मप्र में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में स्थापित हो रहे हैं बड़े-बड़े आयामः मंत्री शुक्ला

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मप्र में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में स्थापित हो रहे हैं बड़े-बड़े आयामः मंत्री शुक्ला


- विभाग ने पिछले दो वर्ष में हासिल की बड़ी उपलब्धियाँ: नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री

ग्वालियर, 17 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा कि सुनियोजित एवं प्रभावी नवकरणीय ऊर्जा नीति की बदौलत प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े-बड़े आयाम स्थापित हो रहे हैं। विभाग द्वारा पिछले दो वर्ष के दौरान उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की गईं हैं।

मंत्री राकेश शुक्ला शनिवार को ग्वालियर में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश को नवकरणीय ऊर्जा की विभिन्न परियोजनाओं के लिये ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के माध्यम से बड़े निवेश के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। यह प्रस्ताव धरातल पर भी आना शुरू हो गए हैं।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में निवेशक मित्र मध्य प्रदेश नवकरणीय ऊर्जा नीति-2022 एवं यथा पुनरीक्षित मध्य प्रदेश नवकरणीय ऊर्जा नीति-2025 लागू की गई। इस नीति के अंतर्गत प्रदेश में बायोफ्यूल (बायोमास) परियोजनाओं एवं पम्पड हाइड्रो स्टोरेज को बढ़ावा देने के लिये मध्य प्रदेश बायोफ्यूल क्रियान्वयन स्कीम-2025, मध्य प्रदेश पम्पड हाइड्रो स्टोरेज क्रियान्वयन स्कीम-2025 लागू की गई।

शुक्ला ने बताया कि आगर-शाजापुर-नीमच सौर पार्क के अंतर्गत 1045 मेगावॉट क्षमता स्थापित (विक्रयदर का 2.33 प्रति यूनिट से 2.44 प्रति यूनिट)। विश्व की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर परियोजना के अंतर्गत 278 मेगावॉट क्षमता स्थापित की गई है, जिसकी विक्रय दर (2.21 प्रति यूनिट) है।

उन्होंने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 में 5.64 लाख करोड़ रूपये निवेश की परियोजना प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इसमें 15,200 मेगावॉट क्षमता पम्पड हाइड्रो स्टोरेज परियोजनाओं के प्रस्ताव शामिल हैं। जिनमें 8,400 मेगावॉट क्षमता के विकास की कार्यवाही प्रारंभ हो चुकी है। इसी तरह बायोफ्यूल परियोजना अंतर्गत लगभग 8,500TDP के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। लगभग 2,300 TDP के विकास की कार्यवाही प्रारंभ हो चुकी है। रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा 90 TDP सी.पी.जी. प्लांट स्थापित किए गए है। 7000 मेगावाट क्षमता की सौर एवं पवन ऊर्जा परियोजनाओं पर विकास की कार्यवाही शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री कुसुम योजनाएं कुसुम-अ परियोजना का लाभ भी प्रदेश के किसानों को मिल रहा है।

मंत्री राकेश शुक्ला ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत 1510 मेगावॉट क्षमता की परियोजनाएं आवंटित की गई है, जिनमें 940 मेगावॉट पर विकास प्रारंभ हो चुका है। कुसुम-ब परियोजना के अंतर्गत 52,000 पंपों की स्थापना हेतु पोर्टल पर आवेदन प्राप्त किए जा रहे हैं। कुसुम-स परियोजना के अंतर्गत 521 मेगावॉट आवंटित हो चुकी है, जिस पर विकास प्रारंभ है। इसके अंतर्गत 1.00 लाख कृषि पंपों का सोलराईजेशन किया जा सकेगा। कुसुम-स परियोजना अंतर्गत 4,000 मेगावॉट क्षमता के लिए निविदा जारी की गई थी, जिसमें ऐतिहासिक 548 बिड्स प्राप्त हुई और लगभग 18,000 मेगावॉट क्षमता के प्रस्ताव प्राप्त हुए है।

शुक्ला ने बताया कि शासकीय संस्थाओं में 8.5 मेगावाट क्षमता के सौर रूफटॉप स्थापित किये गये प्रदेश में सभी शासकीय संस्थाओं पर सौर रूफटॉप संयंत्र स्थापना हेतु रेस्को मोड में संयंत्र स्थापित किये जायेंगे। इस दिशा में 47 जिलों में विकासकों का चयन किया जा चुका है। इसमें 3.50 पैसे से 4.15 पैसे प्रति यूनिट की दर प्राप्त हुई है। घरेलू क्षेत्र में 76500 घरों पर लगभग 2.5 मेगावाट क्षमता के सौर रूफटॉप संयंत्र स्थापित किये गये हैं।

आगामी कार्य योजनाएँ

- मुरैना व शिवपुरी में लगभग 2000 मेगावाट क्षमता के सौर संयंत्र की स्थापना किये जायेंगे। जिसमें नवाचार रूप में यू.पी. एवं एम.पी. की आवश्यकता के अनुसार ऊर्जा प्रदाय की जाएगी।

- प्रदेश में 30.00 लाख कृषि पम्पस का सोलराईजेशन किया जायेगा।

- धार, बडवानी, जिलों में 300 मेगावाट क्षमता की सौर भण्डारण ऊर्जा परियोजनाएँ स्थापित की जाएगी।

- कुसुम-अ के अंतर्गत आगामी 3 वर्षों में 2000 मेगावाट क्षमता स्थापित की जायेगी।

- सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना के अंतर्गत आगामी 3 वर्षों में 8000 मेगावाट की क्षमता की परियोजनाएँ स्थापित की जायेगी।

- सभी शासकीय संस्थाओं पर सौर रूफटॉप संयंत्र स्थापित किये जाएंगे।

- घरेलू क्षेत्र में लगभग 5.00 लाख घरों पर सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित किये जाएंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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