मुन्ना भाई डॉक्टरों का भंडाफोड़, शाही दवाखाने की आड़ में चल रहा था फर्जीवाड़ा

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मुन्ना भाई डॉक्टरों का भंडाफोड़, शाही दवाखाने की आड़ में चल रहा था फर्जीवाड़ा


मुन्ना भाई डॉक्टरों का भंडाफोड़, शाही दवाखाने की आड़ में चल रहा था फर्जीवाड़ा


मुन्ना भाई डॉक्टरों का भंडाफोड़, शाही दवाखाने की आड़ में चल रहा था फर्जीवाड़ा


अशोकनगर, 09 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के बहादुरपुर कस्बे में पिछले छह महीनों से लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे फर्जी डॉक्टरों के गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। कथित डॉक्टर शाही दवाखाना के नाम से हर गुरुवार को कैंप लगाते थे।

हैरानी की बात यह है कि इन झोलाछाप डॉक्टरों के पास केवल जिले से ही नहीं, बल्कि सागर, विदिशा, ललितपुर, झांसी और गुना से भी मरीजों की लंबी कतारें लगती थीं।

पत्रकार की सजगता से गिरा फर्जी साम्राय:

इस पूरे गोरखधंधे का अंत एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुआ। पोस्ट वायरल होते ही प्रशासन हरकत में आया और सेक्टर मेडिकल ऑफिसर डॉ. यशवंत सिंह तोमर ने पुलिस बल के साथ मौके पर छापा मारा। कार्रवाई का नतीजा यह रहा कि पुलिस को देखते ही भगदड़ मच गई। जिनमें दो युवक, मोहम्मद सलमान और मोहम्मद नदीम (निवासी मुरादाबाद, यूपी) धरे गए। वहीं गिरोह का मुख्य सरगना और एक अन्य साथी मौके से भागने में सफल रहा।

इलाज के नाम पर भभूत और नशा:

जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। ये फर्जी डॉक्टर कमर दर्द, साइटिका, स्लिप डिस्क और सांस की बीमारियों का सस्ता इलाज करने का दावा करते थे। प्रति मरीज फीस 200 से 500 रुपये की वसूली होती थी। एलोपैथिक दवाओं के साथ मरीजों को भभूत की पुडिय़ा दी जाती थी। वहीं कुछ मरीजों ने दबी जुबान में बताया कि इस भभूत को खाने के बाद हल्का नशा महसूस होता था। प्रशासन ने भभूत के सैंपल जांच के लिए लैब भेज दिए हैं।

कागजों में डॉ. तोमर हकीकत में कोई और!

फर्जीवाड़े की हद तो यह थी कि इलाज के पर्चों पर डॉ. यूपीएस तोमर का नाम छपा था, जबकि मौके पर मौजूद सभी युवक दूसरे समुदाय के थे।

आरोपियों के पास न तो कोई मेडिकल डिग्री मिली और न ही कोई रजिस्ट्रेशन। इनके मोबाइलों में भी पहचान का कोई पुख्ता सबूत नहीं था; बाद में व्हाट्सएप पर मंगाए गए आधार कार्डों के आधार पर केस दर्ज किया गया।

अंधविश्वास या मजबूरी? मरीजों ने किया चक्काजाम:

जब पुलिस इन जालसाजों को पकडक़र ले जा रही थी, तो एक अजीब नजारा देखने को मिला। दूर-दराज से आए मरीजों ने कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। महिलाओं ने सडक़ पर बैठकर प्रदर्शन किया और यातायात बाधित कर दिया। मरीजों का तर्क था कि हमें सस्ता इलाज मिल रहा है और आराम है, तो सरकार को क्या दिक्कत है? हालांकि, पुलिस ने समझाइश देकर जाम खुलवाया और पकड़े गए आरोपियों पर धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार

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