सतनाः मंदाकिनी, टमस सहित नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर के बीच जिला प्रशासन हाई अलर्ट पर

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सतनाः मंदाकिनी, टमस सहित नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर के बीच जिला प्रशासन हाई अलर्ट पर


सतनाः मंदाकिनी, टमस सहित नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर के बीच जिला प्रशासन हाई अलर्ट पर


सतनाः मंदाकिनी, टमस सहित नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर के बीच जिला प्रशासन हाई अलर्ट पर


- बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य तेज

सतना/भोपाल, 01 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सतना जिले में मंगलवार को भोर से लगातार हो रही बारिश और नदी-नालों में बढ़ रही पानी की आवक को देखते हुए जिला प्रशासन ने पूरे जिले में हाई अलर्ट जारी किया है।

कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने सभी अनुविभागीय अधिकारियों, राजस्व अधिकारियों, पुलिस, नगरीय निकायों, पंचायतों तथा आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

जिले में लगातार वर्षा के कारण चित्रकूट की मंदाकिनी नदी, टमस नदी, सेमरावल सहित अन्य नदी-नालों का जलस्तर बढ़ रहा है। प्रशासन द्वारा संवेदनशील एवं निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया गया है तथा आवश्यकता के अनुसार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई की जा रही है।

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के बाद प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन की टीमें पूरी तरह सक्रिय हैं। सुबह 6 बजे आरोग्यधाम के पास मंदाकिनी नदी का जलस्तर 137.15 मीटर दर्ज किया गया, जबकि अधिकतम बाढ़ स्तर (भ्थ्स्) 139.60 मीटर है। जलस्तर का रुझान बढ़ता हुआ दर्ज किया गया। आरोग्यधाम घाट के आसपास पानी तेजी से बस्तियों की ओर बढ़ने की स्थिति को देखते हुए लोगों को घरों से बाहर निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का कार्य किया गया।

प्रशासन द्वारा लगातार अनाउंसमेंट कर लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें भी बचाव कार्य में जुटी रहीं। चित्रकूट के केवटरा, लोसरिहा सहित प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस एवं पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह सहित जिला प्रशासन का अमला चित्रकूट में स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकारियों ने राहत एवं बचाव कार्य में लगे कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश दिए तथा प्रभावित लोगों के लिए आश्रय, भोजन एवं पेयजल की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।

टमस नदी का वर्तमान जलस्तर 288.29 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि खतरे का स्तर 289 मीटर है। जलाशय का पूर्ण स्तर 280.50 मीटर तथा वर्तमान जलस्तर 279.00 मीटर बताया गया है। पानी की आवक को देखते हुए 12 गेट 0.75 मीटर तक खोले गए हैं, जिनसे लगभग 1338 क्यूमेक (घन मीटर प्रति सेकंड) पानी की निकासी की जा रही है। प्रशासन द्वारा नदी के जलस्तर एवं पानी की निकासी की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

सेमरावल नदी के तटीय गांवों में पूर्व सतर्कता

लगातार वर्षा और पानी की बढ़ती आवक के कारण सेमरावल नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। संभावित खतरे को देखते हुए रामपुर बघेलान और कोटर तहसील के तटीय क्षेत्रों के अनेक ग्रामों के निवासियों को तत्काल सतर्क रहने तथा आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए सूचित किया गया है। इनमें अकाउना, अबेर, इतौर, बर्दाढीह, कोरगंवा, गजिगवां, गौरैया, ढोढी, भातिगवां, मैनपुरा, गोलहटा, गढ़वा कला, टेढ़गवां, रजरवार, किचवरया, लॉलाक्ष, खोहर, घटबेलवा, कितहा पेपखार, मांझीहार पेपाखार, गढ़वा खुर्द, रघुनाथपुर, मढ़ी, सोनवर्षा, खामहा, रामनगर, कन्दवा, थथारा, माझीयार कोठार, पीपरक्षा, वनपरा, पिथेपुर, रेहुता, बरती, बेला, क्षिबौरा सहित निकटवर्ती क्षेत्र शामिल हैं। रघुराजनगर तहसील के सुहास, रंगोली, अमौधा, बाबूपुर, महदेवा, इटौरा, पोंडी, बकिया, सकरिया सहित नदी किनारे स्थित गांवों तथा नागौद तहसील के जसईपुर, सिंहपुर तटीय क्षेत्र, रहिकवारा, अमकहा, गंज, पिपरी एवं आसपास के गांवों में भी प्रशासन द्वारा सतर्कता बरती जा रही है।

