सीहोरः सात दिवसीय भागवत कथा में उमड़ा आस्था का सैलाब, कथा स्थल बना तीर्थ

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सीहोरः सात दिवसीय भागवत कथा में उमड़ा आस्था का सैलाब, कथा स्थल बना तीर्थ


- इंसान को विपरीत परिस्थितियों में विवेक से लेना चाहिए कामः पंडित प्रदीप मिश्रा

सीहोर, 26 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के शहर के बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल धर्मशाला में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शनिवार को श्रद्धा, भक्ति और भावपूर्ण वातावरण में समापन हुआ। कथा के अंतिम दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचे। सात दिनों तक बड़ा बाजार का क्षेत्र आस्था के तीर्थ के रूप में नजर आया। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण के साथ भजन-कीर्तन और भगवान के दर्शन का लाभ लिया।

समापन अवसर पर प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि इंसान कभी खराब नहीं होता, उसका समय खराब होता है। इसलिए व्यक्ति को समय को समझना चाहिए और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य एवं विवेक से काम लेना चाहिए। समय एक चक्र है, जो प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में आता है और चला भी जाता है। ऐसे समय में घबराने के बजाय संयम के साथ परिस्थितियों का सामना करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भागवत कथा भक्ति को प्रबल करती है, शिव महापुराण भक्ति के साथ विश्वास को मजबूत करता है और रामायण हमें जीवन जीने की कला सिखाती है। हमारे धार्मिक ग्रंथ मनुष्य को सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। आवश्यकता है कि हम इनके संदेशों को अपने जीवन में उतारें।

दूसरों के दुख को समझना ही सच्ची मानवता

पं. प्रदीप मिश्रा ने कहा कि दूसरों के दुख को समझना और उनके प्रति दया का भाव रखना ही मानवता का मूल है। निस्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की मदद करना तथा उनके दुख-दर्द को कम करने के लिए कार्य करना ही सच्ची सेवा है। मानवता ऐसा धर्म है, जो व्यक्ति को बेहतर बनने के साथ नैतिकता, प्रेम और सेवा का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि भगवान पर विश्वास रखने वाला व्यक्ति कभी निर्धन नहीं हो सकता। मनुष्य का सबसे बड़ा धन संतोष और संतुष्टि है। संतोष के बल पर व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में अपना जीवन सहजता से व्यतीत कर सकता है। उन्होंने कहा कि भगवान का भजन और नाम जाप करने वाला व्यक्ति कभी निर्धन नहीं होता। यदि संत नहीं बन सकते तो संतोषी जरूर बनें, क्योंकि संतोष ही सबसे बड़ा धन है।

सुदामा की निस्वार्थ मित्रता से दिया विश्वास का संदेश

कथा के दौरान पं. प्रदीप मिश्रा ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि सुदामा की मित्रता भगवान श्रीकृष्ण के साथ पूरी तरह निस्वार्थ थी। उन्होंने कभी भगवान से सुख-सुविधा, साधन या आर्थिक लाभ की कामना नहीं की। सुदामा की पत्नी द्वारा भेजे गए चावलों की पोटली के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी पूरी परिस्थिति को समझ लिया और बिना मांगे ही उन्हें सब कुछ प्रदान कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान के प्रति विश्वास और भरोसा मजबूत होना चाहिए। सच्ची श्रद्धा और निस्वार्थ भाव से की गई भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती।

सातों दिन श्रद्धालुओं के लिए रही सेवा व्यवस्था

सात दिवसीय भागवत कथा के दौरान अग्रवाल धर्मशाला और आसपास का क्षेत्र श्रद्धालुओं से भरा रहा। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे। विठलेश सेवा समिति सहित अन्य सेवा संगठनों द्वारा सातों दिनों तक श्रद्धालुओं के लिए पेयजल और भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई। कथा के चलते पूरे क्षेत्र में धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

अग्रवाल महिला मंडल ने सहयोगियों का जताया आभार

समापन अवसर पर अग्रवाल महिला मंडल की अध्यक्ष रुक्मिणी रोहिला ने सात दिवसीय आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पिछले 27 वर्षों से लगातार भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है और इस वर्ष भी श्रद्धालुओं के सहयोग से दिव्य एवं भव्य आयोजन संपन्न हुआ। उन्होंने विधायक सुदेश राय, नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर, जिला प्रशासन, विठलेश सेवा समिति की नगर इकाई, विभिन्न महिला मंडलों तथा क्षेत्रवासियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से कथा का संदेश और पुण्य लाभ जन-जन तक पहुंच सका। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं और सेवाभावी कार्यकर्ताओं का भी धन्यवाद किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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