मप्रः बैतूल में पारदी दंपत्ति हत्याकांड मामले में पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे सहित 14 लोग दोषमुक्त
- एमपी-एमएलए कोर्ट ने सुनाया फैसला
भोपाल, 13 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में मुलताई तहसील अंतर्गत ग्राम चौथिया में वर्ष 2008 में हुए पारदी दंपत्ति हत्याकांड के मामले में शुक्रवार को भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट (सांसद/विधायक विशेष अदालत) ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कांग्रेस सरकार में पीएचई मंत्री रहे पूर्व विधायक सुखदेव पांसे तथा वर्तमान जिला पंचायत बैतूल के अध्यक्ष राजा पवार सहित 14 लोगों को दोषमुक्त कर दिया गया है।
यह फैसला 21वें अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (एमपी एवं एमएलए) स्वयं प्रकाश दुबे की अदालत ने सुनाया। अदालत ने हत्या, आगजनी और दंगा भड़काने से जुड़े आरोपों में पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के आधार पर सुखदेव पांसे समेत 14 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
घटनाक्रम के अनुसार वर्ष 2008 में मुलताई के पास चौथिया ग्राम में स्थित पारदी समुदाय के डेरे में आगजनी, तोड़फोड़ सहित अन्य हिंसक घटनाएं हुईं थीं। समय बड़ी भीड़ ने पारदी बस्ती पर हमला कर करीब 62 मकानों को आग के हवाले कर दिया था। घटना के बाद इलाके में काफी तनाव की स्थिति बन गई थी। इस घटना के दौरान पारदी समुदाय के बोंदरु पारदी और उसकी पत्नी का शव कुएं में पाए गए थे। पुलिस ने विवेचना के बाद 16 ग्रामीणों पर हत्या का प्रकरण दर्ज किया गया था।
मामले में पीड़ित पक्ष के आलस्य पारदी ने पुलिस कार्रवाई से असंतुष्ट होकर मप्र उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इसके बाद 7 अगस्त 2009 को उच्च न्यायालय ने पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। जांच के दौरान सीबीआई ने जबलपुर स्थित विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 82 लोगों को आरोपी बनाया गया। चार्जशीट में कुछ अधिकारियों और राजनेताओं के नाम भी शामिल किए गए थे और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी।
मामले में वर्ष 2018 में सीबीआई सत्र न्यायालय जबलपुर की जज माया विश्वालाल ने मामले में प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलने पर कांग्रेस के प्रदेश महासचिव और पूर्व विधायक सुखदेव पांसे, भाजपा के जिला पंचायत सदस्य राजा पवार, तत्कालीन एसडीओपी डीएस साकल्ले कचरू सरपंच, सुरेश सरपंच, विजय डॉक्टर, संदीप साबले, उमेश डांगे सहित 16 लोगों के खिलाफ प्रथम दृष्टया हत्या में शामिल होने के आधार पर सम्मन जारी करने के निर्देश दिए थे। न्यायालय में प्रकरण के विचारण के दौरान बीते 18 साल में दो आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है। शुक्रवार को मामले की भोपाल स्थित विशेष अदालत में हुई। आरोपियों की ओर से अधिवक्ता वीके सक्सेना और संजय रावत ने पैरवी की। फैसले के बाद दोनों नेताओं के समर्थकों ने इसे सत्य की जीत बताते हुए खुशी जाहिर की।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