जैतवारा में संवेदनशील मार्गों पर बैरिकेडिंग, प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नगर परिषद जैतवारा एवं तहसील प्रशासन द्वारा संवेदनशील एवं जलमग्न मार्गों पर बैरिकेडिंग कर आवागमन बंद कराया गया। रेलवे अंडरब्रिज, जैतवारा-कुलकड़िया रोड पर कस्तूरिया नाला के पास पुलिया तथा भिटारी-पहुंज मार्ग पर झिरवाह नाला के पास बैरिकेडिंग एवं रस्सियां लगाकर आवागमन रोका गया। वार्ड क्रमांक 6 एवं 7 के सेरगंज मोहल्ले तथा वार्ड क्रमांक 13 में बाढ़ का पानी पहुंचने के बाद प्रभावित परिवारों को सुरक्षित निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। बाद में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए रॉयल पैलेस एवं रॉयल कॉम्पलेक्स में रहने और भोजन की व्यवस्था की गई। वार्ड क्रमांक 1 से 5 तक के प्रभावित लोगों के लिए बालाजी पैलेस में रहने एवं भोजन की व्यवस्था की गई।

चित्रकूट में राहत शिविर, भोजन एवं आवश्यक सामग्री की व्यवस्था

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए चित्रकूट क्षेत्र में प्रभावित लोगों के लिए राहत एवं आश्रय की व्यवस्था की गई। वन देवी आश्रम में दो हॉल खुलवाए गए हैं, जिनमें लगभग 100 लोगों के ठहरने की क्षमता है। नयागांव, केवटरा एवं लोसरिहा के प्रभावित लोगों के लिए भोजन के पैकेट तैयार कर रवाना किए गए। सतना से 2500 भोजन पैकेट नयागांव, केवटरा एवं लोसरिहा के लिए भेजे गए। नयागांव बाजार, केवटरा, रामधाम एवं बस स्टैंड क्षेत्र में भोजन वितरण किया गया। ग्राम सोहास में भी बाढ़ प्रभावित लोगों को नाश्ता वितरित किया गया। तहसील कोठी के डाडिटोला में मुकेश सिंह के घर पर राहत शिविर बनाया गया है, जहां 44 लोगों के लिए राशन की व्यवस्था की गई है। ग्राम रनेही में भी प्रभावित परिवारों को राशन वितरित किया गया।

एसडीआरएफ एवं एनडीआरएफ की टीमें राहत-बचाव में सक्रिय

चित्रकूट के आरोग्यधाम एवं केवटरा क्षेत्र में एसडीआरएफ तथा एनडीआरएफ की टीमों द्वारा लगातार रेस्क्यू अभियान चलाया गया। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए वाहन भी रिजर्व रखे गए हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए 6 टैक्सियां रिजर्व रखी गई हैं। प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अनाउंसमेंट कर लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं भी सक्रिय

बाढ़ प्रभावित ग्राम रंगोली (रगोली) में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोठी की मेडिकल टीम द्वारा स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। स्वास्थ्य टीम ने ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया तथा मौसमी बीमारियों एवं संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक दवाइयों का निरूशुल्क वितरण किया। एसडीएम श्री राहुल सिलाडिया ने मौके पर पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाओं एवं राहत कार्यों का जायजा लिया। शिविर में ब्भ्ब् कोठी के डॉक्टर देवव्रत दीक्षित, डॉक्टर ऋचा रोचलानी, ब्भ्व् प्रांशु सिंह, ।छड प्रभा सिंह एवं सुपरवाइजर के.पी. शुक्ला सहित स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद रही।

