नागदा से राजभवन तक का सफर, अब केंद्र के फैसले पर टिकी निगाहें

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नागदा से राजभवन तक का सफर, अब केंद्र के फैसले पर टिकी निगाहें


नागदा, 26 जून (हि.स.)। मध्‍य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा निवासी और कर्नाटक के राज्यपाल डॉ. थावरचंद गेहलोत का कार्यकाल आगामी 10 जुलाई को पूरा हो रहा है। इसके साथ ही राजनीतिक गलियारों में उनके भविष्य की भूमिका को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। अब सबकी नजरें केंद्र सरकार के अगले निर्णय पर टिकी हैं कि कर्नाटक में नए राज्यपाल की नियुक्ति होगी, डॉ. गेहलोत को ही आगे जिम्मेदारी मिलेगी या उन्हें कोई अन्य महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा जाएगा।

संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार राज्यपाल का कार्यकाल सामान्य तौर पर पांच वर्ष का होता है, हालांकि नए राज्यपाल की नियुक्ति तक वर्तमान राज्यपाल पद पर बने रह सकते हैं। फिलहाल डॉ. गेहलोत की आगामी जिम्मेदारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

केंद्रीय मंत्री से राज्यपाल तक का सफर

डॉ. थावरचंद गेहलोत को 6 जुलाई 2021 को केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री पद से हटाकर कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। उस समय वे राज्यसभा सदस्य होने के साथ केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। 11 जुलाई 2021 को उन्होंने राज्यपाल पद की शपथ ली थी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केंद्र सरकार राज्यपालों की नियुक्ति और बदलाव को लेकर कभी भी फैसला ले सकती है। ऐसे में डॉ. गेहलोत को कार्यकाल विस्तार, किसी अन्य राज्य की जिम्मेदारी या अन्य महत्वपूर्ण दायित्व मिलने की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है।

नागदा से शुरू हुआ संघर्ष का सफर

डॉ. गेहलोत का पैतृक संबंध नागदा क्षेत्र के रूपेटा गांव से है। उनका परिवार नागदा के मनोहर वाटिका क्षेत्र में निवास करता है। उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत औद्योगिक क्षेत्र में नौकरी और बाद में साइकिल दुकान के व्यवसाय से की। इसके बाद वे जनसंघ के दौर से राजनीति में सक्रिय हुए।

वे पहली बार 1980 में रतलाम जिले की आलोट विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। इसके बाद 1990 और 1993 में भी उन्होंने जीत दर्ज की। सुंदरलाल पटवा सरकार में वे राज्य मंत्री रहे और जल संसाधन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाली।

इसके बाद उन्होंने लोकसभा राजनीति में कदम रखा और शाजापुर सुरक्षित सीट से 1996, 1998, 1999 और 2004 में लगातार चार बार सांसद निर्वाचित हुए। बाद में वे राज्यसभा सदस्य बने और वर्ष 2014 से 2021 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री रहे।

भाजपा संगठन में भी निभाई अहम भूमिका

डॉ. गेहलोत भाजपा केंद्रीय संसदीय बोर्ड के सदस्य रहे हैं और संगठन में राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक पकड़ के कारण उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिना जाता है।

अब डॉ. गेहलोत के सार्वजनिक जीवन का अगला अध्याय क्या होगा, इसका फैसला केंद्र सरकार को करना है। नागदा सहित पूरे मालवा क्षेत्र के लोग भी इस निर्णय का इंतजार कर रहे हैं कि उन्हें नई जिम्मेदारी मिलेगी या वर्तमान दायित्व को ही आगे बढ़ाया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / कैलाश सनोलिया

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