस के नाम से जनवरी 2024 में मिला है।

विजय से बातचीत

विजय ने इस हिस संवादाता से बातचीत में बताया गुडलक एक कामेडी फिल्म है। जिसमें बतौर आर्ट डायरेक्टर उन्होंने कार्य किया है । इस फिल्म के मुख्य नायक बजेंद्र काला हैं। शूटिंग उज्जैन मे हुई है। मुख्य अभिनेत्री मालती माथुर है। प्रखर श्री वास्तव के निद्रेशन में फिल्म बनी है।आजाद जैन फिल्म के निर्माता है। विजय के मुताबिक यह पारिवारिक मनोरंजन फिल्म है। जिसको परिजनों के साथ बैठकर भरपूर आंनद लिया जा सकता है। फिल्म को देखने पर दर्शकगण हंसी एंव ठहाकों को नहीं रोक पाएंगे।इस फिल्म में एक बुढी महिला की कहानी है, जो कि प्रिगनेट हो जाती है। यह किरदार मालती माथुर ने निभाया है। फिल्म का निर्माण आजाद जैन ने किया है। इस फिल्म का आकर्षण 80 वर्षीय मालती माथुर है। जिन्होंने मुख्य किरदार के रूप में नायक बिजेंद्र काला की मां का रोल किया है।फिल्म उज्जैन एवं इंदौर में बनी है। फिल्म में आजाद जैन, तूलिका बैनर्जी, आशुतोष उपाध्याय, पंकज वाधले सागर शेडे और आयुषी शुक्ला की भी भूमिका है।

हिंदुस्थान समाचार/ कैलाश सनोलिया

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