मप्र में उन्नत पैकेजिंग एवं परीक्षण, सुदृढ़ फैबलेस इको सिस्टम तथा सेमी कंडक्टर विनिर्माण के विकास पर हुआ मंथन
भोपाल, 23 अक्टूबर (हि.स.)। इंदौर में आयोजित मध्य प्रदेश सेमी कंडक्टर समिट–2026 में शुक्रवार को विभिन्न उद्योगपतियों एवं सेमी कंडक्टर क्षेत्र के विशेषज्ञों की सहभागिता से तीन विषयों पर पैनल डिस्कशन हुआ। इनमें मध्य प्रदेश को उन्नत पैकेजिंग एवं परीक्षण का केंद्र बनाने, प्रदेश में सुदृढ़ फैबलेस इको सिस्टम के निर्माण तथा सेमी कंडक्टर विनिर्माण एवं आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
विशेषज्ञों ने चिप डिजाइन से लेकर उत्पाद विकास, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग एवं परीक्षण तक संपूर्ण मूल्य शृंखला के विकास के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं पर अपने विचार रखे। डिस्कशन में औद्योगिक अधोसंरचना, अनुकूल नीतियों, वित्तीय संसाधनों, बाजार की उपलब्धता, उद्योग एवं शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग तथा उन्नत अनुसंधान एवं कौशल विकास की आवश्यकता प्रमुखता से रखी गई।
उन्नत पैकेजिंग एवं परीक्षण के लिए अधोसंरचना और स्थानीय क्षमताओं के विकास पर जोर
“मध्य प्रदेश को उन्नत पैकेजिंग एवं परीक्षण का केंद्र बनाना” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा का संचालन टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष चरण गुरुमूर्ति ने किया। डिस्कशन में विशेषज्ञों ने प्रदेश में उद्योग स्थापना के लिए उपलब्ध सुविधाओं, तकनीकी संस्थानों, नीतिगत सहयोग तथा पैकेजिंग उद्योग की आवश्यकताओं पर विचार रखे।
पारस सेमी कंडक्टर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संतोष कुमार ने कहा कि मध्यप्रदेश सेमी कंडक्टर उद्योग की स्थापना के लिए आदर्श स्थल है। इंदौर–उज्जैन कॉरिडोर को सेमी कंडक्टर जोन के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां कार्गो एवं लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के साथ संयंत्र स्थापना के लिए भूमि, जल एवं बिजली की व्यवस्था उपलब्ध है। प्रदेश में इस उद्योग के लिए आवश्यक इको सिस्टम एवं आपूर्ति शृंखला भी विकसित हो रही है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश शासन का सहयोग, त्वरित निर्णय प्रक्रिया तथा सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से शीघ्र स्वीकृतियां मिलने से उद्योग स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण बन रहा है।
आरआरपी इलेक्ट्रॉनिक्स की मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी अपूर्वा राउत ने कहा कि सेमी कंडक्टर पैकेजिंग उद्योग के विकास के लिए उपयुक्त सोच एवं प्रयासों में निरंतरता आवश्यक है और मध्यप्रदेश में ये दोनों विशेषताएं मौजूद हैं। उन्होंने बिजली की उपलब्धता को इस उद्योग की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश का पावर सरप्लस राज्य होना इसे सेमी कंडक्टर उद्योग के लिए महत्वपूर्ण स्थान बनाता है।
राउत ने कहा कि पैकेजिंग उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप बड़े पैमाने पर कार्गो एवं लॉजिस्टिक्स संचालन की क्षमता विकसित करना तथा प्रमुख शहरों से बेहतर संपर्क सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने पैकेजिंग डिजाइन के क्षेत्र में आईआईटी एवं अन्य विश्वविद्यालयों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किए जाने का सुझाव दिया।
सुधीर नाईक ने प्रदेश में उपलब्ध तकनीकी प्रतिभाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आईआईटी इंदौर जैसे प्रगतिशील संस्थान एवं इंजीनियरिंग महाविद्यालय मध्यप्रदेश को तकनीकी प्रतिभा के केंद्र के रूप में विकसित करने का आधार प्रदान करते हैं। उन्होंने उन्नत पैकेजिंग के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि इससे संबंधित तकनीक एवं सेवाएं स्थानीय स्तर पर उचित लागत में उपलब्ध होनी चाहिए। उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सुदृढ़ एवं विश्वसनीय आपूर्ति शृंखला विकसित करना भी आवश्यक है।
एच-सेमी प्रोडक्ट्स, सिंगापुर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक बिनीत के. सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में सेमी कंडक्टर पैकेजिंग का इको सिस्टम विकसित हो रहा है तथा ओसैट कंपनियां भी प्रदेश में आ रही हैं। राज्य शासन द्वारा नीतियों का तीव्र गति से क्रियान्वयन किए जाने से इस क्षेत्र के विकास को गति मिल रही है।
सुदृढ़ फैबलेस इकोसिस्टम के लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पाद, वित्त एवं बाजार की उपलब्धता आवश्यक
