शिवपुरी में 26 हजार से अधिक ड्रॉपआउट बच्चों का मामला आया सामने, बाल आयोग ने जताई चिंता

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शिवपुरी में 26 हजार से अधिक ड्रॉपआउट बच्चों का मामला आया सामने, बाल आयोग ने जताई चिंता


शिवपुरी में 26 हजार से अधिक ड्रॉपआउट बच्चों का मामला आया सामने, बाल आयोग ने जताई चिंता


शिवपुरी, 21 अक्टूबर (हि.स.)। मध्यप्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने बुधवार को शिवपुरी प्रवास के दौरान कलेक्ट्रेट सभागृह में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ जिला स्तरीय समन्वय बैठक की। बैठक में बाल अधिकारों के संरक्षण, बाल श्रम की रोकथाम, स्कूल छोड़ चुके बच्चों की शिक्षा में पुनर्वापसी, गुमशुदा बच्चों की तलाश, बाल भिक्षावृत्ति पर अंकुश तथा छात्रावासों एवं बाल देखरेख संस्थाओं की व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।

बैठक में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, जिले में लगभग 26,186 बच्चे स्कूल से बाहर हैं। इनमें कक्षा 1 से 8 तक के 6,186 और कक्षा 9 से 12 तक के 20 हजार बच्चे शामिल बताए गए। आयोग की अध्यक्ष ने संबंधित विभागों को बच्चों के हित में समन्वित प्रयास करने और बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

बाल श्रम की आशंका वाले स्थानों पर हो संयुक्त जांच

बैठक में डॉ. निवेदिता शर्मा ने बाल श्रम की रोकथाम को प्राथमिकता देते हुए कहा कि जिले में ऐसे स्थानों को चिह्नित किया जाए, जहां बच्चों से काम कराए जाने की आशंका है। उन्होंने संबंधित विभागों को संयुक्त रूप से जांच अभियान चलाने और बाल श्रम पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज कराने सहित आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

उन्होंने ईंट-भट्ठों, भूसा भरने वाले स्थानों, मूंगफली मिलों तथा अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर विशेष निगरानी रखने की आवश्यकता बताई। साथ ही श्रम विभाग को सक्रियता के साथ कार्य करते हुए बाल श्रम की रोकथाम के लिए नियमित जांच और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

26,186 बच्चों की शिक्षा में वापसी बड़ी चुनौती

बैठक में स्कूल से बाहर बच्चों की संख्या पर विशेष चिंता व्यक्त की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले में लगभग 26,186 बच्चे ड्रॉपआउट की श्रेणी में हैं। इनमें कक्षा 9 से 12 तक के 20 हजार तथा कक्षा 1 से 8 तक के 6,186 बच्चे शामिल हैं।

आयोग की अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि विद्यालयों में लगातार 30 दिन तक अनुपस्थित रहने वाले बच्चों की सूची तैयार की जाए। इसके बाद उनके माता-पिता और अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों के विद्यालय नहीं आने के कारणों का पता लगाया जाए तथा उन्हें दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास किए जाएं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों का विद्यालय से दूर होना केवल शिक्षा विभाग का विषय नहीं है, बल्कि इसके लिए विभिन्न विभागों को मिलकर काम करना होगा। स्कूल छोड़ चुके बच्चों की शिक्षा पुनः प्रारंभ कराने के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाने पर भी जोर दिया गया।

दिव्यांग बच्चों के लिए सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश

बैठक में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा और सुविधाओं का मुद्दा भी उठाया गया। डॉ. शर्मा ने कहा कि विद्यालयों, कोचिंग संस्थानों, आश्रमों और छात्रावासों में दिव्यांग बच्चों की आवश्यकताओं के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए।

उन्होंने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए सुलभ शैक्षणिक वातावरण तैयार करने और उनकी शिक्षा में आने वाली बाधाओं को दूर करने पर जोर दिया। साथ ही सामाजिक न्याय विभाग की ओर से बच्चों के हित में किए जा रहे कार्यों की जानकारी भी मांगी गई।

