नागदा: ग्रेसिम कंपनी पर अफसर मेहरबान, 44 माह विलंब से भरी टैक्स राशि 3 करोड़ का ब्याज माफ

नागदा: ग्रेसिम कंपनी पर अफसर मेहरबान, 44 माह विलंब से भरी टैक्स राशि 3 करोड़ का ब्याज माफ


नागदा 25 नवंबर (हि.स.)। आम जनता एक निर्धारित समय पर टैक्स या अपनी सरकारी सुविधाओं के बदले राशि को निर्धारित समय पर जमा नहीं करें तो उन से पैनल्टी तो वसूली जाती है, लेकिन उपलब्ध सुविधाओं से भी जनता को वंचित कर दिया जाता है, किन्तु जाने माने बिड़ला घराना के ग्रेसिम उद्योग नागदा पर प्रशासन के अफसर इतने मेहरबान हुए कि 44 माह बाद में विलंब से भरी गई टैक्स राशि पर कोई ब्याज नहीं लिया। वह भी पांच आसान किश्तों में।

बता दें कि ग्रेसिम उद्योग और उसके सहयोगी संस्थान पर परिषद नागदा का बतौर टैक्स 3 करोड़ 5 लाख 94 हजार 260 रूपए बकाया था। जिसको महज दो अफसरों ने मिलकर अनुबंध के तहत इस राशि का ब्याज माफ कर दिया। यह पूरा मामला 2020 का है। यह खुलासा हाल में आरटीआई एक्टिविस्ट कैलाश सनोलिया के सूचना अधिकर में हुआ है। इस प्रकार के प्रमाणिक दस्तावेज हिंदुस्थान समाचार संवाददाता नागदा के पास सुरक्षित है। अनुबंध दस्तावेजों पर बतौर तत्कालीन प्रशासक आशुतोष गौस्वामी एवं तत्कालीन सीएमओं आशफाक मोहम्म्मद खान के हस्ताक्षर है। आशुतोष इन दिनों नागदा के एसडीओं (राजस्व) है। उन्होंने नपा में अनुबंध के समय बतौर प्रशासक जिम्मेदारी निभाई थी। बाद में वे 13 अगस्त 2022 को परिषद के अस्तित्व में आने से नपा परिषद में प्रशासक के कार्य से मुक्त हुए।

उधर, उद्योग पक्ष की और से अनुंबंध पर ग्रेसिम के वरिष्ठ उपाध्यक्ष(फायनेंस) महावीर जैन ने हस्ताक्षर किए है। अन्य उद्योग की और से महावीर जैन को हस्ताक्षर के लिए अधिकृत करने की बात अभिलेख में हैं। अन्य संस्थानों के नाम लैंक्सेस, ग्रेसिम केमिकल डिवीजन, गुलब्रांड कैटिलिस्ट, डायमंड क्लोरिन, एवं क्लीरेंट केमिकल आफ इंडिया बतौर पार्टी थे। इन सबकी और से महावीर जैन को अधिकृत किया गया।

क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी

इतनी बड़ी रकम का ब्याज माफ करने की पुष्टि अनुबंध पर हस्ताक्षर करने वाले तत्कालीन नपा प्रशासक एवं वर्तमान में एसडीएम गोस्वामी ने की है, हालांकि उन्होंने तर्क दिया कि कोरोना काल के कारण ऐसा किया। जब उन्होंने यह बताया गया कि यह तो कोरोना के पहले वर्ष 2017 का मामला है। इसी प्रकार मुख्य नपा अधिकारी सीएस जाट का कहना हैकि यह अनुबंध जब हुआ तब वे यहां पदस्थ नहीं थे। पूर्व सीएमओ के कार्यकाल का मामला है।

इस समझौते में मप्र शासन और ग्रेसिम उद्योग के बीव अरबों की एक भूमि विवाद का उल्लेख भी बडी चतुराई के साथ किया गया। शासन एवं उद्योग के बीच एक विवाद प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है जिसका का भी संदर्भ दिया गया। यहां विवाद लगभग 195 हैक्टर भूमि का है। मतलब सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय इस समझौते पर प्रभावी होगा। इस मान से लगभग 37 लाख का नुकसान जनता की तिजौरी में हुआ।

हिन्दुस्थान समाचार /कैलाश सनोलिया

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