प्रधानमंत्री मोदी का विकसित भारत का संकल्प वर्ष-2047 तक होगा पूरा : मंत्री परमार
- मंत्री परमार डेली कॉलेज इंदौर में भारतीय ज्ञान परम्परा पर आधारित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में हुए शामिल
इंदौर, 05 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान केवल आध्यात्म तक सीमित नहीं होकर वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी ओत-प्रोत है। भारतीय ज्ञान में ऋषि परम्पराओं के अलावा दर्शन और प्रमाणों का भी उल्लेख है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्ष 2020 में तैयार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीयता का बोध है। इस नीति से वर्ष 2047 तक प्रधानमंत्री मोदी का विकसित भारत का संकल्प पूरा होगा और इसे हमारी आज की पीढ़ी देखेगी।
मंत्री परमार बुधवार को इंदौर के डेली कॉलेज ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट संस्थान में भारतीय ज्ञान परम्परा पर आधारित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति हमारे विद्यार्थियों को हमारी ऋषि परम्पराओं के साथ-साथ आधुनिकता से भी जोड़ती है। हजारों वर्ष पूर्व हमारे ऋषियों ने ज्ञान-विज्ञान, दर्शन, संस्कृति, कला आदि विषयों पर जो कहा, उसके पीछे वैज्ञानिक आधार और प्रमाण है। हमारे ऋषियों ने ही कहा था कि पृथ्वी गोल है। इसका उल्लेख डॉ. धर्मपाल ने अपनी पुस्तकों में किया है।
उन्होंने कहा कि विश्व को ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में भारत की बड़ी देन है। दुनिया को भारत ने गणित में केवल शून्य ही नहीं दिया, बल्कि गणित के कई ऐसे सूत्र भी दिए, जिसके माध्यम से पृथ्वी से सूर्य की दूरी या ब्रह्माण्ड के रहस्यों के बारे में पता लगाया जा सकता है। भारत में वर्षों पूर्व सात लाख से अधिक गुरूकुल थे। नालन्दा और तक्षशिला शिक्षा के सबसे बड़े केन्द्र थे। इन शिक्षा केन्द्रों पर साहित्य, कला, दर्शन के अलावा मेडिकल और इंजीनियरिंग विषयों की भी शिक्षा दी जाती थी। भारत में बोधायन, कणाद और आर्यभट्ट जैसे महान गणितज्ञ हुए, जिन्होंने कई महत्वपूर्ण सूत्र दिए।
मंत्री परमार ने कहा कि मध्य प्रदेश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रदेश में शोध और नवाचार हो रहे हैं। प्रदेश के 13 विश्वविद्यालयों में भारतीय भाषाओं का अध्ययन कराया जा रहा है, जिसमें हिन्दी भाषा के अलावा तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, असमी, सिंधी आदि भाषाएं शामिल है। इन सभी भाषाओं के माध्यम से देश को एकात्मता के भाव से जोड़ना है। साथ ही हिन्दी भाषी व्यक्ति यदि दूसरे प्रदेश में शिक्षा और रोजगार के लिए जाये, तो उसे भाषागत परेशानी नहीं आए।
उन्होंने कहा कि हमें भारतीय भाषाओं पर गर्व होना चाहिए। हम एक-दूसरे से अपनी भाषा में ही संवाद करें और घरों में भी मातृ भाषा का अधिक प्रयोग करें। सभी भारतीय भाषाओं का स्वभाव जोड़ने का है। मंत्री परमार ने शिक्षक समुदाय से आह्वान किया कि वे हमारे विद्यार्थियों को भारतीयता से ओत-प्रोत ऐसी शिक्षा दें, जिसमें आध्यात्म और विज्ञान दोनों का समन्वय हो। इस शिक्षा में भारतीयता कूट-कूट कर भरी हो, जो हमें वसुधैव कुटुम्बकम् की ओर ले जाती है।
कार्यक्रम में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई, डेली कॉलेज सोसायटी के अध्यक्ष विक्रम सिंह पंवार, डेली कॉलेज ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट संस्थान की प्राचार्य डॉ. सोनल सिसोदिया, प्राचार्य डॉ. गुरमित बिंद्रा, कन्वेनर डॉ. आशुतोष सिंह ठाकुर, प्रशासक मयूर ध्वज विशेष रूप से उपस्थित थे।
कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा इंटरगेटिंग इंडियन नॉलेज के व्हाईट पेपर का विमोचन किया गया। मंत्री परमार ने डेली कॉलेज ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट संस्थान इंदौर का अवलोकन किया और सामूहिक चित्र भी खिंचाया। कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. सोनल मानसिंह ने भारतीय ज्ञान परम्परा पर आधारित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कन्वेनर डॉ. आशुतोष सिंह ठाकुर ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