चित्रकूट में पानी उतरने के बाद सफाई और दवा का छिड़काव शुरू

चित्रकूट में दोपहर बाद मंदाकिनी नदी का पानी तेजी से उतरने लगा। लगभग 1.30 बजे के बाद सियाराम कुटीर के नीचे मुख्य सड़क से पानी उतरना शुरू हुआ। इसके बाद प्रशासन एवं नगर निकाय की टीमों ने सफाई अभियान तेज कर दिया। चित्रकूट में मुख्य मार्गों की सफाई, मलबा हटाने, जल निकासी तथा दवा एवं कीटनाशक का छिड़काव शुरू किया गया। गऊघाट मार्ग सहित प्रभावित क्षेत्रों में सफाई के बाद दवा का छिड़काव कराया जा रहा है। चौबेपुर तालाब से भी जल निकासी कराई जा रही है। रामायणी कुटी के पास मुख्य मार्ग पर जेसीबी एवं लेवलर की मदद से सड़क से मिट्टी एवं मलबा हटाया गया। परिक्रमा मार्ग स्थित शनि मंदिर क्षेत्र में पानी पूरी तरह निकल गया है तथा चित्रकूट की मुख्य सड़क भी लगभग साफ हो गई है। जानकी कुंड चिकित्सालय के सामने दवा एवं किराना दुकानों के खुलने के साथ लोगों की आवाजाही भी सामान्य होने लगी है। अतिवृष्टि के कारण कई स्थानों पर सड़क मार्ग प्रभावित हुए हैं। कोठी-चित्रकूट मार्ग से बिरसिंहपुर वाया पिपरी टोला सड़क पर आवागमन बंद किया गया है। जिगनहट मार्ग के पास पोड़ी एवं पतौरा जाने वाले मार्ग को डायवर्ट किया गया है। प्रशासन द्वारा ऐसे सभी मार्गों पर निगरानी रखी जा रही है जहां नदी-नाले अथवा जलभराव के कारण आवागमन प्रभावित हो सकता है।

श्रमदान एवं सफाई सामग्री की पर्याप्त व्यवस्था के निर्देश

अतिवृष्टि और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सीईओ जिला पंचायत शैलेंद्र सिंह ने अधिकारियों, पंचायत संस्थाओं एवं संबंधित अमले को राहत, सफाई एवं बचाव कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने के निर्देश दिए हैं। पंचायत एवं वार्ड स्तर पर तगाड़ी, फावड़ा, गैंती, झाड़ू एवं अन्य स्वच्छता उपकरण पर्याप्त मात्रा में रखने को कहा गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर शासकीय अमले के साथ जनभागीदारी एवं श्रमदान के माध्यम से सफाई और राहत कार्य तेजी से किए जा सकें। इसके लिए स्थानीय स्तर पर, विभागीय स्तर पर, जनसहयोग, प्रतिष्ठित संस्थाओं, निर्माण एजेंसियों एवं अन्य माध्यमों से सामग्री की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।

शिक्षकों को ऑनलाइन उपस्थिति में राहत

अतिवृष्टि एवं बाढ़ की स्थिति तथा स्कूलों में अवकाश को देखते हुए शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में भी राहत दी गई है। बाढ़ के कारण यदि शिक्षक स्कूल तक नहीं पहुंच पाते हैं और संकुल प्राचार्य द्वारा इसका सत्यापन कर दिया जाता है, तो संबंधित शिक्षक का वेतन नहीं काटा जाएगा।

आमजन से प्रशासन की अपील

जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि नदी, नाले, पुल-पुलिया एवं जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें। तेज बहाव वाले पानी में पैदल अथवा वाहन से नदी-नाला पार करने का प्रयास न करें। यदि सड़क या पुलिया के ऊपर से पानी बह रहा हो तो उसे पार न करें और प्रशासन द्वारा लगाए गए बैरिकेड एवं अवरोध को हटाकर आगे न बढ़ें। जर्जर एवं क्षतिग्रस्त मकानों में रहने वाले लोग विशेष सावधानी बरतें और खतरा महसूस होने पर तत्काल सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। बारिश एवं बाढ़ के दौरान विद्युत खंभों, तारों और ट्रांसफार्मरों से भी पर्याप्त दूरी बनाए रखें। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल अधिकृत स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं पर विश्वास करें। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रशासन, पुलिस या राहत एवं बचाव दल को सूचना दें तथा उनके निर्देशों का पालन करें। जिला प्रशासन सतना द्वारा बाढ़ एवं अतिवृष्टि की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, नगरीय निकाय एवं पंचायतों की टीमें राहत, बचाव, स्वास्थ्य, भोजन, आश्रय एवं सफाई कार्यों में सक्रिय रूप से जुटी हुई हैं।

