विदिशाः नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का 6 दिवसीय इंडक्शन प्रशिक्षण प्रारंभ
विदिशा, 20 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के क्षमता विकास एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से सोमवार को 6 दिवसीय इंडक्शन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी विनीता लोढ़ा के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण के प्रथम बैच में जिले की 40 नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भाग ले रही हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य नवचयनित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) की अवधारणा, विभागीय योजनाओं, पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी विषयों तथा मैदानी कार्यों के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराना है, ताकि वे अपने कार्यक्षेत्र में महिलाओं, बच्चों एवं किशोरियों को बेहतर सेवाएं प्रदान कर सकें।
प्रशिक्षण के प्रथम दिवस पर प्रतिभागियों को आईसीडीएस की अवधारणा एवं उद्देश्यों, शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु अनुपात, कुपोषण के कारण एवं प्रकार, पोषण ट्रैकर एप के प्रभावी उपयोग, आंगनवाड़ी केन्द्रों के संचालन, तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, पर्यवेक्षक एवं परियोजना अधिकारी की भूमिका एवं उत्तरदायित्वों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। साथ ही समुदाय आधारित सेवाओं, पोषण जागरूकता एवं बच्चों के सर्वांगीण विकास में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
प्रशिक्षण में विदिशा शहरी, विदिशा ग्रामीण, गंज बासौदा एवं त्योंदा परियोजनाओं की नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहभागिता कर रही हैं। आगामी दिनों में उन्हें प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई), ग्रोथ मॉनिटरिंग, गृह भ्रमण, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा, विभिन्न विभागीय योजनाओं, अभिलेख संधारण, डिजिटल रिपोर्टिंग तथा समुदाय आधारित व्यवहार परिवर्तन संबंधी विषयों पर व्यवहारिक एवं सहभागितापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के मुख्य प्रशिक्षकों में महिला एवं बाल विकास विभाग से अरविन्द मिश्रा, पर्यवेक्षक नीतू सोनी, सीमा शर्मा, संगीता सूर्यवंशी, नाहिद सुल्ताना एवं नेहा रघुवंशी शामिल हैं। विभाग का उद्देश्य इस प्रशिक्षण के माध्यम से नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दक्ष, संवेदनशील एवं उत्तरदायी बनाना है, जिससे जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण तथा प्रारंभिक बाल विकास सेवाओं की गुणवत्ता में और अधिक सुधार सुनिश्चित किया जा सके।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

