इंदौर के पास तैयार हो रहा वीकेंड पिकनिक और जंगल कैंपिंग डेस्टिनेशन
- मुंह में घुल जाने वाली मिठाई के लिए प्रसिद्ध है कालाकुंड, आदर्श पर्यटन गांव में बारहमासी सड़क हुई तैयार
इंदौर, 12 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर से 20 किमी दूर स्थित कालाकुंड अपनी प्राकृतिक वादियों और शांत आदिवासी गांव अपनी अनोखी मिठाई कलाकंद के लिए प्रसिद्ध है। साथ ही यह वीकेंड पिकनिक और जंगल कैंपिंग डेस्टिनेशन के लिए पर्याप्त विशेषता वाले आदर्श पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित हो रहा है।
घने और वन औषधियों से भरे जंगल को बचाते हुए यहां मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (एमपीआरआरडीए) द्वारा लगभग 10 किमी.की सड़क का काम पूरा किया जा चुका है। यहां की सौंदर्य को निखारने वाले नदी पर ब्रिज नहीं बनने से पहाड़ी नदी के कारण कई दुर्घटनाएं हो चुकी है, इस कारण यहां पर्यटक आने से बचते है।
एमपीआरआरडीए के महाप्रबंधक लोकेंद्र मंडलोई ने सोमवार को जानकारी देते हुए बताया कि वन औषधियों से भरपूर इस क्षेत्र के घने जंगल को बचाते हुए सड़क का निर्माण कार्य वर्ष 2024 में पूरा हुआ। इसी साल 30 मई को इसी गांव में कलेक्टर शिवम वर्मा ने रात्रि चौपाल लगाई थी। इस दौरान ग्रामीणों की पहली सबसे अहम मांग ब्रिज निर्माण की थी। इस मांग को पूरा करने के लिए निविदा प्रक्रिया चल रही है। अब इसी वर्ष यहां ब्रिज का निर्माण प्रारंभ करने की स्थिति तक पहुँच गए हैं।
पर्यटकों के लिए हेरिटेज ट्रैन के अलावा सड़क मार्ग भी होगा विकल्प
उन्होंने बताया कि विंध्यांचल पर्वत श्रेणी की पहाड़ियों के बीच बसे 7 से अधिक आदिवासी गांवों में 20 से अधिक होम स्टे बने हुए है। यहां बड़ी संख्या में पर्यटक ग्रामीण परिवेश की जीवन चर्चा का आनंद की अनुभूति का अहसास करने पहुंचते है। यहां के लिए पातालपानी से हेरिटेज ट्रेन से पर्यटक तो आते ही है, लेकिन जो अपने निजी चार पहिया वो दो पहिया वाहन से ब्रिज नहीं होने से बारिश में पहुंच नहीं पाते। इसके अलावा ग्रामीण आदिवासियों का बारिश में शहर से संपर्क कट जाता है। ऐसे के ब्रिज बनने से बड़ी आबादी भी इस विकल्प का उपयोग कर पाएगी।
गाय और भैंस के दूध बनी कलाकंद विशेष आकर्षण
कालाकुंड गांव के कई गाय और भैंस पशुपालक कलाकंद बनाने में जुटे है। गाय और भैंस के शुद्ध दूध व कम शक्कर से पारंपरिक तरीके बनने वाली दानेदार कलाकंद मुंह में घुल जाने वाली मिठाई है। इस गांव को आदर्श पर्यटन ग्राम बनाने की दिशा में शासन प्रशासन द्वारा लंबे प्रयास से किए जा रहे है। घने जंगल और वनौषधियों को बचाते हुए, यहां बारह मासी सड़क का निर्माण कर लिया गया है।
आंगनवाड़ियों, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और राशन दुकानों तक ग्रामीणों की पहुंच होगी आसान
विभाग के महाप्रबंधक मंडलोई ने बताया कि चार ब्रिज बनने से यहां पहाड़ियों में बसे 8 गांवों के ग्रामीणों की पहुंच स्वास्थ्य केंद्र के अलावा स्कूल, आंगनवाड़ियों और राशन दुकानों तक पहुंच सुगमता से हो सकेंगीं। पहाड़ी नदी चोरल कभी भी बारिश होने मार्ग अवरुद्ध कर देती है। इससे हर समय आवागमन बाधित होता रहा है। यहाँ एक संभागीय स्काउट गाइड का कैंपिंग केंद्र भी बना है। जिसका समुचित उपयोग भी संभावित है। मंडलोई ने बताया कि 4 ब्रिजों के निर्माण के लिए निविदाओं की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। इसी वर्ष निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जायेगा।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