अतिवृष्टि के चलते सतना जिले में शैक्षणिक संस्थानों में 2 और 3 सितंबर को अवकाश

सतना जिले में लगातार हो रही भारी बारिश, अतिवृष्टि, नदी-नालों के उफान और जलभराव की स्थिति को देखते हुए छात्र-छात्राओं एवं आमजन की सुरक्षा के दृष्टिगत जिला प्रशासन द्वारा महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट डॉ. सतीश कुमार एस के आदेशानुसार जिले में संचालित समस्त शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों के लिए 2 एवं 3 सितंबर 2026 को दो दिवस का अतिरिक्त अवकाश घोषित किया गया है।

जिला शिक्षा अधिकारी सलोनी शर्मा द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह अवकाश सतना जिले में संचालित समस्त शासकीय, अशासकीय एवं केंद्रीय विद्यालयों, जवाहर नवोदय विद्यालय, आईसीएसई, सीबीएसई तथा अन्य मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थाओं में नर्सरी से कक्षा 12वीं तक अध्ययनरत छात्र-छात्राओं पर लागू रहेगा। लगातार वर्षा के कारण नदी-नाले उफान पर हैं तथा कई स्थानों पर आवागमन प्रभावित होने की स्थिति को देखते हुए यह निर्णय विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।

महाविद्यालयों, आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक में भी अवकाश

कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट सतना द्वारा जारी आदेश के अनुसार पूर्व में घोषित अवकाश की अवधि को बढ़ाते हुए शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों, आईटीआई, पॉलिटेक्निक कॉलेजों तथा स्नातक एवं स्नातकोत्तर सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों एवं संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए भी 2 एवं 3 सितंबर 2026 तक अवकाश घोषित किया गया है। यह अवकाश केवल अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए लागू रहेगा। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि इन तिथियों में कोई परीक्षा पूर्व से निर्धारित है, तो वह यथावत संचालित होगी। ऐसी स्थिति में संबंधित शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक स्टाफ संस्थान प्रमुख के निर्देशानुसार उपस्थित रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे। सभी संस्थान प्रमुखों को वर्षा एवं जलभराव से उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए संस्थानों की परिसंपत्तियों एवं महत्वपूर्ण अभिलेखों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सतना जिले में लगातार भारी बारिश और नदी-नालों के उफान को देखते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा भी आदेश जारी किया गया है। इसके तहत 2 एवं 3 सितंबर 2026 को आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों का आना प्रतिबंधित रहेगा। आदेश के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका एवं अन्य स्टाफ इस अवधि में अपने मुख्यालय पर उपलब्ध रहेंगे तथा आवश्यकता पड़ने पर बाढ़, आपदा प्रबंधन एवं अन्य प्रशासनिक/आकस्मिक सेवाओं में सहयोग करेंगे। कलेक्टर ने सभी संबंधित विभागों एवं संस्थान प्रमुखों को जारी आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

चित्रकूट में कमिश्नर ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया निरीक्षण

रीवा संभाग के कमिश्नर शीलेन्द्र सिंह ने मंगलवार की रात चित्रकूट में संभागीय अधिकारियों एवं जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक के बाद बाढ़ एवं अतिवृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने रामघाट मोड़, पर्यटक होटल तिराहा तथा हनुमान धारा रोड पर क्षतिग्रस्त पुल के स्थल का निरीक्षण कर मौके की स्थिति की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने मंदाकिनी नदी के बढ़े हुए जलस्तर का भी अवलोकन किया और संबंधित अधिकारियों से नदी के जलस्तर एवं वर्तमान परिस्थितियों की जानकारी प्राप्त की।