“मध्यप्रदेश में सुदृढ़ फैबलेस इको सिस्टम का निर्माण” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा का संचालन वीएलएसआई सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सत्या गुप्ता ने किया। चर्चा में चिप डिजाइन से उत्पाद विकास तक आवश्यक सहयोग, फैबलेस कंपनियों की चुनौतियों, ग्राहकों की आवश्यकताओं, विपणन एवं नीतिगत व्यवस्थाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
जतिंदर सिंह ने कहा कि सुदृढ़ फैबलेस इको सिस्टम के लिए आवश्यक है कि चिप डिजाइन के माध्यम से बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पाद विकसित हों। उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर होने से फैबलेस कंपनियों के राजस्व में वृद्धि की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि कंपनियों को अंतिम उपभोक्ता की संतुष्टि पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने प्रदेश में वरिष्ठ स्तर की कुशल एवं अनुभवी प्रतिभाओं की उपलब्धता को आवश्यक बताया। उन्होंने मध्यप्रदेश में उत्पाद विकास से जुड़े इको सिस्टम को सुदृढ़ करने तथा इसके लिए आवश्यक सहयोग को नीतिगत ढांचे में शामिल किए जाने पर जोर दिया।
इंडिया सेमी कंडक्टर मिशन के सलाहकार जसविंदर अहूजा ने कहा कि वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता फैबलेस कंपनियों के लिए एक प्रमुख चुनौती है। उन्होंने चिप विकास के साथ ही कंपनियों को उत्पाद विकसित करने वाली कंपनियों के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उत्पाद विकास को सहयोग देने वाला समग्र इको सिस्टम तैयार किया जाना चाहिए, जिससे कंपनियां अपने डिजाइन को उपयोगी उत्पादों के रूप में बाजार तक पहुंचा सकें।
प्रीत यादव ने कहा कि पिछले कई वर्षों से सेवा क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है। अब विनिर्माण क्षेत्र पर भी ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में फैबलेस कंपनियों को उत्पाद डिजाइन की बैकएंड प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि उत्पाद विकास एवं विनिर्माण से जुड़ी आवश्यकताओं को प्रभावी रूप से पूरा किया जा सके।
नेत्रासेमी प्रायवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं सह-संस्थापक ज्योतिस इंदिराभाई ने कहा कि फैबलेस इको सिस्टम की मजबूती के लिए उत्पाद विकास से जुड़ा इको सिस्टम परिपक्व होना आवश्यक है। इसके लिए उत्पादन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ उत्पादों के लिए बाजार की उपलब्धता भी जरूरी है। मनोज अग्रवाल ने कहा कि फैबलेस कंपनियों के लिए तकनीकी क्षमता उपलब्ध है। इसके साथ ही उत्पादों के विपणन के लिए उचित व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
विनिर्माण एवं आपूर्ति शृंखला की मजबूती के लिए अनुसंधान और उन्नत प्रशिक्षण पर बल
“सेमी कंडक्टर विनिर्माण एवं आपूर्ति शृंखला” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने देश की विनिर्माण क्षमताओं के विस्तार, उन्नत तकनीकों पर अनुसंधान, केंद्रीकृत प्रयोगात्मक सुविधाओं तथा उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास पर अपने विचार रखे। सेमी कंडक्टर लैब, मोहाली के महानिदेशक डॉ. कमलजीत सिंह ने सेमी कंडक्टर उद्योग में विनिर्माण एवं सुदृढ़ आपूर्ति शृंखला को अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील घटक बताया। उन्होंने कहा कि इस उद्योग की सफलता के लिए चिप डिजाइनिंग से लेकर फैब्रिकेशन और पैकेजिंग तक संपूर्ण मूल्य शृंखला को मजबूत करना अनिवार्य है।
आईआईटी इंदौर के प्रोफेसर मुकेश कुमार ने सेमी कंडक्टर विनिर्माण के क्षेत्र में भारत की क्षमताओं को विस्तार देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में चिप डिजाइन के एक मजबूत केंद्र के रूप में स्थापित है। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अब 2डी सेमीकंडक्टर्स से आगे बढ़कर क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी उन्नत तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। प्रो. कुमार ने शैक्षणिक संस्थानों में प्रयोगात्मक सुविधाओं, प्रायोगिक अनुसंधान एवं कौशल संवर्धन को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि सेमी कंडक्टर क्षेत्र में उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसके लिए देश में एक सुदृढ़ राज्य-प्रायोजित अनुसंधान एवं विकास प्रणाली का निर्माण किया जाना चाहिए। टेराडाइन कंपनी की कंट्री मैनेजर अल्पा सूद ने सेमी कंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए विद्यार्थियों को उन्नत प्रशिक्षण देना अत्यंत आवश्यक है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

