मप्र: ओबीसी आरक्षण पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा, 27% आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान

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मप्र: ओबीसी आरक्षण पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा, 27% आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान


- जीतू पटवारी ने न्यायिक पैरवी और खर्च पर उठाए सवाल, उमंग सिंघार बोले- सरकार ने पर्याप्त तथ्य नहीं रखे

भोपाल, 10 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस ने भाजपा सरकार से जवाब मांगा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शनिवार को संयुक्त प्रेसवार्ता में आरक्षण से जुड़े मामले में सरकार की भूमिका, न्यायालय में प्रस्तुत आंकड़ों और कानूनी पैरवी पर सवाल उठाए।

कांग्रेस ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने और 27 प्रतिशत आरक्षण के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने का ऐलान किया। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस इस लड़ाई का खर्च उठाने के लिए भी तैयार है।

प्रेसवार्ता में कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ओबीसी आरक्षण के समर्थन में पर्याप्त और विश्वसनीय आंकड़े प्रस्तुत करने में प्रभावी नहीं रही। उन्होंने सवाल किया कि पिछले छह वर्षों में इस मामले को मजबूत आधार देने के लिए क्या कदम उठाए गए और ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए सरकार की आगे की योजना क्या है। ये आरोप कांग्रेस नेताओं ने लगाए हैं; मामले की कानूनी स्थिति और सरकार का पक्ष अलग से देखना होगा।

पटवारी ने कानूनी खर्च और पैरवी पर उठाए सवाल

जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि ओबीसी आरक्षण के मामले में सरकार ने वकीलों की फीस और न्यायालयीन पैरवी पर भारी खर्च किया, लेकिन इसके अनुरूप परिणाम सामने नहीं आए। उन्होंने एक सुनवाई पर 55 लाख रुपए और बाद की सुनवाइयों पर खर्च को लेकर सवाल उठाए। पटवारी ने यह भी दावा किया कि आरक्षण के मामले में सरकार की ओर से करीब 200 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इन खर्च संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

पटवारी ने कहा कि कांग्रेस 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट में कानूनी चुनौती देगी और अपने स्तर पर वकीलों के खर्च की जिम्मेदारी उठाएगी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों से सहयोग लेने के प्रयास किए जाएंगे।

उन्होंने कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान 27 प्रतिशत आरक्षण की पहल का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में यह मुद्दा समाधान तक नहीं पहुंच सका। पटवारी ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आरक्षण के समर्थन में प्रभावी कानूनी पैरवी और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए क्या प्रयास किए गए।

सर्वे और आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल

कांग्रेस नेताओं ने ओबीसी आरक्षण के समर्थन में न्यायालय के सामने प्रस्तुत आंकड़ों पर भी सवाल उठाए। पटवारी और सिंघार ने कहा कि प्रदेश की बड़ी आबादी के संदर्भ में करीब 10 हजार लोगों के सर्वे के आधार पर व्यापक सामाजिक स्थिति का आकलन किए जाने को लेकर सवाल उठते हैं। उमंग सिंघार ने कहा कि आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय में सरकार की जिम्मेदारी थी कि वह न्यायालय के समक्ष पर्याप्त, अद्यतन और विश्वसनीय आंकड़े रखती। उन्होंने पुराने आंकड़ों की प्रासंगिकता, विभिन्न सामाजिक वर्गों की स्थिति और शैक्षणिक आंकड़ों से जुड़े पहलुओं पर भी सवाल उठाए।

सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार ने ओबीसी आरक्षण के पक्ष में अपना मामला मजबूती से प्रस्तुत नहीं किया। उनके मुताबिक, इसका असर उन युवाओं की उम्मीदों पर पड़ा है, जो शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण के लाभ की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आंकड़ों के संग्रह और कानूनी तैयारी में कहां कमी रही।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार से जवाब की मांग

कांग्रेस नेताओं ने 9 अक्टूबर को आए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर ओबीसी समाज की उम्मीदों को झटका लगा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में न्यायालय के आदेश का विस्तृत अध्ययन कर आगे की कानूनी रणनीति बनाई जाएगी।

नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर सरकार की जिम्मेदारी केवल सर्वदलीय बैठक बुलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे न्यायालय में अपने पक्ष के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य और तथ्य भी प्रस्तुत करने चाहिए थे। उन्होंने सरकार से पूछा कि आरक्षण के मामले में अब आगे क्या कदम उठाए जाएंगे और प्रभावित अभ्यर्थियों को लेकर उसकी क्या योजना है।

उन्होंने कहा कि ओबीसी आरक्षण का मुद्दा शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जुड़ा है। ऐसे में सरकार को इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और कानूनी प्रक्रिया के संबंध में पारदर्शिता रखनी चाहिए।

जनजागरण अभियान चलाने की तैयारी

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने कहा कि कांग्रेस आरक्षण के मुद्दे को कानूनी लड़ाई के साथ जनजागरण अभियान के माध्यम से भी आगे बढ़ाएगी। उन्होंने ओबीसी समाज के नेताओं और युवाओं से एकजुट होकर सरकार से जवाब मांगने की अपील की। कांग्रेस इस मुद्दे पर बैठक कर आगे की रणनीति तय करेगी। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस वर्ष 2028 में प्रदेश में सरकार बनने पर 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू कराने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी। उन्होंने दोहराया कि पार्टी कानूनी, संगठनात्मक और लोकतांत्रिक स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी।

प्रेसवार्ता में कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक, पूर्व विधायक राजकुमार पटेल, महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष प्रभा पटेल और पूर्व प्रवक्ता आनंद जाट भी मौजूद रहे। आनंद जाट ने प्रोजेक्टर के माध्यम से वर्ष 1983 से 2026 तक ओबीसी आरक्षण से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी प्रस्तुत की। कांग्रेस ने भाजपा सरकार से मांग की कि वह 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करे, न्यायालयीन प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक करे और आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए आगे की कार्ययोजना बताए।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

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