मप्र में यूसीसी पर सियासी घमासान, रामेश्वर शर्मा के ‘5 बीवी-25 बच्चे’ वाले बयान से गरमाई बहस, कांग्रेस का पलटवार
भोपाल, 08 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सियासत तेज हो गई है। डॉ. मोहन यादव द्वारा दिवाली तक इसे लागू करने के संकेत दिए जाने के बाद भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। बयानबाजी के बीच मुद्दा अब राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है।
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने मुख्यमंत्री के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि यूसीसी देश में बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए जरूरी है। उन्होंने विवादित बयान देते हुए कहा कि “एक कौम 5 बीवी और 25 बच्चे पैदा कर आबादी का संकट खड़ा कर रही है।” रामेश्वर शर्मा ने तर्क दिया कि जब देश में सभी को समान शिक्षा, रोजगार और योजनाओं का लाभ चाहिए, तो कानून भी सभी के लिए एक समान होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि “बच्चे दो ही अच्छे” का नारा देने वाली पार्टी को यूसीसी का समर्थन करना चाहिए।
आरिफ मसूद का पलटवार, सरकार की मंशा पर सवाल
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भाजपा के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के असली मुद्दों- जैसे गैस और खाद की कमी—से ध्यान भटकाने के लिए यूसीसी का मुद्दा उठा रही है। मसूद ने सवाल उठाया कि अगर आदिवासियों को इस कानून से बाहर रखा जाएगा, तो “यूनिफॉर्म” कैसे रहेगा? उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट किया जाए कि क्या सरकार केवल एक समुदाय को निशाना बनाना चाहती है।
‘ज्यादा बच्चे’ बयान पर सियासी वार-पलटवार
रामेश्वर शर्मा के बयान पर मसूद ने कहा कि एक तरफ जनसंख्या नियंत्रण की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ नेता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोग अधिक बच्चे पैदा करने की बात करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह दोहरा मापदंड है और सवाल किया कि क्या केवल एक वर्ग को ही निशाना बनाया जा रहा है।
सरकार की तैयारी, विपक्ष की आपत्ति
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यूसीसी लागू करने से पहले अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि उत्तराखंड, गुजरात और असम के कानूनों का अध्ययन कर राज्य में प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने की तैयारी भी चल रही है। वहीं कांग्रेस ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर सभी वर्गों की सहमति जरूरी है, खासकर आदिवासी समाज की परंपराओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
संभावना जताई जा रही है कि राज्य सरकार विधानसभा के आगामी सत्र में यूसीसी से जुड़ा विधेयक पेश कर सकती है। फिलहाल, यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है और आने वाले दिनों में इस पर बहस और तेज होने के संकेत हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

