मप्रः बालाघाट में मीजल्स एवं मलेरिया से प्रभावित क्षेत्रों की राज्य स्तरीय दल ने की वृहद समीक्षा

WhatsApp Channel Join Now
मप्रः बालाघाट में मीजल्स एवं मलेरिया से प्रभावित क्षेत्रों की राज्य स्तरीय दल ने की वृहद समीक्षा


- 20 अगस्त से चलाया जाएगा मीजल्स-रूबेला कैचअप अभियान

भोपाल, 17 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी इलाकों में आठ बच्चों की रहस्मयी बीमारी से हुई मौत के बाद प्रभावित क्षेत्रों में मीजल्स एवं मलेरिया के प्रकरणों स्वास्थ्य आयुक्त धनराजू एस की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय राज्य स्तरीय दल ने 13 से 15 अगस्त 2026 तक जिले का सघन भ्रमण कर जांच की।

जनसम्पर्क विभाग द्वारा सोमवार को जानकारी दी गई कि राज्य स्तरीय दल ने प्रभावित ग्रामों का दौरा कर स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लिया और मृत्यु के प्रकरणों के कारणों की विस्तृत समीक्षा की। प्रभावित क्षेत्रों में रोग नियंत्रण, जांच, उपचार, सर्वेलेंस एवं टीकाकरण की गतिविधियों को तेज करते हुए सभी संबंधित विभागों को समन्वित एवं प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण की स्थिति की विशेष निगरानी तथा प्रभावित क्षेत्रों में निरंतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है।

दल में उपसंचालक आई.डी.एस.पी. डॉ. आश्विन भागवत, उपसंचालक/राज्य कार्यक्रम अधिकारी व्ही.बी.डी.सी.पी. डॉ. हिमांशु जायसवार, उपसंचालक असंचारी रोग नियंत्रण डॉ. आशीष सक्सेना, और डॉ. सौरभ पुरोहित, उपसंचालक टीकाकरण शामिल रहे।

मास कैंप आयोजित कर जांच और वैक्टर नियंत्रण की कार्यवाही

राज्य स्तरीय दल द्वारा 14 अगस्त को प्रभावित ग्रामों का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया गया। बालाघाट जिले के बिरसा विकासखण्ड जिले का सर्वाधिक एन्डेमिक ब्लॉक है। पूर्व वर्षों के ट्रेंड के अनुसार जिले में जुलाई माह की शुरुआत से ही मलेरिया एवं बुखार के प्रकरणों में वृद्धि देखी जाती है। 17 जुलाई 2026 से बिरसा विकासखण्ड के तीन ग्राम बोंदारी, कोरका एवं कुंडेकासा में बुखार के रोगियों की संख्या में वृद्धि की सूचना प्राप्त हुई थी। ये सभी प्रभावित ग्राम सोनगुड्डा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के अंतर्गत संचालित 05 उप स्वास्थ्य केन्द्रों के क्षेत्र में आते हैं। इसकी सूचना जिले को प्राप्त होने के बाद स्थानीय स्तर पर मास कैंप आयोजित कर जांच तथा वैक्टर नियंत्रण की कार्यवाही प्रारंभ की गई।

32 हजार 400 संभावित रोगियों की जांच

एक जुलाई से 14 अगस्त 2026 के मध्य विभिन्न ग्रामों में कुल 32 हजार 400 संभावित बुखार के रोगियों की जांच की गई। प्रभावित क्षेत्रों में नियंत्रण गतिविधियां प्रारंभ की गईं तथा जांच के दौरान पाए गए गंभीर रोगियों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय रेफर किया गया।

आईसीएमआर एवं एनआईवी की जांच में मीजल्स की पुष्टि

आईसीएमआर एवं अन्य संस्थानों द्वारा की गई जांच में प्रभावित क्षेत्र के बच्चों में मीजल्स रोग की पुष्टि हुई है। नियमित टीकाकरण से छूटे बच्चों में मीजल्स संक्रमण पाया गया। एनआईवी पुणे द्वारा की गई जांच में चांदीपुरा वायरस, वेस्ट नाइल फीवर वायरस तथा जापानीज एनसेफेलाइटिस वायरस सहित विभिन्न वायरस की जांच नेगेटिव पाई गई। जांच एवं उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर बच्चों में हुई मृत्यु के प्रमुख कारणों में मलेरिया एवं मीजल्स संक्रमण पाया गया है।

20 अगस्त से मीजल्स-रूबेला कैचअप अभियान

स्थिति की समीक्षा के बाद राज्य स्तरीय दल द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है। प्रभावित क्षेत्र में 20 अगस्त से मीजल्स-रूबेला अभियान प्रारंभ किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत 09 माह से 10 वर्ष तक के सभी बच्चों को मीजल्स-रूबेला वैक्सीन की अतिरिक्त खुराक दी जाएगी। अभियान की शुरुआत सर्वाधिक प्रभावित एवं उच्च प्राथमिकता वाले विकासखण्डों से की जाएगी। बैहर, बिरसा एवं परसवाड़ा विकासखण्ड में 20 से 25 अगस्त 2026 तक एमआर कैचअप राउंड संचालित किया जाएगा।

कुपोषित बच्चों का पुनः परीक्षण एवं उपचार

सोनगुड्डा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र क्षेत्र में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत सभी बच्चों का पुनः परीक्षण कराया जाएगा तथा अतिकुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती कर उपचार सुनिश्चित किया जाएगा। विकासखण्ड में निर्धारित मात्रा में टेक होम राशन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ सभी आंगनवाड़ियों में नियमित रूप से गर्म एवं पका हुआ पोषण आहार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रभावित बच्चों को पृथक रखने के निर्देश

समस्त आंगनवाड़ियों, विद्यालयों एवं आदिवासी छात्रावासों में संक्रमित एवं प्रभावित बच्चों को सामान्य बच्चों से पृथक रखा जाएगा। संक्रमित एवं प्रभावित बच्चों को घर पर रखने तथा आवश्यकतानुसार आइसोलेट करने की सलाह दी जाएगी। इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग, आदिम जाति कल्याण विभाग एवं स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा समन्वित कार्रवाई की जाएगी। सभी प्रभावित क्षेत्रों में आउटरीच सर्वेलेंस कैंप आयोजित कर नियमित पर्यवेक्षण किया जाएगा। ग्रामीण विकास एवं राजस्व विभाग द्वारा इस कार्य में सहयोग किया जाएगा। प्रभावित क्षेत्रों में पशुजनित रोगों का भी सर्वेलेंस किया जाएगा। पेयजल की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करते हुए आमजन को क्लोरीन की गोलियां वितरित की जाएंगी।

संचारी एवं असंचारी रोगों से बचाव एवं रोकथाम के उपायों और स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। छात्रावासों के विद्यार्थियों के माध्यम से आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उनके ग्रामों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया जाएगा। स्कूलों, छात्रावासों एवं आंगनवाड़ियों में ओआरएस पैकेट एवं जिंक टैबलेट की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। प्रभावित क्षेत्र के लोगों को स्थानीय स्तर पर ही जांच, उपचार एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएँ के जायेंगी। समस्त संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करते हुए प्रभावित क्षेत्रों में निरंतर निगरानी एवं आवश्यक स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता तथा रोग नियंत्रण गतिविधियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

Share this story