इस मौके पर कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस, पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह, अपर कलेक्टर विकास सिंह, सीईओ जिला पंचायत शैलेन्द्र सिंह सहित जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लगातार हो रही बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाए। क्षतिग्रस्त पुल एवं अन्य जोखिम वाले स्थानों पर आवागमन को नियंत्रित करने तथा लोगों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो और प्रशासनिक एवं आपदा प्रबंधन की टीमें पूरी तरह सक्रिय रहें। कमिश्नर ने चित्रकूट में पुरानी लंका तिराहा के पास बनाए गए आश्रय स्थल का भी निरीक्षण किया। उन्होंने यहां ठहराए गए बाढ़ प्रभावित परिवारों से बातचीत कर उनकी समस्याओं एवं उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने प्रभावितों से भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वच्छता तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में सीधे जानकारी प्राप्त की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आश्रय स्थलों में रह रहे प्रभावित परिवारों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। सभी लोगों के लिए पर्याप्त भोजन एवं स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था के साथ आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध रहें। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की जरूरतों का विशेष ध्यान रखने के निर्देश भी दिए गए।

राहत और पुनर्वास के कार्यो में ढिलाई नहीं बरते-कमिष्नर

निरीक्षण से पहले कमिश्नर शीलेन्द्र सिंह ने चित्रकूट नगर परिषद के सभाकक्ष में संभागीय अधिकारियों तथा जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक लेकर चित्रकूट में मंदाकिनी नदी में आई बाढ से प्रभावित क्षेत्रों में बाढ राहत और पुनर्वास के कार्यो की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सभी विभाग प्रमुख तत्परतापूर्वक बाढ प्रभावितों को राहत पहुंचाने और नागरिक सुविधायें बहाल करने के कार्य को तत्परतापूर्वक पूरा कराये। उन्होंने कहा कि राहत और पुनर्वास के कार्यो में ढिलाई नहीं बरते।

कमिश्नर ने बताया कि राज्य शासन के नगरीय विकास विभाग द्वारा चित्रकूट के नागरिकों की पेयजल सहित मूलभूत सुविधायें बहाल करने नगर परिषद चित्रकूट को 80 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस अवसर पर विधायक चित्रकूट सुरेन्द्र सिंह गहरवार, कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस, पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह, डीएफओ मयंक चांदीवाल, सीईओ जिला पंचायत शैलेन्द्र सिंह, अपर कलेक्टर विकास सिंह, एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर सहित सडक विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न विभागों के संभागीय तथा जिला विभाग प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे।

कमिश्नर ने अतिवृष्टि और मंदाकिनी की बाढ से प्रभावित चित्रकूट सहित सतना जिले के अन्य क्षेत्रों में जल जमाव और बाढ से क्षतिग्रस्त हुई अधोसंरचनाओं सडक मार्गो, पुल-पुलियों, एवं जलाशयों के क्षति की जानकारी ली और उनके रेस्टोरेशन के संबंध में विभाग द्वारा की जा रही कार्यवाहियों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान सडकों पर बडे-बडे गड्ढों को मरम्मत कर रेस्टोरेशन कराये। इसी प्रकार सडक के क्षति ग्रस्त हुए पुल-पुलियों पर आवश्यक मरम्मत और निर्माण कर उन्हें मोटरेवल बनाये। चित्रकूट हनुमानधारा मार्ग पर क्षतिग्रस्त हुए पुल की जानकारी लेते हुए कमिश्नर ने मुख्य अभियंता लोक निर्माण ब्रिज को दीपावली से पहले आवागमन सुचारू करने और आने वाली अमावस्या तक वैकल्पिक मार्ग बनाने के निर्देश दिये। पिण्डरा के पास पुल में मिट्टी से हुए सडक कटाव को कल शाम तक रेस्टोरेश्न करते हुए आवागमन के लिए मोटरेवल बनाने के निर्देश दिये।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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