रिश्तों का कत्ल: सौतेले पिता ने किया दुष्कर्म, मां ने दिया साथ, दोनों को 20-20 साल की सजा

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रिश्तों का कत्ल: सौतेले पिता ने किया दुष्कर्म, मां ने दिया साथ, दोनों को 20-20 साल की सजा


अशोकनगर, 19 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के शाढौरा थाना क्षेत्र में नाबालिग के साथ दुष्कर्म और अपराध में सहयोग के एक गंभीर मामले में न्यायालय ने गुरूवार को कड़ा फैसला सुनाते हुए सौतेले पिता और सगी मां दोनों को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

अंधेरी रात और रिश्तों का विश्वासघात:

गुरुवार को पुलिस से मिली जानकारी अनुसार यह खौफनाक दास्तां 15 सितंबर 2024 की रात शुरू हुई। आरोपी पिता ने साजिश के तहत अपनी पत्नी को मायके भेज दिया और घर में अकेली 11 साल की मासूम को अपनी हवस का शिकार बनाया। दरिंदगी यहीं नहीं रुकी, मासूम को जुबान खोलने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई।

जब ममता बनी तमाशबीन:

हैरानी और शर्मिंदगी की पराकाष्ठा तब हुई जब पीडि़ता ने अपनी आपबीती सगी मां को सुनाई। एक मां, जिसे अपनी बेटी की ढाल बनना था, उसने लोक-लाज और आरोपी का साथ देते हुए मासूम का मुंह बंद रखने का दबाव बनाया। लेकिन 11 साल की उस नन्ही जान ने हार नहीं मानी और समाज के ठेकेदारों के डर को दरकिनार कर पुलिस की चौखट तक पहुँच गई।

जांच का चक्रव्यूह डीएनए ने खोली पोल:

तत्कालीन थाना प्रभारी नरेंद्र त्रिपाठी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए न केवल त्वरित कार्रवाई की, बल्कि वैज्ञानिक साक्ष्यों का सहारा लिया। मेडिकल परीक्षण और डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट ने आरोपियों के झूठ की परतें उधेड़ दीं। सूक्ष्म जांच में यह साफ हो गया कि इस घिनौने अपराध में मां की चुप्पी महज डर नहीं, बल्कि अपराधी का साथ देना था।

अदालत की तल्ख टिप्पणी: समाज के लिए कलंक

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने तल्ख रुख अपनाते हुए कहा माता-पिता जैसे संरक्षकों द्वारा एक अबोध बालिका के साथ किया गया यह कृत्य अत्यंत जघन्य, अमानवीय और विरलतम श्रेणी का है। यह समाज के नैतिक पतन की पराकाष्ठा है।

अदालत ने दोनों दोषियों को 20-20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाकर यह कड़ा संदेश दिया है कि रिश्तों की आड़ में किए गए गुनाह कभी बख्शे नहीं जाएंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार

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