गुमशुदा बच्चों के मामलों में संवेदनशीलता बरतने पर जोर

बैठक में पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर जिले में गुमशुदा बच्चों की स्थिति की समीक्षा की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 164 बालिकाओं और 30 बालकों के गुमशुदा होने के मामले सामने आए। बैठक में कुछ बच्चों की बरामदगी की जानकारी भी दी गई।

आयोग की अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि गुमशुदा बच्चों की तलाश के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएं। बरामद बच्चों के पुनर्वास और परिवार में पुनर्स्थापन की प्रक्रिया में बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की भूमिका सुनिश्चित की जाए। बच्चों को उनके माता-पिता या अभिभावकों के सुपुर्द करने से पहले आवश्यक प्रक्रिया का पालन करने तथा उनके हितों को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में पॉक्सो अधिनियम से जुड़े मामलों की समीक्षा के दौरान पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 26 मामलों का उल्लेख किया गया। हालांकि, इन मामलों की प्रकृति और अवधि के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई।

बाल भिक्षावृत्ति रोकने के लिए चलेगा अभियान

डॉ. शर्मा ने बाल भिक्षावृत्ति की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर भीख मांगते पाए जाने वाले बच्चों की पहचान कर नियमानुसार रेस्क्यू किया जाए। इसके बाद बच्चों के पुनर्वास, शिक्षा और परिवार की परिस्थितियों का आकलन करते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

उन्होंने बाल भिक्षावृत्ति के पीछे मौजूद परिस्थितियों को समझने और बच्चों को दोबारा इस स्थिति में जाने से रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया।

छात्रावासों में सामान्य विद्यालयों जैसी सुविधाएं हों

बैठक में छात्रावासों और मदरसों की व्यवस्थाओं पर भी चर्चा हुई। आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि इन संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

उन्होंने बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, खेलकूद की व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। साथ ही छात्रावासों में बच्चों की देखभाल और सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की बात कही।

डॉ. शर्मा ने यह भी निर्देशित किया कि बाल देखरेख संस्थाओं और छात्रावासों में कार्यरत कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन सुनिश्चित किया जाए, ताकि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मानकों का पालन हो सके।

लाडली बहना योजना और नर्सरी स्कूलों की मान्यता पर भी चर्चा

बैठक में लाडली बहना योजना से संबंधित विषय पर भी चर्चा हुई। आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ दिलाने के प्रयास किए जाएं और कोई पात्र महिला छूटने न पाए।

इसके अतिरिक्त नर्सरी एवं किड्स गार्डन संचालित करने वाले विद्यालयों की मान्यता का मुद्दा भी उठाया गया। उन्होंने संबंधित विभागों से ऐसे संस्थानों की स्थिति की जांच करने और लागू नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

एक दिवसीय प्रवास पर पहुंचीं थीं आयोग अध्यक्ष

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, डॉ. निवेदिता शर्मा बुधवार दोपहर 12 बजे शिवपुरी स्थित सर्किट हाउस पहुंचीं। इसके बाद उन्होंने कलेक्ट्रेट सभागृह में विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं संबंधित पक्षकारों के साथ जिला स्तरीय समन्वय बैठक की। बैठक में बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों की समीक्षा की गई। इसके बाद आयोग अध्यक्ष श्योपुर के लिए रवाना हो गईं।

बैठक का मुख्य संदेश स्पष्ट रहा कि बाल श्रम की रोकथाम, स्कूल से बाहर बच्चों की शिक्षा में वापसी, गुमशुदा बच्चों का संरक्षण और बाल देखरेख संस्थाओं में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा।

बैठक में प्रमुख रूप से जिला कार्यक्रम अधिकारी धीरेंद्र सिंह जादौन ने विभागीय योजनाओं एवं उनके क्रियान्वयन की जानकारी प्रस्तुत की। इस दौरान जिला शिक्षाधिकारी आकाश यादव, डी पी सी दफेदार सिंह सिकरवार, श्रम निरीक्षक वृन्दावन ,मंगलम संस्था के अधीक्षक, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड से श्रीमती सरला वर्मा, रंजीत गुप्ता, पुलिस विभाग से सी एस पी, सामाजिक न्याय विभाग शशांक विरही, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा बालगृह के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / युगल किशोर शर्मा

Livevns.news Desk
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